मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर सेना के जवान के साथ मारपीट पर टोल एजेंसी पर 20 लाख का जुर्माना और लाइसेंस होगा रद्द।
Meerut: उत्तर प्रदेश के भूनी टोल प्लाजा पर 17 अगस्त 2025 की रात लगभग आठ बजे भारतीय सेना के जवान कपिल सिंह और उनके चचेरे भाई शिवम...
मेरठ, उत्तर प्रदेश के भूनी टोल प्लाजा पर 17 अगस्त 2025 की रात लगभग आठ बजे भारतीय सेना के जवान कपिल सिंह और उनके चचेरे भाई शिवम के साथ टोल कर्मचारियों द्वारा की गई मारपीट की घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि सेना और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को भी सख्त कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया। इस मामले में टोल संग्रह एजेंसी मेसर्स धरम सिंह पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, और इसके अनुबंध को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। साथ ही, छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, और पुलिस अन्य संलिप्त लोगों की तलाश कर रही है।
17 अगस्त 2025 की रात मेरठ-करनाल राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-709ए) पर स्थित भूनी टोल प्लाजा पर भारतीय सेना के जवान कपिल सिंह, जो जम्मू-कश्मीर में राजपूत रेजिमेंट में तैनात हैं, अपने चचेरे भाई शिवम के साथ दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर जा रहे थे। कपिल एक महीने की छुट्टी के बाद श्रीनगर में अपनी ड्यूटी जॉइन करने के लिए निकले थे। उनकी फ्लाइट सोमवार सुबह पांच बजे थी। भूनी टोल प्लाजा पर पहुंचने पर वाहनों की लंबी कतार थी, जिसके कारण कपिल ने टोल कर्मचारियों से जल्दी निकलने की अनुमति मांगी। उन्होंने अपना सेना का पहचान पत्र दिखाया, क्योंकि सैनिकों को टोल शुल्क में छूट का प्रावधान है। इसके अलावा, कपिल ने यह भी बताया कि वह स्थानीय गोटका गांव के निवासी हैं, जिसके कारण उन्हें टोल शुल्क से छूट मिलनी चाहिए थी। हालांकि, टोल कर्मचारियों ने उनकी बात नहीं मानी और टोल शुल्क मांगने पर जोर दिया। इस बात पर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। बहस जल्द ही हिंसक रूप ले लिया, और टोल कर्मचारियों ने कपिल और उनके भाई शिवम पर हमला कर दिया। वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि 8-10 टोल कर्मचारी कपिल को खंभे से बांधकर लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से बेरहमी से पीट रहे हैं। एक कर्मचारी ने तो ईंट उठाकर मारने की धमकी भी दी। इस दौरान कपिल का पहचान पत्र और मोबाइल भी छीन लिया गया। शिवम ने जब अपने भाई को बचाने की कोशिश की, तो उनके साथ भी मारपीट की गई। इस हमले में कपिल के सिर और नाक पर गंभीर चोटें आईं, और दोनों भाइयों को सरूरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। सोमवार सुबह गोटका गांव और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों ग्रामीण और ठाकुर समाज के लोग टोल प्लाजा पर पहुंच गए। उन्होंने टोल बूथ पर पत्थरबाजी की, बूम तोड़ दिए, और कार्यालय में तोड़फोड़ की। गुस्साए ग्रामीणों ने टोल को मुफ्त करा दिया, जिससे कुछ समय के लिए वाहनों का आवागमन बिना शुल्क के हुआ। इस हंगामे में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व कार्यकर्ता अभिषेक चौहान और पूर्व विधायक संगीत सोम भी शामिल हुए, जिन्होंने टोल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और टोल एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की मांग की। स्थानीय लोगों का कहना था कि टोल प्रबंधन अक्सर मनमानी करता है और यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार करता है। इस बार एक सैनिक के साथ इस तरह की हिंसा ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया। ग्रामीणों ने मांग की कि दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए। पुलिस ने भारी बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन कई घंटों तक जारी रहा।
