Trending News: जयपुर में पुलिस टीम पर हमला- फिल्मी अंदाज में बदमाशों ने पुलिस पर किया हमला, आरोपी को छुड़वाने की कोशिश।
राजस्थान की राजधानी जयपुर के विद्याधर नगर थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जब एक वांछित आरोपी को पकड़कर थाने ले जा रही पुलिस टीम ....
राजस्थान की राजधानी जयपुर के विद्याधर नगर थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज घटना सामने आई, जब एक वांछित आरोपी को पकड़कर थाने ले जा रही पुलिस टीम पर बदमाशों ने हमला कर दिया। यह घटना रविवार शाम को मीनार मस्जिद के पास हुई, जब श्यामनगर थाना पुलिस ने आरोपी गौरव राय को गिरफ्तार किया था और उसे एक निजी वाहन में थाने ले जा रही थी। इसी दौरान, दो अन्य बदमाशों ने बाइक से पुलिस की गाड़ी को घेर लिया और हमला कर दिया। हमलावरों ने पुलिस के हेड कांस्टेबल शहजाद अली की वर्दी फाड़ दी और गाड़ी का कांच तोड़ दिया, साथ ही आरोपी को छुड़ाने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर हमलावरों के इस प्रयास को नाकाम कर दिया। इस घटना ने शहर में कानून-व्यवस्था और पुलिस की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, श्यामनगर थाना पुलिस को गौरव राय के खिलाफ एक आपराधिक मामले में वांछित होने की सूचना मिली थी। गौरव राय पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें चोरी और मारपीट जैसे अपराध शामिल हैं। रविवार शाम को, पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार किया और एक निजी वाहन में थाने ले जा रही थी। इस दौरान, मीनार मस्जिद के पास दो बाइक सवार बदमाशों ने पुलिस की गाड़ी को रोका और हमला शुरू कर दिया। हमलावरों ने हेड कांस्टेबल शहजाद अली के साथ धक्का-मुक्की की, उनकी वर्दी फाड़ दी, और वाहन के कांच को क्षतिग्रस्त कर दिया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावर गौरव राय के सहयोगी थे, जिनका मकसद उसे पुलिस हिरासत से मुक्त कराना था। हमले के दौरान, बदमाशों ने पुलिस पर शारीरिक हमला किया और हथियारों का भी प्रदर्शन किया। हालांकि, पुलिस कर्मियों ने साहस का परिचय देते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और गौरव राय को छुड़ाए जाने से रोक लिया। इस घटना में हेड कांस्टेबल शहजाद अली को मामूली चोटें आईं, लेकिन कोई गंभीर चोट की खबर नहीं है। पुलिस ने तुरंत अतिरिक्त बल को मौके पर बुलाया और हमलावरों की तलाश शुरू की।
घटना के बाद, श्यामनगर थाना पुलिस ने हमलावरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2) (दंगा करने), 351 (आपराधिक धमकी), 109 (हत्या का प्रयास), और 121(2) (सार्वजनिक सेवक को कर्तव्य निर्वहन के दौरान चोट पहुंचाने) के तहत मामला दर्ज किया। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने वाहन को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के लिए भी संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने बताया कि हमलावरों की पहचान कर ली गई है, और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
विद्याधर नगर थाना क्षेत्र के SHO ने एक बयान में कहा, "हमलावरों ने न केवल पुलिस पर हमला किया, बल्कि सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। हम इस मामले में सख्त कार्रवाई करेंगे और सभी दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।" पुलिस ने स्थानीय निवासियों से भी अपील की है कि वे जांच में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
इस घटना ने सोशल मीडिया और स्थानीय समुदाय में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। X पर #JaipurPoliceAttack और #VidhyadharNagar जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई यूजर्स ने पुलिस पर हमले की निंदा की और इसे कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने वाला बताया। एक यूजर ने लिखा, "पुलिस पर हमला करना निंदनीय है। यह दिखाता है कि अपराधी कितने निडर हो गए हैं। सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए।" वहीं, कुछ यूजर्स ने इस घटना को पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मौका माना और कहा कि पुलिस को ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बेहतर रणनीति बनानी चाहिए।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की गूंज सुनाई दी। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस घटना को राजस्थान में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का उदाहरण बताया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने X पर पोस्ट करते हुए कहा, "जयपुर में पुलिस पर हमला चिंताजनक है। बीजेपी सरकार अपराधियों पर नकेल कसने में नाकाम रही है। सीकर, टोंक, और हनुमानगढ़ जैसी घटनाएं इसका सबूत हैं।" उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से तत्काल कार्रवाई और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की।
दूसरी ओर, बीजेपी प्रवक्ता ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि सरकार अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा, "पुलिस को और सशक्त करने के लिए हम हरसंभव कदम उठा रहे हैं। इस घटना के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।"
- जयपुर में पुलिस पर हमलों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब जयपुर में पुलिस पर हमला हुआ है। हाल के वर्षों में, पुलिस टीमों पर हमले की कई घटनाएं सामने आई हैं, जो अपराधियों की बढ़ती निडरता को दर्शाती हैं। उदाहरण के लिए:
अप्रैल 2025, सीकर: एक डकैती के संदिग्ध को पकड़ने गई पुलिस पर ग्रामीणों ने हमला किया, जिसमें 11 पुलिसकर्मी घायल हुए। इस घटना में मुख्य आरोपी महिपाल फरार हो गया।
जनवरी 2025, कुचामन: हरियाणा पुलिस की एक टीम पर राजस्थान के कुचामन में हमला हुआ, जिसमें एक संदिग्ध को छुड़ा लिया गया और पुलिस वाहन के चालक का अपहरण कर लिया गया।
मार्च 2024, बूंदी: दो पुलिसकर्मी उस समय घायल हो गए जब अज्ञात हमलावरों ने एक पुलिस वाहन पर पथराव किया और दो आरोपियों को छुड़ा लिया।
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि पुलिस पर हमले राजस्थान में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, विशेष रूप से तब जब पुलिस संदिग्धों को गिरफ्तार करने या हिरासत में ले जाने की कोशिश करती है।
जयपुर में हुई इस घटना ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया है। पहला, पुलिस की सुरक्षा और संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है। इस मामले में पुलिस एक निजी वाहन का उपयोग कर रही थी, जो उनकी तैयारियों पर सवाल उठाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस को हिरासत में लिए गए संदिग्धों को ले जाने के लिए विशेष वाहनों और अतिरिक्त सुरक्षा बल की आवश्यकता होती है, खासकर तब जब आरोपी के सहयोगी हिंसक हो सकते हैं।
दूसरा, यह घटना अपराधियों की बढ़ती निडरता को दर्शाती है। हमलावरों ने न केवल पुलिस पर हमला किया, बल्कि सार्वजनिक स्थान पर उनकी वर्दी फाड़ने और वाहन को नुकसान पहुंचाने जैसे साहसिक कदम उठाए। यह स्थिति कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाती है और पुलिस प्रशासन को और सतर्क होने की आवश्यकता को दर्शाती है।
तीसरा, यह घटना सोशल मीडिया के युग में पुलिस की छवि और जनता के विश्वास पर भी प्रभाव डालती है। घटना का वीडियो वायरल होने से जनता में पुलिस के प्रति सहानुभूति बढ़ी है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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