चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा न्याय में देरी न्याय को खत्म करना है, अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पर पोस्ट कर जताया समर्थन
अनिल अग्रवाल ने पोस्ट में कहा कि टेक्नोलॉजी और एआई की मदद से न्यायिक देरी को तुरंत आधा किया जा सकता है। पोस्ट में एलन मस्क के हालिया बयान का हवाला दिया
- न्याय में देरी न्याय न मिलना नहीं बल्कि न्याय को नष्ट करना बताकर सीजेआई ने दी तेज फैसलों की मिसाल
- ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए न्यायिक देरी खत्म करने पर जोर, अनिल अग्रवाल की पोस्ट में AI की भूमिका का जिक्र
अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के बयान का उल्लेख किया और न्याय में देरी के मुद्दे पर विचार व्यक्त किए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने फाली नरीमन मेमोरियल लेक्चर में कहा कि न्याय में देरी न्याय से इनकार नहीं है बल्कि न्याय को नष्ट करना है। उन्होंने कहा कि छोटे किसान की जमीन जब्त होने या छात्र को गलत तरीके से प्रवेश से वंचित करने जैसे मामलों में न्याय में देरी न्याय को नष्ट कर देती है। सीजेआई ने हाईकोर्ट्स से कहा कि कार्यकारी अतिक्रमण के खिलाफ समय पर हस्तक्षेप नागरिकों की एकमात्र वास्तविक सुरक्षा है। उन्होंने जोर दिया कि हाईकोर्ट संविधान के प्रो-एक्टिव संरक्षक के रूप में काम करें और शासन की व्यवस्थागत कमियों पर सतर्क रहें। न्याय तक पहुंच को केवल अधिकार नहीं बल्कि राज्य द्वारा गारंटीड सेवा बनाना चाहिए।
अनिल अग्रवाल ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि हम सब जानते हैं न्याय में देरी का मतलब न्याय नहीं मिलना है लेकिन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्याय में देरी का मतलब न्याय को खत्म करना है। पोस्ट में कहा गया कि इस बयान के लिए जितनी तारीफ की जाए कम है। यह बयान न्यायपालिका में तेज फैसलों की गंभीरता दर्शाता है।
पोस्ट में ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को भारत की तरक्की के लिए सबसे जरूरी बताया गया। ये दोनों प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकताएं हैं। कोर्ट्स में जल्दी फैसले आने से कमजोर तबके को सबसे ज्यादा फायदा होगा क्योंकि उनके लिए तारीख पर तारीख का मतलब कमाई और जिंदगी का नुकसान है। इससे देश की आर्थिक वृद्धि तेज होगी जिसका सबसे बड़ा लाभ कम आय वाले परिवारों को मिलेगा। बड़े पैमाने पर नौकरियां बनेंगी और सरकार को ज्यादा आमदनी होगी जो 140 करोड़ लोगों की शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण में निवेश होगी।
अनिल अग्रवाल ने पोस्ट में कहा कि टेक्नोलॉजी और एआई की मदद से न्यायिक देरी को तुरंत आधा किया जा सकता है। पोस्ट में एलन मस्क के हालिया बयान का हवाला दिया गया कि मैं गलत साबित होने वाला आशावादी बनना पसंद करूंगा बजाय इसके कि सही साबित होने वाला निराशावादी बनूं।
पोस्ट में कहा गया कि कुछ लोग कह सकते हैं कि जरूरत से ज्यादा उम्मीद लगाई जा रही है लेकिन भरोसा है कि भारत में तेज सुधार होंगे और देश समृद्ध बनेगा। मुख्य न्यायाधीश के बयान को न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने के संकेत के रूप में देखा गया।
सीजेआई सूर्यकांत का बयान फाली नरीमन मेमोरियल लेक्चर में दिया गया जिसमें हाईकोर्ट्स की भूमिका पर जोर था। उन्होंने कहा कि देरी से न्याय नष्ट हो जाता है और नागरिकों को समय पर सुरक्षा मिलनी चाहिए। अनिल अग्रवाल की पोस्ट इस बयान के संदर्भ में न्यायिक सुधारों और आर्थिक लाभों पर केंद्रित थी। अनिल अग्रवाल की फेसबुक पोस्ट मुख्य न्यायाधीश के बयान को आधार बनाकर न्याय में तेजी, कमजोर वर्गों के लाभ और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर विचार प्रस्तुत करती है। यह पोस्ट न्यायपालिका की गंभीरता और देश की प्रगति से जुड़े मुद्दों को उठाती है।
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