Lucknow: अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन की होगी सख़्त निगरानी, यूपी सरकार ने उठाया बड़ा कदम। 

उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन और बिक्री को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए यूपी भूतत्व और खनिकर्म विभाग

Jan 7, 2026 - 23:45
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Lucknow: अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन की होगी सख़्त निगरानी, यूपी सरकार ने उठाया बड़ा कदम। 
अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन की होगी सख़्त निगरानी, यूपी सरकार ने उठाया बड़ा कदम। 
  • सीमावर्ती राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त प्रवर्तन और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के प्रयास
  • भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने एमपी, उत्तराखंड और बिहार से मांगा सहयोग, चलेगा संयुक्त छापेमारी अभियान 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन और बिक्री को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए यूपी भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने प्रदेश के सीमावर्ती राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार से सक्रिय सहयोग की मांग की है। इन राज्यों के खनन विभाग और प्रशासन से मिलकर संयुक्त प्रवर्तन और निगरानी तंत्र तैयार किया जा रहा है। इसके  लिए पड़ोसी राज्यों से वैध ट्रांजिट पास के साथ अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र (आईएसटीपी) की अनिवार्यता पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रभावी निगरानी तंत्र बनाया जा रहा है। भूतत्व और खनिकर्म विभाग का ये कदम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक गंगा बेसिन में रेत के अवैध खनन और बिक्री पर रोक के साथ पर्यावरणीय संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

  • वैध ट्रांजिट पास के साथ आईएसटीपी की अनिवार्यता पर जोर 

यूपी भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने मुख्य सचिव की बैठक में प्रदेश में अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन, परिवहन और बिक्री को रोकने के लिए सीमावर्ती पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त निगरानी और प्रवर्तन तंत्र के बारें में विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में विभाग की ओर से मध्य प्रदेश, बिहार और उत्तराखंड के संबंधित विभागों के साथ पत्राचार किया गया है। सबसे ज्यादा जोर अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले लोडिंग वाहनों के लिए वैध ट्रांजिट पास के साथ अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र (आईएसटीपी) की अनिवार्यता पर है। सीमावर्ती जिलों में ट्रांजिट पास जारी करते समय ही देय अंतरराज्यीय परिवहन शुल्क जमा कराने की बात भी कही गई। इसके लिए इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रभावी निगरानी रखने की तैयारी की जा रही है जो न केवल अवैध परिवहन को रोकेगा साथ ही पारदर्शिता और राजस्व संग्रह में भी बढ़ोतरी करेगा। 

  • रियल टाइम डेटा के आधार पर साझा करेंगे जानकारी

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी राज्यों से सीमावर्ती जिलों में सभी लोडिंग पॉइंट्स जैसे खनन पट्टे, खनिज भंडारण स्थल और क्रशरों पर वाहन लोडिंग नियमों का कड़ाई से पालन करने और ओवरलोडिंग संबंधी जानकारी साझा की जाएगी। इसके साथ ही सीमावर्ती राज्यों में स्थापित चेकगेट्स और चेकपोस्ट्स की सूची उपलब्ध कराने और यूपी की ओर निकलने वाले वाहनों का विवरण नियमित रूप से साझा करने की बात कही। ये कार्य रियल टाइम डेटा के आधार पर सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी और खनन निदेशालय मिल कर करेंगे जिससे संयुक्त निगरानी और छापेमारी की कार्रवाई आसानी से की जा सकेगी। 

  • पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर की जाएगी संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई

अधिकारियों ने बैठक में बताया कि इस संबंध में सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस, परिवहन और खनन विभाग के अधिकारियों के साथ मासिक समन्वय बैठकें करने की भी बात कही गई है। जिसके माध्यम से पड़ोसी राज्यों के अधिकारी और टास्क फोर्स सदस्य साथ मिलकर संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई सुनिश्चित करेगें। ये पहल प्रदेश में अवैध रेत खनन के निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने और साथ ही अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन पर रोक लगाएगा। अधिकारियों ने बाताया कि इससे पहले ड्रोन सर्वे और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीकों को भी अपनाया गया है, लेकिन अंतरराज्यीय सीमाओं वाले जिलों में चुनौतियां बनी हुई हैं। पड़ोसी राज्यों के सहयोग से यूपी भूतत्व और खनिकर्म विभाग का यह प्रयास न केवल राजस्व में वृद्धि लाएगा बल्कि गंगा बेसिन में रेत के अवैध खनन पर लगाम लगाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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