Hardoi: माता कौशल्या, राम के विकृत चरित्र चित्रण में जेल गया वाचाल दबाए बैठा करोड़ों की सरकारी भूमि। 

1975 में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा कर वाईएल वर्मा ने किया जनता इंटर कॉलेज तामीर

Apr 3, 2026 - 18:42
Apr 3, 2026 - 18:47
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Hardoi: माता कौशल्या, राम के विकृत चरित्र चित्रण में जेल गया वाचाल दबाए बैठा करोड़ों की सरकारी भूमि। 

रिपोर्ट- विकास मिश्र

सवायजपुर/ हरदोई। माता कौशल्या और मर्यादा पुरुषोत्तम के विकृत चरित्र चित्रण में जेल जा चुका वाईएल वर्मा करोड़ों कीमत की सरकारी भूमि भी दबाए बैठा है। भोपतपुर नगला में सरकारी जमीन पर दशकों से अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है, वर्ष 1975 में वाईएल वर्मा ने सरकारी भूमि पर कब्जा करके जनता इंटर कॉलेज की स्थापना की थी। अब भूलेख विभाग के रिकॉर्ड कब्जे की चुगली कर रहे हैं।

  • भूलेख रिकॉर्ड कर रहे कब्जे की चुगली

भूलेख पोर्टल के दस्तावेजों के अनुसार, इस भूमि में कुल 15 खसरे शामिल हैं और कुल क्षेत्रफल 7.7957 हेक्टेयर है। यह भूमि श्रेणी 1-क (संक्रमणीय अधिकार वाली) के रूप में दर्ज है। सभी खसरों पर 1999 में तहसीलदार कटियारी न्यायालय के विभिन्न आदेशों के आधार पर नामांतरण किया गया था।

  • पुराने आकार पत्र-45 दर्शाते 1975 के आसपास सरकारी जमीन की स्थिति 

प्रमुख आदेश 23 फरवरी 1999, 21 जून 1999 और 26 अक्टूबर 1999 के हैं, जिनमें श्रीमती कमलेश पत्नी रामेंद्र सिंह निगोढ़ी, श्रीमती रामलैला पत्नी रामेंद्र सिंह और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम पर हस्तांतरण का उल्लेख है। पुराने आकार पत्र-45 (हैंडराइटन रजिस्टर) में भी इन खसरों (646, 650, 653, 655, 661, 666, 686, 690, 920 आदि) का जिक्र है, जो 1975 के आसपास सरकारी जमीन की स्थिति दर्शाता है।

  • सनातन विरोध में हटाया गया था दुर्गा प्रसाद इंटर कॉलेज के अध्यापक पद से 

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, वाईएल वर्मा 1975 में दुर्गा प्रसाद इंटर कॉलेज का अध्यापक था और सनातन विरोध के कारण इसे कॉलेज से निकाल दिया गया था। इसके बाद इसने भोपतपुर नगला के सूरजपाल सिंह पुत्र यशवंत सिंह के सहयोग से सरकारी जमीन पर कब्जा कर जनता इंटर कॉलेज शुरू किया। सूरजपाल को गुमराह कर उन्हें प्रबंधक बताता रहा। पर, लिखापढ़ी में पहले रिश्तेदार रामसेवक और बाद में साले खुशीराम (रामनगरिया, मजरा दघेला) को प्रबंधक बना दिया।

  • परिवार का दबदबा, विरोधियों की नहीं लगने देता लात

क्षेत्र में वाईएल वर्मा के परिवार का काफी दबदबा बताया जाता है। पंचायत चुनाव के दौरान भी विवाद हुआ था, जब वाईलाल वर्मा ने छोटे भाई की पत्नी को प्रधान पद का उम्मीदवार बनाया। खुशीराम लोधी की पत्नी भी उम्मीदवार थीं। मतदान के समय सेक्टर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में विवाद हुआ और विरोध करने वालों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।

  • भूमि मशरूक से पूर्व नवीन परती में थी दर्ज, आपत्ति पर जांच: तहसीलदार 

बहरहाल, यह मामला सरकारी जमीन पर कब्जा, न्यायालयीय आदेशों के आधार पर नामांतरण और स्थानीय राजनीतिक गठजोड़ को लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है। स्थानीय स्तर पर प्रशासन और भूलेख विभाग से इस पूरे मामले की जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। तहसीलदार (सवायजपुर) विनोद कुमार बताते हैं, राजस्व रिकॉर्ड में भूमि मशरूक से पूर्व नवीन परती में दर्ज थी। कहा, यदि कोई आपत्ति प्रस्तुत करता है, तो जांच कराएंगे।

  • ये होती मशरूक अथवा गैर-मजरूआ भूमि 

राजस्व विभाग या भूमि रिकॉर्ड की भाषा में, 'मशरूक' का संदर्भ गैर-मजरूआ भूमि से जोड़ा जाता है, जो मुख्य रूप से सरकारी स्वामित्व वाली जमीन होती है। जिस पर निजी व्यक्ति का मालिकाना हक नहीं होता और यह सीधे सरकार (राज्य) के नियंत्रण में होती है। गांव की साझा जमीन होती है, जिसका उपयोग चरागाह, रास्ते, पोखर, श्मशान या अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता है। हालांकि, राजस्व अधिकारी किसी को उपयोग के लिए भूमि दे सकते हैं, जिसे बाद में लगान रसीद से नियमित करने की प्रक्रिया होती है। लेकिन, वाईलाल वर्मा के कब्जे वाली जमीन में भारी लोचा बताया जाता है, जिसकी स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

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