क्या बीजेपी में है अंदर ही अंदर कोई तकरार, आखिर क्यों मिली उत्तरप्रदेश में बीजेपी को हार।
- लोकसभा चुनाव में पहले गेम और फिर ब्लेम की सियासत.. आखिर क्या रहा निष्कर्ष 3000 सदस्यों वाली कार्यसमिति बैठक का..
आईएनए न्यूज़- लखनऊ-डेस्क
लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद यूपी में 3000 सदस्यों की कार्यसमिति बैठक बुलाई गई। जिसमें भाजपा के अनुभवी नेताओं ने संगठित होकर लोकसभा चुनाव में हार के मुख्य कारणों पर चर्चा की। इसमें विपक्ष द्वारा संविधान के नाम पर लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना एक बड़ा कारण बताया गया।
हालांकि कुछ भाजपा नेताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से अंदर ही अंदर 'पहले गेम फिर ब्लेम' जैसी बात कह दी। जिस पर वहां मौजूद लोगों के मुंह पर ताले लग गए। सीएम योगी ने हार के कारणों पर चर्चा करते हुए अधिक आत्मविश्वास होने की बात कही।इस बीच कुछ बड़े नेताओं ने एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ना शुरू कर दिया। कई लोगों ने सरकारी तंत्र पर ही सवाल उठा दिए।
इस बैठक में गुटबंदी और बगावत भरी हुंकार देखने को भी मिली। इन सब चीजों को देखकर लग रहा है कि मानो यूपी बीजेपी में भीतर ही भीतर कुछ बड़ा चल रहा है और स्थिति सामान्य नहीं है। केशव प्रसाद मौर्य ने चर्चा करते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि जो दर्द आपका है, वही मेरा भी दर्द है'। यह संगठन बड़ा था, है और रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं के लिए 7 कालिदास मार्ग हमेशा खुला है।
केशव प्रसाद मौर्य ने मानो अपने इस बयान से कार्यकर्ताओं की दुखती नब्ज पकड़ ली, जिस पर उन्हें तालियां की गड़गड़ाहट भी सुनने को मिली। इस बीच प्रशासन द्वारा बीजेपी नेताओं का सम्मान न करने का मुद्दा भी गरमाया। यूपी में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू किए गए चेकिंग-अभियान पर भी कुछ नेताओं ने सवाल उठा दिए। बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी को लखनऊ के हजरतगंज में इस अभियान का खामियाजा भी भुगड़ता पड़ा था, यह मामला भी तूल पकड़ता दिखाई दिया।
कानपुर में इसी अभियान को लेकर एक बीजेपी नेता और पुलिस की नोकझोंक को लेकर डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सवाल उठा दिए। सनद हो कि यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कई हफ्तों से कैबिनेट मीटिंग से दूर ही दिखाई दिए। ऐसे में सरकार के फैसलों को लेकर उनकी नाराजगी के कयास भी लगाए जा रहे हैं। दोनों डिप्टी सीएम द्वारा सरकार पर सवाल उठाने के बाद धीरे-धीरे कुछ अन्य नेताओं ने भी बगावत भरे शब्दों में बोलना शुरू कर दिया।
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इस बैठक में शामिल निषाद पार्टी के संस्थापक संजय निषाद के सुर भी बीजेपी सरकार के खिलाफ ही इशारा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यूपी में नौकरशाही का राज है। इस वक्त पर अगर आप बुलडोजर चलवाएंगे और लोगों के घर गिरवायेंगे तो मतदाता नाराज तो होगा ही। आगे उन्होंने कहा कि सपा की सरकार में भर्ती हुए पुलिसकर्मी और अधिकारी भाजपा कार्यकर्ताओं व पार्टी के विरोध में काम कर रहे हैं। प्रशासन बनाम बीजेपी कार्यकर्ता के बीच यह जंग भी हार का बड़ा कारण है। जानबूझकर ऐसी स्थिति उत्पन्न की जा रही है, जिससे संगठन और सरकार एक दूसरे के विरोध में आमने-सामने खड़े हो जाएं।
इतना ही नहीं, इस बैठक में कई पूर्व नेताओं और विधायकों आदि ने भी सरकार के विरोध में सुर गाए। पूर्व में मंत्री रहे मोती सिंह ने कहा कि 42 सालों से तहसीलों और थानों में जो भ्रष्टाचार चला आ रहा है, उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है। प्रदेश में बीजेपी की स्थिति अब अच्छी नहीं है और केंद्र सरकार इसमें हस्तक्षेप करके बड़ा कदम उठाना चाहिए। सपा पार्टी के प्रवक्ता ने इस बैठक पर भाजपा की चुटकी लेते हुए कहा कि दोनों डिप्टी सीएम अब सीएम बनने की तमन्ना पूरी करना चाहते हैं इसलिए जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है।
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इस बीच सीएम योगी ने भी हार के कारणों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अधिक आत्मविश्वास के कारण ही पार्टी को इस दुर्गति का सामना करना पड़ा है। उनका निशाना जेपी नड्डा के उस बयान की ओर भी था, जिसमें जेपी नड्डा ने कहा था कि बीजेपी अब मजबूत पार्टी बन चुकी है और संघ के समर्थन की जरूरत पार्टी को नहीं है।
नौकरशाही के सवाल पर भी जवाब देते हुए योगी ने कहा कि उनकी सरकार से पहले मोहर्रम पर ताजिये की जगह घर तोड़े जाते थे, सड़कें सूनी पड़ जाती थीं और पीपल के पेड़ काट दिए जाते थे। उन्होंने कहा कि यदि त्योहार मनाने हैं तो नियम से मनाओ वरना अपने घर बैठ जाओ।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि इस बैठक में बड़े नेताओं में एक दूसरे पर गेम खेलने और दूसरे को ब्लेम करने की बात कही जाती रही। कोई गहन निष्कर्ष निकलने की स्थिति इस बैठक में दिखाई नहीं दी।
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