Sambhal: नेजा मेला लगेगा या फिर लगेगी रोक? हाईकोर्ट पहुँची नेजा कमेटी, प्रशासन पर साजिश का आरोप। 

सम्भल में पारंपरिक नेजा मेले को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। पिछले वर्ष प्रशासनिक रोक के चलते मेला

Jan 24, 2026 - 14:45
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Sambhal: नेजा मेला लगेगा या फिर लगेगी रोक? हाईकोर्ट पहुँची नेजा कमेटी, प्रशासन पर साजिश का आरोप। 
शाहिद मसूदी, अध्यक्ष, धार्मिक नगर नेजा कमेटी सम्भल

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल में पारंपरिक नेजा मेले को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। पिछले वर्ष प्रशासनिक रोक के चलते मेला आयोजित नहीं हो सका था, लेकिन इस बार धार्मिक नगर नेजा कमेटी ने साफ संकेत दिए हैं कि वे मेले के आयोजन को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। मामला अब सीधे माननीय उच्च न्यायालय पहुँच चुका है।

धार्मिक नगर नेजा कमेटी के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने बताया कि नेजा मेला सय्यद सालार मसूद ग़ाज़ी रहमतुल्ला अलैह की याद में हजार वर्षों से अधिक समय से परंपरागत रूप से आयोजित होता चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि 2025 में प्रशासन ने जानबूझकर मेले को रोकने की साजिश रची। कमेटी द्वारा समय से उपजिलाधिकारी को लिखित सूचना देने के बावजूद, झंडा रोपण से एक दिन पहले उन्हें कोतवाली बुलाया गया और मेले को गैरकानूनी बताते हुए रोक लगा दी गई। शाहिद मसूदी का आरोप है कि उस दौरान अधिकारियों ने न केवल मेला रोकने की बात कही, बल्कि झंडा गाड़ने वालों को देशद्रोही तक करार दिया गया। इसके बाद उन्हें 24 घंटे के लिए नजरबंद कर दिया गया, जिससे वे कोर्ट भी नहीं जा सके और मेला आयोजित नहीं हो पाया। इस वर्ष कमेटी ने 10 दिसंबर को ही जिलाधिकारी और नगर मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र सौंप दिया है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 10 मार्च को नेजा मेले की ढाल गाड़ी जाएगी और उसके बाद मेले का आयोजन होगा। अध्यक्ष ने बताया कि इस बार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए 20 तारीख को हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर दी गई है। नेजा मेला न लगने से पिछले साल स्थानीय व्यापारियों और गरीब तबके पर गहरा असर पड़ा था। दूर-दराज से आने वाले दुकानदारों, खासकर दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों की आजीविका प्रभावित हुई। कमेटी ने इस पहलू को भी अपनी याचिका में प्रमुखता से उठाया है। शाहिद मसूदी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उनका कहना है कि हर धर्म को अपने त्योहार मनाने का संवैधानिक अधिकार है और यही देश की गंगा-जमुनी तहजीब और धर्मनिरपेक्ष पहचान है। अब सबकी नजरें हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि इस साल नेजा मेला लगेगा या फिर एक बार फिर उस पर रोक लगेगी।

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