Bihar Elections 2025: तेज प्रताप ने तेजस्वी पर साधा निशाना, कहा, 'तेजस्वी' 'फेलस्वी हो गए', मोदी-नीतीश की जीत पर की जमकर तारीफ।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। 14 नवंबर 2025 को आए परिणामों के मुताबिक
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। 14 नवंबर 2025 को आए परिणामों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 243 सीटों में से 202 पर कब्जा जमाकर ऐतिहासिक जीत हासिल की। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी की लोकप्रियता को एक बार फिर साबित करती है। भाजपा को 89 सीटें मिलीं, जो राज्य में उसकी सबसे बड़ी पार्टी बनने का संकेत देती हैं। जनता दल यूनाइटेड को 85, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें हासिल हुईं। विपक्षी महागठबंधन को सिर्फ 35 सीटें मिलीं, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल को 25, कांग्रेस को 6, वाम दलों को 3 और अन्य को 1 सीट का हिस्सा बना। यह परिणाम 2020 के चुनाव से बिल्कुल अलग हैं, जब महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं। चुनाव आयोग के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मतदान 67.13 प्रतिशत रहा, जो 1951 के बाद का रिकॉर्ड है। पहले चरण में 65.08 और दूसरे चरण में 68.76 प्रतिशत वोट पड़े। 7.4 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया।
चुनाव दो चरणों में 6 और 11 नवंबर को हुए। 243 सीटों में 38 अनुसूचित जाति और 2 अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। भाजपा ने 101, जेडीयू ने 101, एलजेपी आरवी ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे। महागठबंधन में आरजेडी ने 143, कांग्रेस ने 61 और वाम दलों ने 29 सीटों पर लड़े। प्राशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक भी नहीं जीत सकी। वोट शेयर में आरजेडी 23 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रही, लेकिन सीटें कम मिलीं। एनडीए का कुल वोट शेयर 46.52 प्रतिशत रहा, जबकि महागठबंधन का 37.64 प्रतिशत। भाजपा का 20.08, जेडीयू का 19.26 और एलजेपी आरवी का 4.97 प्रतिशत रहा। कांग्रेस का 8.71 और वाम का 4.18 प्रतिशत रहा।
मतगणना सुबह 8 बजे शुरू हुई और शाम तक साफ हो गई। शुरुआती रुझानों में एनडीए 185 सीटों पर आगे था। भाजपा मुख्यालय में जश्न का माहौल छाया रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि यह विकास और सुशासन की जीत है। उन्होंने महिलाओं और युवाओं को नया एमवाई फॉर्मूला बताया, जो विपक्ष के सांप्रदायिक एजेंडे को नकारा। एक्स पर पोस्ट करते हुए मोदी ने लिखा कि बिहार ने जंगलराज को खारिज कर दिया। नीतीश कुमार ने कहा कि राज्यवासियों ने उनकी सरकार पर भरोसा जताया। उन्होंने एनडीए सहयोगियों को धन्यवाद दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे डबल इंजन सरकार की जीत बताया। उन्होंने कहा कि 1.8 लाख करोड़ का निवेश होगा। चिराग पासवान ने नीतीश और मोदी की जोड़ी की तारीफ की। जेपी नड्डा ने कहा कि यह जनता का विश्वास है।
विपक्ष की हार बुरी रही। तेजस्वी यादव ने रघोपुर से जीत हासिल की, लेकिन मार्जिन 14,532 वोटों का रहा। उन्होंने कहा कि वादे पूरे हों तो अच्छा। लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव महुआ से हार गए। वे अपनी जनशक्ति जनता दल से लड़े थे और तीसरे स्थान पर रहे। