UP News: नूरी मस्जिद को तोड़े जाने पर छिड़ा संग्राम, मुस्लिम पक्ष बोला सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का नहीं हुआ पालन।
फतेहपुर में बुलडोजर के जरिए 180 साल पुरानी नूरी मस्जिद को तोड़े जाने के मामले में मुस्लिम समुदाय के लोग काफी नाराज होते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने....
अशरफ अंसारी की रिपोर्ट-
फतेहपुर में एक मस्जिद को तोड़े जाने का मामला काफी गरमाता हुआ दिखाई देने लगा है। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का पालन नहीं किया।
- जिला प्रशासन के आदेश पर तोड़ी गई मस्जिद
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में बुलडोजर के जरिए 180 साल पुरानी नूरी मस्जिद को तोड़े जाने के मामले में मुस्लिम समुदाय के लोग काफी नाराज होते हुए दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का स्थानीय प्रशासन ने किसी भी तरीके से पालन नहीं किया है। उनका कहना है कि इस मामले में 13 दिसंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फैसला आना था लेकिन प्रशासन ने इस पर आने वाले फेसलों को सुनने से पहले ही मस्जिद को पूरी तरीके से गिरा दिया। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण को लेकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को पहले ही मस्जिद को लेकर नोटिस दिया जा चुका है।
- मस्जिद कमेटी ने किया दावा
जिला प्रशासन ने मस्जिद को लेकर अवैध माना था और उसके बाद सड़क चौड़ीकरण को लेकर मस्जिद को गिराए जाने के आदेश भी जारी किए गए थे। इस पर मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि नूरी मस्जिद आज से 180 साल पुरानी है जब उसे इलाके में जंगल हुआ करता था। इस मस्जिद को 1839 में बनवाया गया था। मस्जिद कमेटी का कहना है कि जानबूझकर मस्जिद को गिराने का काम किया गया है। कमेटी के लोगों का कहना है कि 13 दिसंबर को इस पर फैसला आना था लेकिन सरकार ने मस्जिद पर पूरी तरीके से एक्शन लिया और गलत तरीके से उसको गिरा दिया।
- जिला प्रशासन ने कही बात
मुस्लिम पक्ष के तरफ तरफ से जिला प्रशासन पर आरोप लगाया जा रहा है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी इमारत को गिरने से 15 दिन पहले नोटिस को जारी किया जाता है लेकिन किसी भी तरीके का नोटिस जारी नहीं किया है। वहीं जिला प्रशासन ने कहा है की मस्जिद कमेटी को 45 दिन पहले ही एक के नोटिस जारी किया था और उसमें बताया था कि यह मस्जिद तरीके से बनी है और यहां से हाईवे निकल रहा है। इसलिए जो जिला प्रशासन की तरफ से कार्रवाई की गई है उसको गलत नहीं ठहराया जा सकता।
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