उत्तरकाशी आपदा के बीच रक्षाबंधन पर महिला ने साड़ी का टुकड़ा फाड़कर सीएम धामी को बांधी राखी।
Uttarakhand : उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 5 अगस्त 2025 को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने धराली और हर्षिल क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। सड़कें, पुल ...
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में 5 अगस्त 2025 को आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने धराली और हर्षिल क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। सड़कें, पुल और घर तबाह हो गए, कई लोग लापता हो गए, और सैकड़ों लोग फंस गए। इस विपदा के बीच, रक्षाबंधन के पर्व ने एक भावुक और मानवीय दृश्य प्रस्तुत किया। 8 अगस्त 2025 को, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आपदा प्रभावित क्षेत्र धराली में राहत कार्यों का जायजा लेने पहुंचे, तो गुजरात के अहमदाबाद की रहने वाली धनगौरी बरौलिया ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उसे राखी के रूप में मुख्यमंत्री को बांधा।
उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल क्षेत्र में 5 अगस्त को बादल फटने और भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ और भूस्खलन हुआ। इस आपदा ने कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से काट दिया। गंगोत्री धाम की ओर जाने वाला मार्ग अवरुद्ध हो गया, और सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग फंस गए। इस आपदा में 50 से अधिक नागरिक, आठ सैनिक और एक जूनियर कमीशंड अधिकारी (जेसीओ) लापता हो गए। कई घर, दुकानें और हेलीपैड बह गए। इस संकट की घड़ी में उत्तराखंड सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तिरुपति का अपना दौरा रद्द कर देहरादून लौटकर राहत कार्यों की कमान संभाली और 6 अगस्त को धराली पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
धनगौरी बरौलिया अपने परिवार के साथ गंगोत्री दर्शन के लिए चारधाम यात्रा पर उत्तराखंड आई थीं। वह अहमदाबाद के ईशनपुर क्षेत्र की रहने वाली हैं। 5 अगस्त की आपदा के कारण वह और उनका परिवार धराली में फंस गए। मार्ग अवरुद्ध होने और मलबे के तेज बहाव के कारण स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), पुलिस और अग्निशमन विभाग की टीमें तुरंत बचाव कार्य में जुट गईं। पहले दिन ही 130 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। धनगौरी और उनके परिवार को भी रेस्क्यू टीमों ने सुरक्षित निकाल लिया।
8 अगस्त को, रक्षाबंधन से एक दिन पहले, मुख्यमंत्री धामी धराली में राहत कार्यों की निगरानी कर रहे थे। वह प्रभावित लोगों से मिल रहे थे और उनकी समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान धनगौरी बरौलिया ने एक अनोखा और भावनात्मक कदम उठाया। वह भावुक हो गईं और अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उसे राखी के रूप में मुख्यमंत्री धामी की कलाई पर बांध दिया। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों के लिए गहरी संवेदनाओं से भरा था। धनगौरी ने इस राखी के जरिए न केवल मुख्यमंत्री के प्रति अपनी कृतज्ञता और विश्वास व्यक्त किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार और जनता के बीच एक मजबूत रिश्ता है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस भावनात्मक क्षण को विनम्रता से स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा की इस घड़ी में हर प्रभावित व्यक्ति के साथ खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने धनगौरी और उनके परिवार को आश्वासन दिया कि सरकार राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। धामी ने यह भी कहा कि यह राखी उनके लिए न केवल एक रक्षासूत्र है, बल्कि एक जिम्मेदारी भी है, जो उन्हें हर नागरिक की सुरक्षा और कल्याण के लिए और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित करती है। इस घटना ने धराली जैसे दुर्गम क्षेत्र में आशा, विश्वास और सामाजिक एकजुटता की मिसाल पेश की।
उत्तरकाशी में आई इस आपदा ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया। 5 अगस्त को धराली और हर्षिल में बादल फटने से बरतवारी, लिंचीगाड, गंगरानी और अन्य गांवों में भारी नुकसान हुआ। सड़कें और पुल बह गए, जिससे कई क्षेत्र पूरी तरह कट गए। सेना और आईटीबीपी के जवान फंसे हुए लोगों को भोजन, चिकित्सा सहायता और आश्रय प्रदान कर रहे हैं। भारतीय वायुसेना के चिनूक और एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। 7 अगस्त तक 274 लोगों को गंगोत्री और अन्य क्षेत्रों से हर्षिल तक सुरक्षित लाया गया, जिनमें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, असम, कर्नाटक और तेलंगाना के लोग शामिल थे।
मुख्यमंत्री धामी ने आपदा के पहले दिन से ही स्थिति पर कड़ी नजर रखी। उन्होंने तिरुपति दौरा रद्द कर देहरादून में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में बैठक की और अधिकारियों को तत्काल राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। 6 अगस्त को वह धराली पहुंचे और ग्राउंड जीरो पर जाकर प्रभावितों से मुलाकात की। उन्होंने राहत शिविरों का दौरा किया और भोजन, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की। धामी ने गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय को नोडल अधिकारी नियुक्त किया और कई वरिष्ठ अधिकारियों को उत्तरकाशी में कैंप करने के आदेश दिए।
केंद्र सरकार ने भी इस आपदा में उत्तराखंड की पूरी मदद की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री धामी से फोन पर बात की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। केंद्र सरकार ने चंडीगढ़, सरसावा और आगरा से दो चिनूक और दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए, जिनका उपयोग भारी उपकरणों को पहुंचाने और सड़क यातायात बहाल करने में किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने घायलों के इलाज के लिए दून मेडिकल कॉलेज, कोरोनेशन अस्पताल और एम्स ऋषिकेश में बेड आरक्षित किए।
उत्तराखंड पुलिस ने भी राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 300 पुलिसकर्मियों, 40वीं वाहिनी पीएसी और आईआरबी के 140 जवानों को उत्तरकाशी भेजा गया। देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और टिहरी के 160 पुलिस कर्मियों को भी बचाव कार्यों के लिए तैनात किया गया। 5 अगस्त को राज्य आपदा मोचन निधि से 20 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई। जिला प्रशासन ने हर्षिल में इंटर कॉलेज, जीएमवीएन और झाला में राहत शिविर स्थापित किए।
इस आपदा ने उत्तराखंड में मानसून की चुनौतियों को फिर से उजागर किया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 9 अगस्त के लिए उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ सहित नौ जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। धराली और हर्षिल में सड़कों और बिजली की बहाली का काम तेजी से चल रहा है। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम) और एसडीआरएफ ने लिंचीगाड में अस्थायी पुल का निर्माण शुरू किया है।
धनगौरी बरौलिया द्वारा मुख्यमंत्री धामी को राखी बांधने की घटना ने इस आपदा के बीच एक सकारात्मक और भावनात्मक संदेश दिया। यह दृश्य दर्शाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी मानवीय रिश्ते और एकजुटता की भावना कितनी मजबूत हो सकती है। धनगौरी ने कहा कि वह मुख्यमंत्री के प्रयासों से प्रभावित थीं और उनकी मदद के लिए आभार व्यक्त करना चाहती थीं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी, जहां लोग इस भावनात्मक पल की सराहना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि उत्तराखंड सरकार हर प्रभावित व्यक्ति की मदद के लिए दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने बचाव कर्मियों का हौसला बढ़ाया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत सामग्री समय पर प्रभावितों तक पहुंचे। धामी ने यह भी कहा कि वह दो दिन तक उत्तरकाशी में रहकर राहत कार्यों की निगरानी करेंगे।
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