Sitapur : नैमिषारण्य में वसुंधरा परिवार की कार्यशाला में हुआ राष्ट्रीय ओज का कवि सम्मेलन
सम्मेलन की अध्यक्षता बिसवां के प्रसिद्ध कवि कमलेश मौर्य मृदु ने की। उन्होंने मां सरस्वती की स्तुति से शुरुआत करते हुए अपनी ओजस्वी रचना सुनाई। उन्होंने दे
Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
सीतापुर जिले के पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य में अंतरराष्ट्रीय वसुंधरा परिवार के बैनर तले दो दिवसीय अखिल भारतीय कार्यशाला का आयोजन हुआ। इस कार्यशाला के दौरान मुमुक्षु आश्रम में एक यादगार कवि सम्मेलन रखा गया, जिसमें देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक भावनाओं से भरी रचनाओं ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सम्मेलन की अध्यक्षता बिसवां के प्रसिद्ध कवि कमलेश मौर्य मृदु ने की। उन्होंने मां सरस्वती की स्तुति से शुरुआत करते हुए अपनी ओजस्वी रचना सुनाई। उन्होंने देश की एकता और अखंडता की बात करते हुए कहा कि हर दिल में राष्ट्रप्रेम जगाना चाहिए। आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ कड़ी आवाज उठाते हुए उन्होंने काव्य पंक्तियों में दुश्मनों को चेतावनी दी कि भारत का गौरवशाली सपना पूरा करने वालों के सामने कोई नहीं टिक सकता। उनकी रचनाओं में राष्ट्र की अस्मिता को मजबूत करने का संदेश जोरदार तरीके से उभरा।
बाराबंकी से आए कवि संदीप अनुरागी ने नैमिषारण्य की पवित्रता और इसके ऐतिहासिक महत्व को अपनी कविता में उकेरा। उन्होंने अट्ठासी हजार ऋषियों की तपोभूमि, ललिता देवी के मनोहर द्वार और शौनक, सूत व दधीचि जैसे महान ऋषियों की याद दिलाते हुए इस धरा को कोटि-कोटि प्रणाम किया। उनकी रचनाएं सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए और इस पावन स्थान की महिमा को महसूस किया।
आजमगढ़ से आई तेज ओज वाली कवयित्री डॉ. रेनू सिंह ने गांधीवादी विचारों को आधार बनाते हुए अपनी कविता पेश की। उन्होंने कहा कि हम सत्य और अहिंसा की लौ पर जलने वाले परवाने हैं। शांति के दूत बनकर हम भारत मां के दीवाने हैं और महान शक्ति के साथ जय हिंद का उद्घोष करते हैं। उनकी रचनाओं में शांति और अहिंसा का संदेश गूंजता रहा।
रालामऊ, सीतापुर के वरिष्ठ ओज व व्यंग्य कवि केदारनाथ शुक्ल ने कवियों की ताकत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब कोई क्रूर शासक सत्ता में होता है तो वह शिवाजी जैसे वीर से ज्यादा कवि भूषण से डरता है। कवि ही सोए हुए समाज को जगाकर विद्रोह की आग सुलगा सकते हैं। उनकी पंक्तियों में कविता की शक्ति और राष्ट्र जागरण का जोरदार चित्रण था।
इसके अलावा बिसवां-सीतापुर के महाराज नगर से नई कवयित्री दिव्या वर्मा ने अपनी छात्रा होने के बावजूद आत्मविश्वास से काव्य पाठ किया। प्रयागराज से रामचंद्र कुशवाहा और रामानुज गुप्ता ने भी अपनी रचनाओं से सम्मेलन को नई ऊंचाई दी। सभी कवियों की प्रस्तुतियां देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव से भरी थीं।
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