आईपीएस नीरज कुमार की सफलता की है एक अलग ही कहानी... सिस्टम बदलने को छोड़ दी 22 लाख की नौकरी, मेहनत कर बने आईपीएस।

Jul 15, 2024 - 10:50
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आईपीएस नीरज कुमार की सफलता की है एक अलग ही कहानी... सिस्टम बदलने को छोड़ दी 22 लाख की नौकरी, मेहनत कर बने आईपीएस।

आईएनए न्यूज़-हरदोई डेस्क

  • युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं एसपी नीरज कुमार जादौन, विषम परिस्थितियों को संभालने की है अद्वितीय क्षमता

आधुनिक समय विसंगतियों से आहत होकर कई युवा अपना धैर्य खो देते हैं। अलग रास्ता अपना लेते हैं या फिर कोई गलत कदम उठा लेते हैं लेकिन कई प्रतिभावान व्यक्तित्व मेहनत और लगन से कुछ अलग ही कर जाते हैं और दूसरों के लिए एक प्रेरणा बनकर उभरते हैं। ऐसे व्यक्तिव को यदि सद्प्रेरक का पर्याय माना जाए तो भी शायद कम ही होगा। हरदोई जिले में भी एक ऐसे ही प्रतिभावान व्यक्तित्व का नव-आगमन हुआ है, जो आजकल के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

हम बात कर रहे हैं हरदोई में नवागत आईपीएस नीरज कुमार जादौन की, जिन्होंने विषम परिस्थितियों में अपनी लग्न और मेहनत से इतिहास के पन्नों में एक अलग ही दास्तां लिख डाली। यह दास्तां है 2015 बैच से गाजियाबाद में एसपी देहात की कमान संभालने वाले आईपीएस नीरज कुमार जादौन की। सन् 2008 में उनकी पिता की हत्या के समय पुलिस की शिथिलता और खराब सिस्टम से दुःखी होकर अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए नीरज कुमार जादौन ने पुलिस अफसर बनने की जिद ठान ली। जालौन के नौरेजपुर गांव के रहने वाले एसपी नीरज कुमार जादौन का जन्म कानपुर में हुआ। जहां से उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण की।

इसके बाद उन्होंने आईआईटी, बीएचयू से कंप्यूटर साइंस में बीटेक कम्पलीट कर एमएनसी जॉइन की। पहले नोएडा, बैंगलोर और यूके तक नौकरी की। अपने पिता की हत्या के समय वे बैंगलोर में थे। अपने पिता की हत्या के मामले में पुलिस आरोपियों का साथ देती नजर आई। पुलिस के इस रवैये से दुःखी होकर उन्होंने खुद ही आईपीएस बनने की राह पकड़ ली और सन् 2010 में अपनी प्राइवेट नौकरी के साथ ही इसकी तैयारी शुरू कर दी। 2011 में वे अपनी मेहनत से इंटरव्यू तक आ पहुंचे लेकिन पूर्ण सफलता नहीं मिली। उनके दूसरे प्रयास के दौरान उनकी रैंक कम रह गई। तीसरे प्रयास के लिए उनकी उम्र ज्यादा हो चुकी थी लेकिन तभी 32 वर्ष तक की आयु के उम्मीदवारों के इस परीक्षा में योग्य होने की खबर के बाद उन्होंने 140वीं रैंक हासिल की और आईपीएस बन गए।  उन्हें इस समय करीब 22 लाख रुपए सालाना का पैकेज मिल रहा था लेकिन उन्होंने पिता को न्याय दिलाने के लिए आईपीएस की राह चुनी।

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गाज़ियाबाद से भी है खास लगाव...

एसपी नीरज कुमार जादौन का गाज़ियाबाद से भी खास लगाव है। इसका कारण यह है कि उनके दादा सन् 1967-69 तक एक मिल में मजदूर थे। इसी बीच बॉयलर फटने की घटना के बाद वे अपने परिवार सहित कानपुर आ गए। 

गौ-तस्करों ने किया था जानलेवा हमला..

प्रयागराज से ट्रेनिंग के बाद अलीगढ़ में स्थित गभाना क्षेत्र के सीओ बनने के दौरान नीरज कुमार जादौन ने गौ-तस्करों पर अपना शिकंजा कसा। इस बीच उन पर छः बार जानलेवा हमला भी किया गया लेकिन नीरज कुमार जादौन की हिम्मत के आगे गौ-तस्करों के पसीने छूट गए। उन्होंने कई गौ-वंशों को मुक्त कराया।

एनआरसी और सीएए के विरोध के दौरान संभाले थे हालात..

एनआरसी और सीएए के विरोध और फिर दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान बॉर्डर पर नीरज कुमार जादौन ने विषम हालात संभाले थे। इस बीच लोनी क्षेत्र में दिल्ली बॉर्डर के 10 अति संवेदनशील जगहों से दंगाई बार-बार ग़ाज़ियाबाद में घुसने का प्रयास कर रहे थे लेकिन नीरज कुमार जादौन ने उनके प्रयासों को विफल कर दिया। इतना ही नहीं, जब दंगाइयों ने लाल बाग सब्जी मंडी से करीब 100 मीटर दूर स्थित एक दुकान में लूट के बाद आग लगा दी तो छत पर बेबस होकर रो रहे महिला व बच्चे को नीरज कुमार जादौन ने अपनी सीमा लांघ दिल्ली में घुसकर सकुशल उन्हें बचाया और सैकड़ों की संख्या में पेट्रोल बम और हाथों में पत्थर लिए दंगाइयों को खदेड़ा। 

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जनता से सीधा संवाद और बेहतर कानून-व्यवस्था में माहिर

नीरज कुमार जादौन जनता से सीधे संवाद में ज्यादा भरोसा रखते हैं और क्राइम पर भी उनकी पकड़ मजबूत है। इसके अलावा उनकी क़ानून-व्यवस्था काबिल-ए-तारीफ है। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए वे हमेशा तत्पर रहते हैं। बेहतर पुलिसिंग के लिए वे हमेशा कार्य करते रहते हैं।

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