SC ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशंस 2026 पर लगाई रोक, भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने पोस्ट में जताया आभार
सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को अंतरिम रूप से रोक लगाते हुए इन नियमों को अभय में रख दिया। कोर्ट ने इन नियमों में प्रमुख प्रावधानों में पूर्ण अस्पष्टता होने की बात कही और इन्हें दुरुपयोग के लिए प्र
हरदोई : जिले की गोपामऊ विधानसभा के विधायक श्याम प्रकाश ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए संशोधनों पर लगाई गई रोक का उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को अंतरिम रूप से रोक लगाते हुए इन नियमों को अभय में रख दिया। कोर्ट ने इन नियमों में प्रमुख प्रावधानों में पूर्ण अस्पष्टता होने की बात कही और इन्हें दुरुपयोग के लिए प्रवण बताया। मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत और न्यायमूर्ति जोयमलया बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नियमों की भाषा में संशोधन की आवश्यकता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया तथा मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की। फिलहाल 2012 के यूजीसी नियम प्रभावी रहेंगे। ये नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए लाए गए थे, जिनमें एससी, एसटी और ओबीसी श्रेणी के छात्रों से संबंधित शिकायतों के लिए विशेष समितियां और हेल्पलाइन स्थापित करने का प्रावधान था।
ये नियम 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए। सामान्य श्रेणी के छात्रों ने इन नियमों को भेदभावपूर्ण बताया क्योंकि इनमें केवल एससी, एसटी और ओबीसी के खिलाफ जातिगत भेदभाव की परिभाषा पर जोर था, जबकि सामान्य श्रेणी के छात्रों की सुरक्षा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। कई याचिकाओं में इन नियमों को संवैधानिक रूप से असंगत और यूजीसी अधिनियम 1956 का उल्लंघन करने वाला बताया गया। कोर्ट ने कहा कि नियमों की वर्तमान स्थिति में इन्हें लागू करने से गंभीर मुद्दे उत्पन्न हो सकते हैं और इन्हें पुनः जांचने की आवश्यकता है।
हरदोई जिले की गोपामऊ विधानसभा से विधायक श्याम प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट की। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि धन्यवाद एवं आभार माननीय सुप्रीम कोर्ट को। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मोदी जी, भाजपा और भाजपाइयों की इज्जत और गालियां बचा ली। विधायक ने आगे लिखा कि इसमें निश्चित ही वे संशोधन होने चाहिए जो सर्वसमाज के हित में आवश्यक हों। यह पोस्ट सुप्रीम कोर्ट के फैसले के संदर्भ में की गई थी, जहां नियमों पर रोक लगने से सामान्य श्रेणी के हितों की रक्षा होने का संकेत दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने नियम 3 (सी) में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को अस्पष्ट करार दिया, जिसके कारण दुरुपयोग की आशंका जताई गई। कोर्ट ने पूछा कि क्या हम एक प्रतिगामी समाज बन रहे हैं। पीठ ने कहा कि नए नियम बहुत व्यापक हैं और इनकी पुन: जांच आवश्यक है। केंद्र और यूजीसी को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया। इस फैसले से उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव रोकथाम के मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।
विधायक श्याम प्रकाश की पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सकारात्मक रूप से देखा गया। उन्होंने सर्वसमाज के हित में आवश्यक संशोधनों की बात कही। पोस्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तुरंत बाद की गई, जिसमें नियमों को स्थगित करने पर जोर दिया गया। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी।
यूजीसी के 2026 नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों को जातिगत भेदभाव की शिकायतों के लिए इक्विटी कमेटी और हेल्पलाइन अनिवार्य थी, जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी सदस्यों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य था। लेकिन सामान्य श्रेणी के प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं था। विरोध में कहा गया कि यह नियम एकतरफा हैं और सामान्य छात्रों को असुरक्षित छोड़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन बिंदुओं पर विचार करते हुए रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उच्च शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने के प्रयासों पर प्रभाव डालेगा। 2012 के नियम जारी रहने से पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी। मामले में आगे की सुनवाई में नियमों की वैधता पर अंतिम निर्णय होगा।
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