Sambhal: भोजशाला फैसले पर मुस्लिम धर्मगुरुओं में नाराज़गी, बोले - सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की उम्मीद।
भोजशाला विवाद पर आए अदालत के फैसले को लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने गहरी निराशा जताई है। धर्मगुरुओं का कहना है कि
उवैस दानिश, सम्भल
भोजशाला विवाद पर आए अदालत के फैसले को लेकर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने गहरी निराशा जताई है। धर्मगुरुओं का कहना है कि फैसले से मुस्लिम समाज मायूस हुआ है, हालांकि उन्हें अब भी देश की सर्वोच्च अदालत पर पूरा भरोसा है और सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलने की उम्मीद है।
धर्मगुरु मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि अभी तक उन्हें मीडिया और टीवी चैनलों के जरिए ही फैसले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि जब पूरा जजमेंट सामने आएगा, तब उसे पढ़कर समझा जाएगा कि आखिर किन आधारों पर यह फैसला सुनाया गया। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर लंबे समय से नमाज़ अदा की जा रही थी, वहां केवल हिंदू पक्ष के हक में फैसला क्यों दिया गया, यह मुस्लिम समाज की समझ से परे है। मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि मुस्लिम संगठन अब सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे और उन्हें उम्मीद है कि सर्वोच्च न्यायालय निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले को सुनकर न्याय करेगा। उन्होंने कहा कि मुसलमानों का कल भी अदालत पर भरोसा था और आज भी है। वहीं हिंदू पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की बात पर उन्होंने कहा कि देश के हर नागरिक को न्यायालय जाने का अधिकार है। इधर धर्मगुरु मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने भी फैसले को “मायूसकुन” बताते हुए कहा कि भारतीय मुसलमान न्यायपालिका पर विश्वास रखता है, लेकिन इस फैसले से समाज में निराशा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इससे न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि अभी भी मुस्लिम समाज को सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और वहां से निष्पक्ष फैसले की उम्मीद बनी हुई है। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने मुस्लिम समाज से अपील की कि वह कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाए और जल्द से जल्द सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाए। उन्होंने कहा कि अदालत सबकी है और हर नागरिक को वहां जाने की आज़ादी है।
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