10 साल की मिन्नतों के बाद जन्मा था बेटा, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 6 महीने के मासूम की मौत, मां का रो-रोकर बुरा हाल।
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके के नई बस्ती और मराठी मोहल्ला में दूषित पेयजल से बड़ा संकट पैदा हो गया है। इस घटना में एक 6 महीने के मासूम बच्चे की
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके के नई बस्ती और मराठी मोहल्ला में दूषित पेयजल से बड़ा संकट पैदा हो गया है। इस घटना में एक 6 महीने के मासूम बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मां साधना साहू सदमे में हैं और रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार कह रही हैं कि 10 साल की मिन्नतों और दुआओं के बाद उन्हें बेटा हुआ था, लेकिन दूषित पानी ने उसे हमेशा के लिए छीन लिया। मां ने गाढ़ा दूध पचाने के लिए नल का पानी मिलाया था, जिससे बच्चे को उल्टी और दस्त की शिकायत हुई और हालत बिगड़ने पर 29 दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई। बच्चे का नाम अव्यान था और पिता सुनील साहू हैं। यह मौत दूषित पानी से जुड़ी त्रासदी की सबसे दर्दनाक घटना है। इलाके में सीवेज का गंदा पानी पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण मिल गया था, जिससे बड़े पैमाने पर उल्टी-दस्त की बीमारी फैल गई। जांच में पता चला कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के पास बने शौचालय की ड्रेनेज पाइप लीक होकर मुख्य नर्मदा जल लाइन में मिल रही थी। इस संकट ने पूरे इलाके को प्रभावित किया है।
पिछले एक सप्ताह में 1100 से अधिक लोग बीमार पड़ चुके हैं, जिनमें उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण दिखे। इनमें से 150 से अधिक मरीज विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 2700 से अधिक घरों का सर्वे किया, जिसमें 12,000 से ज्यादा लोगों की जांच हुई। कई मरीजों को हल्के लक्षणों के साथ घर पर दवा दी गई, जबकि गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती किया गया। मौतों का आंकड़ा अलग-अलग स्रोतों में 7 से 10 तक बताया जा रहा है, जिसमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। मृतकों में यह मासूम बच्चा भी है। इलाके में 24 दिसंबर से शिकायतें शुरू हुईं, लेकिन शुरुआत में ध्यान नहीं दिया गया। बाद में मामला गंभीर होने पर नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हुईं। पानी के सैंपल लिए गए, और लीकेज की जगह की मरम्मत का काम शुरू किया गया।
इलाके में टैंकरों से स्वच्छ पानी की सप्लाई की जा रही है, और लोगों को उबाला हुआ पानी पीने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं, जहां मरीजों की जांच और दवा वितरण हो रहा है। इस घटना ने इलाके में मातम पसरा हुआ है। कई परिवारों में मौतें हुई हैं, और बीमार लोग अस्पतालों में जीवन-मृत्यु की जंग लड़ रहे हैं। दूषित पानी का असर मुख्य रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ा है। जांच में पाइपलाइन में लीकेज और सीवेज मिश्रण की पुष्टि हुई है। यह लीकेज पुलिस चौकी के शौचालय के नीचे मुख्य लाइन में था। संकट की शुरुआत दिसंबर के अंतिम सप्ताह में हुई, जब लोग बड़े पैमाने पर बीमार पड़ने लगे।
अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्थिति गंभीर हो गई। मासूम बच्चे की मौत इस त्रासदी की सबसे दुखद घटना है। मां ने बाहर से लाया दूध गाढ़ा होने पर नल का पानी मिलाया, जिससे बच्चे की तबीयत बिगड़ी। घर पर दवा दी गई, लेकिन हालत नहीं संभली और मौत हो गई। परिवार का कहना है कि दूषित पानी ही मौत का कारण बना। इलाके में अन्य मौतें भी उल्टी-दस्त से हुईं। स्वास्थ्य विभाग ने सर्वे में हजारों लोगों की जांच की। गंभीर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया। नगर निगम ने लाइन की सफाई और मरम्मत का काम शुरू किया। टैंकरों से पानी की व्यवस्था की गई। यह घटना इंदौर के भागीरथपुरा इलाके की है, जहां नर्मदा जल की मुख्य लाइन प्रभावित हुई। लीकेज की वजह से गंदा पानी मिल गया। अब मरम्मत कार्य चल रहा है। लोगों को सतर्क रहने और उबाला पानी पीने को कहा गया है।
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