सुप्रीम कोर्ट ने UGC 2026 इक्विटी रेगुलेशंस पर लगाई अंतरिम रोक, रोहिणी घावरी ने फेसबुक पर इसे 'समानता की जीत' बताया

रोहिणी घावरी ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला सच्ची समानता की जीत है और ये एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए भी फायदेमंद है। पोस्ट में

Jan 29, 2026 - 23:16
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सुप्रीम कोर्ट ने UGC 2026 इक्विटी रेगुलेशंस पर लगाई अंतरिम रोक, रोहिणी घावरी ने फेसबुक पर इसे 'समानता की जीत' बताया
सुप्रीम कोर्ट ने UGC 2026 इक्विटी रेगुलेशंस पर लगाई अंतरिम रोक, रोहिणी घावरी ने फेसबुक पर इसे 'समानता की जीत' बताया

  • UGC नए नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग योग्य बताकर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे किया, एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों की सुरक्षा पर जोर
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला मजबूत और निष्पक्ष नियमों की मांग, 2012 के नियम जारी रहने से marginalized छात्रों की रक्षा बरकरार

रोहिणी घावरी ने फेसबुक पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सच्ची समानता की जीत बताया और एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए भी फायदेमंद माना। सुप्रीम कोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन द्वारा अधिसूचित प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 को अंतरिम रूप से रोक लगाई। कोर्ट ने इन नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग के लिए संवेदनशील बताया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमलया बागची की पीठ ने कहा कि नियमों में पूर्ण अस्पष्टता है और ये दुरुपयोग योग्य हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को नोटिस जारी किया तथा मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की। फिलहाल 2012 के UGC नियम प्रभावी रहेंगे। ये नए नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए थे जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों से संबंधित शिकायतों के लिए इक्विटी कमेटी और हेल्पलाइन का प्रावधान था।

रोहिणी घावरी ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि आज का सुप्रीम कोर्ट का फैसला सच्ची समानता की जीत है और ये एससी/एसटी/ओबीसी/पीडब्ल्यूडी छात्रों के लिए भी फायदेमंद है। पोस्ट में कहा गया कि कोर्ट ने UGC 2026 इक्विटी रेगुलेशंस को स्टे कर दिया क्योंकि ये अस्पष्ट और दुरुपयोग के लिए संवेदनशील थे। लेकिन फैसला ये नहीं कि एससी/एसटी/ओबीसी की सुरक्षा खत्म हो बल्कि मजबूत, स्पष्ट और दुरुपयोग-प्रूफ नियम बनें।

पोस्ट में आगे कहा गया कि एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों को जातिगत भेदभाव से असली सुरक्षा मिले, शिकायतें गंभीरता से सुनी जाएं बिना दुरुपयोग के डर के, 2012 के नियम जारी रहें जो पहले से marginalized छात्रों की रक्षा करते हैं, नए नियमों में फेयर प्रोसेस, एविडेंस-बेस्ड जांच और सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो। ये फैसला एससी/एसटी/ओबीसी छात्रों को भी लाभ देता है क्योंकि मजबूत, निष्पक्ष ढांचा ही लंबे समय तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा न कि अस्पष्ट नियम जो बैकलैश लाते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने नियम 3(सी) में जातिगत भेदभाव की परिभाषा को अस्पष्ट करार दिया जिससे दुरुपयोग की आशंका जताई गई। कोर्ट ने कहा कि नियम बहुत व्यापक हैं और समाज को विभाजित कर सकते हैं। पीठ ने पूछा कि क्या हम एक प्रतिगामी समाज बन रहे हैं। कोर्ट ने हाईकोर्ट्स से कहा कि वे संविधान के प्रो-एक्टिव संरक्षक के रूप में काम करें। नियमों को पुनः जांचने की आवश्यकता बताई गई और 2012 के नियमों को जारी रखने का आदेश दिया गया।

रोहिणी घावरी की पोस्ट में भेदभाव खत्म करने और एकता बढ़ाने पर जोर दिया गया। पोस्ट में लिखा कि सब छात्र एससी/एसटी/ओबीसी/जनरल सुरक्षित, सम्मानित और आगे बढ़ें। ये फैसला सच्ची समानता पर आधारित है जहां सभी वर्गों के लिए निष्पक्ष व्यवस्था हो। पोस्ट में UGC के नए नियमों की अस्पष्टता को समस्या बताया और मजबूत ढांचे की मांग की।

UGC के 2026 नियमों में उच्च शिक्षा संस्थानों को इक्विटी कमेटी गठित करने की अनिवार्यता थी जिसमें एससी, एसटी, ओबीसी सदस्यों का प्रतिनिधित्व था लेकिन जनरल कैटेगरी का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। विरोध में कहा गया कि ये नियम एकतरफा हैं और सामान्य श्रेणी के छात्रों को असुरक्षित छोड़ते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन बिंदुओं पर विचार कर रोक लगाई और नियमों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला उच्च शिक्षा में समानता और भेदभाव रोकथाम के प्रयासों को प्रभावित करेगा। 2012 के नियम जारी रहने से पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी। मामले में आगे की सुनवाई में नियमों की वैधता और संशोधन पर अंतिम निर्णय होगा।

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