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के संजय कुमार सिंह ने 44,997 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। तेज प्रताप को 52,000 से ज्यादा वोटों से पीछे छोड़ दिया गया। हार के बाद तेज प्रताप ने सोशल मीडिया और मीडिया को दिए बयानों में तेजस्वी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज तेजस्वी फेलस्वी हो गए। आरजेडी को गद्दारों ने खोखला कर दिया। उन्होंने आंतरिक जयचंदों को जिम्मेदार ठहराया, जो कुर्सी और राजनीति बचाने के लिए घर को आग लगा देते हैं। तेज प्रताप ने कहा कि इतिहास ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेगा। लेकिन हार को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि बिहार ने सुशासन वाली सरकार चुनी है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की जादुई नेतृत्व क्षमता और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भूमिका की जमकर तारीफ की। गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी बधाई दी। तेज प्रताप ने कहा कि जनता का फैसला सिर माथे है और वे आगे रचनात्मक भूमिका निभाएंगे। उनकी यह प्रतिक्रिया परिवार के बीच दरार को और उजागर करती है। तेज प्रताप को 2023 में ही आरजेडी से निकाल दिया गया था, तब से वे अपनी पार्टी चला रहे हैं।
यह जीत एनडीए की रणनीति का नतीजा है। महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान हुआ, जिससे जेडीयू को सबसे ज्यादा फायदा मिला। कल्याण योजनाओं जैसे उज्ज्वला, पीएम आवास और महिलाओं को 10,000 रुपये ट्रांसफर ने वोटिंग में असर डाला। युवाओं पर फोकस से बेरोजगारी का मुद्दा कमजोर पड़ा। विपक्ष के वोट चोरी के आरोप और वोटर लिस्ट विवाद काम नहीं आए। एनडीए ने संकल्प पत्र में एक करोड़ नौकरियां, लाखपति दीदी, मुफ्त शिक्षा और बुनियादी ढांचे के वादे किए। विपक्ष ने नौकरी, पुरानी पेंशन और मुफ्त बिजली का वादा किया, लेकिन वोट नहीं मिले।
क्षेत्रीय स्तर पर एनडीए ने हर कोने में जीत हासिल की। शाहाबाद और सीमांचल जैसे महागठबंधन के गढ़ों में भी एनडीए आगे रहा। भाजपा ने एससी सीटों पर अच्छा प्रदर्शन किया। जेडीयू ने ईबीसी वोटों को मजबूत किया। एलजेपी ने दलित वोटों को एकजुट किया। 2020 में एलजेपी ने जेडीयू को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन इस बार सहयोगी बनी। आरजेडी का मुस्लिम-यादव फॉर्मूला टूटा। कांग्रेस का प्रदर्शन 2020 के 19 से घटकर 6 रह गया। वाम दलों का 16 से घटकर 3 रह गया।
प्रमुख उम्मीदवारों की बात करें तो तेजस्वी यादव ने रघोपुर से भाजपा के सतीश कुमार को हराया। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तारापुर से आरजेडी के अरुण कुमार साव को 45,820 वोटों से जीता। विजय कुमार सिन्हा ने लखीसराय से जीत दर्ज की। जेडीयू के अनंत सिंह ने मोकामा से वीणा देवी को हराया। भाजपा की मंगला पांडेय ने सीवान से आरजेडी को 9,000 वोटों से हराया। मैथिली ठाकुर ने अलीनगर से पहली बार जीत हासिल की। केशरी लाल यादव छपरा से हार गए। जेडीयू के हरि नारायण सिंह ने हरनौत से जीत ली।
वोट शेयर में आरजेडी 22.76 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रही, लेकिन सीटें कम मिलीं। भाजपा 20.90 और जेडीयू 18.92 प्रतिशत। यह दिखाता है कि वोट एकजुटता एनडीए में बेहतर रही। एनडीए का स्ट्राइक रेट 89 प्रतिशत रहा। भाजपा का 88, जेडीयू का 84 प्रतिशत। आरजेडी का 17 और कांग्रेस का 10 प्रतिशत। जन सुराज का 9.6 प्रतिशत रहा, लेकिन सीट शून्य।
यह परिणाम बिहार की राजनीति बदल देंगे। नीतीश कुमार दसवीं बार शपथ लेंगे। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर दबदबा बढ़ाएगी। गठबंधन में सीट बंटवारे पर चर्चा होगी। विपक्ष को पुनर्गठन करना होगा। राहुल गांधी ने कहा कि रणनीति बदलनी होगी। डी राजा ने आत्ममंथन की बात कही। एनडीए अब वादों पर अमल करेगा। एक करोड़ नौकरियां, सात एक्सप्रेसवे, बाढ़ मुक्ति और कृषि निवेश के वादे पूरे करने होंगे। केंद्र से फंडिंग बढ़ेगी।
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