मेरठ पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए छह टोल कर्मचारियों सचिन, विजय, अनुज, अंकित, सुरेश राणा, और अंकित शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर जांच शुरू की है। कपिल और उनके परिवार की शिकायत पर हत्या के प्रयास, गैरकानूनी जमावड़ा, और डकैती जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। मेरठ के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) राकेश कुमार मिश्रा ने बताया कि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है, और मामले की गहन जांच की जा रही है। टोल कर्मचारियों ने भी कपिल के खिलाफ शिकायत दर्ज की है, जिसमें दावा किया गया है कि कपिल ने पहले उन पर हमला किया था। पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों की जांच कर रही है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इस घटना को गंभीरता से लिया और तत्काल कार्रवाई की। एनएचएआई ने टोल संग्रह एजेंसी मेसर्स धरम सिंह पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और इसके अनुबंध को समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। साथ ही, इस एजेंसी को भविष्य में किसी भी टोल प्लाजा की बोली में हिस्सा लेने से रोकने की कार्रवाई भी शुरू की गई है। एनएचएआई ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वह इस तरह के व्यवहार की कड़ी निंदा करता है और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सभी यात्रियों, विशेषकर सैनिकों, के लिए सुरक्षित और निर्बाध यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारतीय सेना की सूर्य कमांड ने भी इस घटना पर तीखी नाराजगी जताई। सेना ने बयान जारी कर कहा कि एक सेवारत सैनिक के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है, और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। सेना ने मेरठ पुलिस के साथ संपर्क कर मामले में कठोर कार्रवाई की मांग की। इस घटना की गूंज रक्षा मंत्रालय तक पहुंची, और सेना ने अपने स्तर पर भी जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। पूर्व विधायक संगीत सोम ने टोल प्लाजा पर धरना देकर प्रशासन पर दबाव बनाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि एक सैनिक का अपमान पूरे देश का अपमान है। अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस घटना की निंदा की है। कुछ नेताओं ने इसे राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का उदाहरण बताया, जबकि अन्य ने टोल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। स्थानीय लोगों और ठाकुर समाज ने इस घटना को सेना की गरिमा पर हमला माना। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने टोल कर्मचारियों की इस हरकत की कड़ी आलोचना की। कई लोगों ने लिखा कि जो सैनिक देश की सीमाओं पर अपनी जान जोखिम में डालते हैं, उनके साथ अपने ही देश में ऐसा व्यवहार शर्मनाक है। कुछ यूजर्स ने मांग की कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए टोल कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाए और उनकी जवाबदेही तय की जाए।
भूनी टोल प्लाजा पर पहले भी टोल कर्मचारियों की मनमानी और यात्रियों के साथ अभद्र व्यवहार की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल कर्मचारी अक्सर नियमों का पालन नहीं करते और अनावश्यक विवाद पैदा करते हैं। इस घटना ने टोल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टोल कर्मचारियों को यात्रियों, विशेषकर सैनिकों और अन्य विशेष श्रेणियों, के साथ व्यवहार करने का प्रशिक्षण देना जरूरी है। यह घटना न केवल एक सैनिक के साथ हुई हिंसा का मामला है, बल्कि यह समाज में सेना के प्रति सम्मान और टोल प्रबंधन की जवाबदेही का भी सवाल उठाती है। एनएचएआई और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने स्थिति को कुछ हद तक नियंत्रित किया, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है। टोल कर्मचारियों के लिए सख्त नियम, नियमित प्रशिक्षण, और सीसीटीवी निगरानी को और प्रभावी करने की आवश्यकता है। मेरठ के भूनी टोल प्लाजा पर भारतीय सेना के जवान कपिल सिंह के साथ हुई मारपीट की घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी आक्रोश पैदा किया है। पुलिस, एनएचएआई, और सेना की त्वरित कार्रवाई से दोषियों पर शिकंजा कसा गया है, लेकिन यह घटना टोल प्रबंधन और कानून-व्यवस्था की खामियों को सामने लाती है।
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