दिल्ली में मानव रेबीज को नोटिफायबल डिजीज घोषित किया गया, सभी संदिग्ध और पुष्ट मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग से रेबीज पर प्रभावी नियंत्रण। 

दिल्ली सरकार ने मानव रेबीज को महामारी रोग अधिनियम के तहत नोटिफायबल डिजीज घोषित करने का फैसला लिया है। इस कदम से रेबीज

Jan 5, 2026 - 15:53
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दिल्ली में मानव रेबीज को नोटिफायबल डिजीज घोषित किया गया, सभी संदिग्ध और पुष्ट मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग से रेबीज पर प्रभावी नियंत्रण। 
दिल्ली में मानव रेबीज को नोटिफायबल डिजीज घोषित किया गया, सभी संदिग्ध और पुष्ट मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग से रेबीज पर प्रभावी नियंत्रण। 

दिल्ली सरकार ने मानव रेबीज को महामारी रोग अधिनियम के तहत नोटिफायबल डिजीज घोषित करने का फैसला लिया है। इस कदम से रेबीज के मामलों की निगरानी मजबूत होगी, समय पर रिपोर्टिंग सुनिश्चित होगी और कुत्तों से होने वाली रेबीज से मानव मौतों को शून्य करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। अधिसूचना जारी होने के बाद दिल्ली के सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों तथा व्यक्तिगत चिकित्सकों के लिए रेबीज के संदिग्ध, संभावित और पुष्ट मामलों की तुरंत रिपोर्ट संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को देना अनिवार्य हो जाएगा। यह अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद प्रभावी हो जाएगी और आगे के आदेश तक लागू रहेगी।

रेबीज एक पूरी तरह रोकथाम योग्य बीमारी है, लेकिन लक्षण दिखने के बाद यह लगभग सौ प्रतिशत घातक हो जाती है। समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है। इस फैसले से रोग की ट्रेंड्स पर नजर रखना आसान होगा, मानव और पशु स्वास्थ्य प्रणालियों के बीच समन्वय बेहतर होगा तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में लक्षित रोकथाम उपाय लागू किए जा सकेंगे। दिल्ली में एंटी-रेबीज वैक्सीन सभी 11 जिलों के 59 स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध है, जबकि एंटी-रेबीज सीरम 33 नामित स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों में प्रदान किया जा रहा है। दिल्ली सरकार स्थानीय निकायों, पशुपालन विभाग तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर स्टेट एक्शन प्लान फॉर रेबीज एलिमिनेशन को अंतिम रूप दे रही है। मानव रेबीज को नोटिफायबल डिजीज घोषित करना इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनिवार्य रिपोर्टिंग से स्वास्थ्य अधिकारियों को वास्तविक समय में मामलों की जानकारी मिलेगी, जिससे तेज चिकित्सकीय प्रतिक्रिया और उच्च जोखिम क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप संभव हो सकेगा।

इस फैसले से रेबीज के प्रसार को रोकने में मदद मिलेगी। रेबीज मुख्य रूप से कुत्तों के काटने से फैलता है और दिल्ली में कुत्तों के काटने के मामले काफी संख्या में दर्ज होते हैं। वर्ष 2023 में 51,773 कुत्ते काटने के मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2025 में अगस्त तक यह संख्या 44,995 पहुंच चुकी थी। इन आंकड़ों से जोखिम की गंभीरता का पता चलता है और मजबूत निगरानी की आवश्यकता स्पष्ट होती है। अधिसूचना के बाद सभी स्वास्थ्य संस्थानों को रिपोर्टिंग के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। यह कदम रेबीज से होने वाली मौतों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है। दिल्ली सरकार मानव तथा पशुओं दोनों के लिए रेबीज वैक्सीनेशन सुविधाओं को और मजबूत कर रही है। अनिवार्य रिपोर्टिंग से रोग के पैटर्न का विश्लेषण बेहतर होगा और रोकथाम के उपाय अधिक प्रभावी हो सकेंगे।

रेबीज के मामलों में समय पर रिपोर्टिंग जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है। इस फैसले से स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्रवाई तेज होगी। दिल्ली में उपलब्ध वैक्सीन और सीरम की सुविधाएं इलाज को सुलभ बनाने में सहायक हैं। सभी जिलों में फैली ये सुविधाएं जोखिम वाले मामलों में त्वरित हस्तक्षेप सुनिश्चित करती हैं। यह कदम कुत्तों से होने वाली रेबीज मौतों को समाप्त करने की राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में भी योगदान देगा। स्थानीय निकायों और पशुपालन विभाग के साथ समन्वय से पशुओं में वैक्सीनेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मानव रेबीज को नोटिफायबल बनाने से एक स्वास्थ्य दृष्टिकोण को मजबूती मिलेगी, जिसमें मानव और पशु स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ा जाता है।

दिल्ली में रेबीज के मामलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने और रोकथाम के लिए यह अनिवार्य रिपोर्टिंग आवश्यक है। स्वास्थ्य संस्थानों को संदिग्ध मामलों की भी रिपोर्ट करनी होगी, जिससे शुरुआती चरण में ही हस्तक्षेप संभव हो। अधिसूचना जारी होने पर सभी संबंधित विभागों को समन्वय के लिए दिशानिर्देश प्रदान किए जाएंगे। इस फैसले से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष उपाय लागू किए जा सकेंगे। रेबीज की रोकथाम में वैक्सीनेशन मुख्य भूमिका निभाता है और दिल्ली में इसकी उपलब्धता को बढ़ाया जा रहा है। अनिवार्य रिपोर्टिंग से प्राप्त डेटा से नीतियां अधिक डेटा आधारित होंगी। दिल्ली सरकार का यह कदम रेबीज नियंत्रण में मील का पत्थर साबित होगा। सभी स्वास्थ्य प्रदाताओं की जिम्मेदारी बढ़ेगी और मामलों की त्वरित रिपोर्टिंग से प्रसार रोका जा सकेगा। स्टेट एक्शन प्लान के अंतिम रूप लेने से समग्र रणनीति मजबूत होगी।

रेबीज से बचाव संभव है और इस फैसले से समय पर इलाज की संभावना बढ़ेगी। दिल्ली में मौजूदा सुविधाओं का विस्तार और नई अधिसूचना से रेबीज पर प्रभावी अंकुश लग सकेगा। अनिवार्य रिपोर्टिंग स्वास्थ्य प्रणाली की जवाबदेही बढ़ाएगी। यह अधिसूचना महामारी रोग अधिनियम के तहत जारी की जाएगी और सभी स्वास्थ्य संस्थानों पर लागू होगी। रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा ताकि अनुपालन आसान हो। रेबीज के मामलों में कमी लाने के लिए यह कदम आवश्यक है। दिल्ली में कुत्ते काटने के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह फैसला समयोचित है। वैक्सीन और सीरम की उपलब्धता से इलाज सुलभ है, लेकिन रिपोर्टिंग की कमी से समस्या बनी हुई थी। अब अनिवार्य रिपोर्टिंग से यह कमी दूर होगी।

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