Ayodhya News: दलालों का नेटवर्क और जगह की कमी से भी जूझ रहा अस्पताल, अयोध्या जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी: मरीज परेशान

पिछले हफ्ते जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुण्डे ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों और अस्पताल प्रशासन से बातचीत की और चिकित्सकों की कमी को ए...

May 6, 2025 - 22:26
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Ayodhya News: दलालों का नेटवर्क और जगह की कमी से भी जूझ रहा अस्पताल, अयोध्या जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी: मरीज परेशान

By INA News Ayodhya.

अयोध्या: धार्मिक नगरी अयोध्या का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल, जिला अस्पताल, चिकित्सकों की भारी कमी से जूझ रहा है, जिसके चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हर दिन औसतन 1200 मरीजों का पंजीकरण होने के बावजूद अस्पताल में स्वीकृत 50 चिकित्सकों के पदों में से केवल 21 चिकित्सक ही तैनात हैं। इस कमी के कारण मरीजों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, इलाज में देरी होती है, और कई बार उन्हें उचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पातीं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हाल ही में जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुण्डे ने अस्पताल का निरीक्षण किया और चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। अब अस्पताल प्रशासन मुख्यालय से नई तैनाती का इंतजार कर रहा है।

चिकित्सकों की कमी: मरीजों की परेशानी का बड़ा कारण

अयोध्या जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, जो अब मरीजों के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। अस्पताल में 50 चिकित्सकों के स्वीकृत पदों में से 29 पद रिक्त हैं, जिसके चलते मौजूदा चिकित्सकों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इस समय अस्पताल में सबसे ज्यादा कमी सर्जन, फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, और ईएनटी विशेषज्ञों की है।

  • विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी: अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन स्वीकृत पदों में से केवल एक चिकित्सक तैनात हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजीशियन, और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) जैसे महत्वपूर्ण पद पूरी तरह रिक्त हैं।
  • आंशिक तैनाती वाले विभाग: बाल रोग, पैथोलॉजी, और ब्लड बैंक जैसे विभागों में कुछ चिकित्सक तैनात हैं, लेकिन उनकी संख्या भी जरूरत से काफी कम है।
  • प्रमुख पद खाली: अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) का पद भी रिक्त है, और इसका अतिरिक्त प्रभार सर्जन डॉ. एके सिन्हा को सौंपा गया है।

इस कमी के चलते मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक मरीज, राम प्रसाद, ने बताया, "मुझे हृदय संबंधी समस्या है, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट न होने के कारण मुझे लखनऊ रेफर किया गया। मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं कि मैं वहां जाकर इलाज करा सकूं।" वहीं, एक अन्य मरीज, शीला देवी, ने कहा, "ईएनटी डॉक्टर न होने की वजह से मुझे कई दिनों से कान के दर्द की समस्या झेलनी पड़ रही है। ओपीडी में भीड़ इतनी है कि घंटों इंतजार करना पड़ता है।"

जिलाधिकारी का निरीक्षण और कार्रवाई

पिछले हफ्ते जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुण्डे ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मरीजों और अस्पताल प्रशासन से बातचीत की और चिकित्सकों की कमी को एक गंभीर समस्या के रूप में चिह्नित किया। निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके सिन्हा को अस्पताल की जरूरतों का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया।

डॉ. सिन्हा ने बताया कि प्रस्ताव में एक-एक सर्जन, फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, और ईएनटी सर्जन की तैनाती की मांग की गई है। यह प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय को भेज दिया गया है, और अब अस्पताल प्रशासन नई तैनाती का इंतजार कर रहा है। डॉ. सिन्हा ने कहा, "हमने अपनी जरूरतों को स्पष्ट रूप से मुख्यालय के सामने रखा है। उम्मीद है कि जल्द ही हमें पर्याप्त चिकित्सक मिलेंगे, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जा सकें।"

अनधिकृत लोगों और दलालों का नेटवर्क: एक और चुनौती

चिकित्सकों की कमी के अलावा, जिला अस्पताल में अनधिकृत लोगों और दलालों का नेटवर्क भी एक बड़ी समस्या बन गया है। खासकर इमरजेंसी वार्ड में दलालों की सक्रियता की शिकायतें आम हैं। हाल ही में एक मरीज ने शिकायत की कि इमरजेंसी में टांके लगाने के लिए उससे पैसे की मांग की गई। यह शिकायत सीएमएस तक पहुंची, लेकिन मौके पर संबंधित व्यक्ति नहीं मिला, जिसके चलते कार्रवाई नहीं हो सकी।

