दस साल की मेहनत का फल: विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग 17 जनवरी को केसरिया के विराट रामायण मंदिर में होगा स्थापित, प्राण प्रतिष्ठा बाद में। 

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर के लिए विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बिहार पहुंच चुका

Jan 5, 2026 - 15:46
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दस साल की मेहनत का फल: विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग 17 जनवरी को केसरिया के विराट रामायण मंदिर में होगा स्थापित, प्राण प्रतिष्ठा बाद में। 
दस साल की मेहनत का फल: विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग 17 जनवरी को केसरिया के विराट रामायण मंदिर में होगा स्थापित, प्राण प्रतिष्ठा बाद में। 

बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के केसरिया प्रखंड में निर्माणाधीन विराट रामायण मंदिर के लिए विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग बिहार पहुंच चुका है। यह शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में एक ही ब्लैक ग्रेनाइट मोनोलिथ पत्थर से निर्मित किया गया है। इसका निर्माण कार्य लगभग दस वर्षों तक चला। शिवलिंग की लंबाई 33 फीट है और वजन 210 मीट्रिक टन है। इस पर 1008 छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं, जिसे सहस्रलिंगम भी कहा जा रहा है।

शिवलिंग को विशेष 96 पहियों वाले ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से बिहार लाया गया। यह 21 नवंबर 2025 को महाबलीपुरम से रवाना हुआ और आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश होते हुए लगभग 2500 किलोमीटर की यात्रा तय कर गोपालगंज पहुंचा। गोपालगंज में बल्थरी चेक पोस्ट के पास इसका भव्य स्वागत हुआ, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोग शिवलिंग पर तिलक लगा रहे थे और आरती उतार रहे थे। इसके बाद शिवलिंग खजुरिया और हुसैनी होते हुए केसरिया के लिए रवाना हुआ। महावीर मंदिर न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल ने बताया कि 17 जनवरी 2026 को विराट रामायण मंदिर परिसर में शिवलिंग की पीठ पूजा, हवन और विधि-विधान के साथ स्थापना की जाएगी। स्थापना से पहले पूजा-अर्चना और स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा अगले चरण में की जाएगी। इसके लिए शुभ मुहूर्त देखा जाएगा और विशेष कार्यक्रम का आयोजन होगा।

विराट रामायण मंदिर का निर्माण महावीर मंदिर न्यास समिति द्वारा कराया जा रहा है। मंदिर परिसर कैथवलिया गांव में स्थित है। मंदिर का आकार 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा, जिसमें 18 शिखर और 22 छोटे मंदिर शामिल होंगे। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। वर्तमान में मंदिर का प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी स्थल, शिवलिंग मंच और गर्भगृह की पाइलिंग का कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और पूरा होने पर यह विश्व का सबसे बड़ा रामायण मंदिर होगा। शिवलिंग की निर्माण लागत लगभग तीन करोड़ रुपये बताई गई है। इसे बनाने में कलाकारों ने पारंपरिक और आधुनिक दोनों तकनीकों का उपयोग किया। शिवलिंग में उकेरे गए 1008 छोटे शिवलिंग इसे विशेष धार्मिक महत्व प्रदान करते हैं। यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों में श्रद्धालु इसका दर्शन और पूजा कर रहे थे। बिहार में प्रवेश के बाद आरा, छपरा, मसरख, मोहम्मदपुर और केसरिया जैसे स्थानों पर स्वागत की व्यवस्था की गई।

शिवलिंग की स्थापना के लिए मंदिर परिसर में विशेष तैयारी की जा रही है। स्थापना के दिन पीठ पूजा और हवन के साथ विधिवत अनुष्ठान होगा। जलाभिषेक के लिए विभिन्न स्थानों से गंगाजल लाया जाएगा। स्थापना के बाद प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम अलग से आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश भर के संत और हजारों श्रद्धालु शामिल हो सकते हैं। यह शिवलिंग मंदिर का मुख्य आकर्षण होगा। मंदिर की दीवारों पर रामायण के प्रसंग उकेरे जाएंगे। पूरा मंदिर परिसर राम-जानकी मार्ग पर स्थित है, जो अयोध्या को जनकपुर से जोड़ता है। केसरिया का बौद्ध स्तूप भी इसी मार्ग पर है। मंदिर पूरा होने पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बिहार की पहचान विश्व स्तर पर मजबूत होगी।

शिवलिंग का निर्माण 2015-16 से शुरू हुआ था और दस वर्षों की मेहनत के बाद यह तैयार हुआ। एक ही पत्थर से इतने बड़े शिवलिंग का निर्माण इंजीनियरिंग की दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण था। परिवहन के दौरान विशेष सावधानियां बरती गईं, क्योंकि वजन अधिक होने से सड़क और पुलों पर ध्यान देना जरूरी था। मंदिर न्यास समिति के अधिकारियों के अनुसार, शिवलिंग की स्थापना के साथ मंदिर निर्माण का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा होगा। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर को चरणबद्ध तरीके से श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। यह परियोजना बिहार में धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करेगी। शिवलिंग की यात्रा और स्थापना की खबर से श्रद्धालुओं में उत्साह है। गोपालगंज में पहुंचने पर बैंड-बाजे और आरती के साथ स्वागत हुआ। केसरिया पहुंचने पर भी भव्य कार्यक्रम की योजना है। 17 जनवरी को स्थापना के दिन विशेष पूजा और हवन होगा।

विराट रामायण मंदिर का शिलान्यास 20 जून 2023 को हुआ था। तब से निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। शिवलिंग की स्थापना मंदिर के गर्भगृह में की जाएगी। यह सहस्रलिंगम आठवीं शताब्दी के बाद भारत में पहली बार बनाया गया है। शिवलिंग की विशेषता यह है कि यह एक ही पत्थर से बना है और इसमें 1008 लिंग उकेरे गए हैं। इसका व्यास भी 33 फीट के आसपास है। परिवहन के लिए विशेष अनुमति ली गई और रात में यात्रा की गई ताकि यातायात प्रभावित न हो। मंदिर पूरा होने पर यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक बनेगा। मुख्य गर्भगृह में राम-सीता की मूर्तियां होंगी, लेकिन शिवलिंग इसका प्रमुख हिस्सा होगा। स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा से मंदिर की भव्यता बढ़ जाएगी।

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