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अस्पताल के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "कई बार दलालों को विभागीय संरक्षण मिलता है, जिसके कारण उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती। इमरजेंसी में मरीजों से पैसे वसूलने की शिकायतें बार-बार मिलती हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।" इस समस्या ने अस्पताल की साख को भी प्रभावित किया है, और मरीजों का भरोसा डगमगाया है।

पुरानी ओपीडी में जगह की कमी: मरीजों की परेशानी बढ़ी

अयोध्या जिला अस्पताल की ओपीडी दो हिस्सों में संचालित हो रही है—पुराने और नए भवन में। नए भवन में सर्जरी, ईएनटी, और नेत्र रोग से संबंधित ओपीडी चलती है, जबकि बाकी सभी विभाग पुरानी इमारत में हैं। हालांकि, पुरानी इमारत में जगह की भारी कमी है, जिसके चलते मरीजों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

  • भीड़ और अव्यवस्था: पुरानी ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ के कारण अव्यवस्था का आलम रहता है। मरीजों को बैठने की जगह तक नहीं मिलती, और उन्हें घंटों खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
  • दवा वितरण केंद्र पर लंबी कतारें: दवा वितरण केंद्र पर भी मरीजों की लंबी कतारें लगती हैं। कई बार मरीजों को दवाएं न मिलने की शिकायत भी सामने आई है।

एक मरीज, रमेश कुमार, ने कहा, "पुरानी ओपीडी में इतनी भीड़ होती है कि डॉक्टर को दिखाने में पूरा दिन निकल जाता है। ऊपर से दवा लेने के लिए अलग से लाइन में लगना पड़ता है। सरकार को इस व्यवस्था में सुधार करना चाहिए।"

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का बयान

प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके सिन्हा ने अस्पताल की स्थिति पर अपनी बात रखते हुए कहा, "चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए हमने मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें एक-एक सर्जन, फिजीशियन, कार्डियोलॉजिस्ट, और ईएनटी सर्जन की मांग की गई है। इसके अलावा, अस्पताल में सभी जरूरी दवाएं उपलब्ध हैं, और चिकित्सकों को बाहर की दवाएं न लिखने का सख्त निर्देश दिया गया है। शव वाहन की सुविधा भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।"

डॉ. सिन्हा ने दलालों की समस्या पर भी अपनी बात रखी और कहा कि ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ व्यवस्थागत कमियों के कारण ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, जिन्हें जल्द दूर करने की कोशिश की जा रही है।

अयोध्या के स्थानीय निवासियों ने जिला अस्पताल की स्थिति पर चिंता जताई है। एक स्थानीय निवासी, श्याम लाल, ने कहा, "राम मंदिर के बाद अयोध्या में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, लेकिन जिला अस्पताल की हालत बद से बदतर होती जा रही है। चिकित्सकों की कमी और दलालों की मौजूदगी ने मरीजों का जीना मुहाल कर दिया है।"

वहीं, एक अन्य निवासी, राधिका देवी, ने कहा, "जिलाधिकारी साहब ने जो कदम उठाया है, वह सराहनीय है। लेकिन जब तक चिकित्सक तैनात नहीं होंगे और दलालों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मरीजों को राहत नहीं मिलेगी।"

जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुण्डे ने निरीक्षण के दौरान अस्पताल की स्थिति को गंभीरता से लिया और चिकित्सकों की कमी को प्राथमिकता के आधार पर हल करने का निर्देश दिया। यह कदम दर्शाता है कि जिला प्रशासन अयोध्या में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, मुख्यालय से चिकित्सकों की तैनाती में देरी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अयोध्या जिला अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी, दलालों का नेटवर्क, और जगह की कमी जैसी समस्याओं ने मरीजों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। हर दिन 1200 मरीजों का पंजीकरण होने के बावजूद केवल 21 चिकित्सकों की मौजूदगी इस बात को दर्शाती है कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की तत्काल जरूरत है। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्यालय को भेजा गया प्रस्ताव और नई तैनाती की उम्मीद मरीजों के लिए एक राहत की किरण है। लेकिन जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अयोध्या के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इंतजार करना होगा। यह देखना होगा कि मुख्यालय इस प्रस्ताव पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और अस्पताल की स्थिति में कितना सुधार आता है।

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