Hardoi: हरदोई में 65 साल बाद लौटी बेटी, 80 वर्ष की उम्र में चौखट देखते ही छलके आंसू।

उत्तर प्रदेश के हरदोई से सामने आई ए कहानी कोई फिल्मी दुनिया की कहानी नही ये असल जिंदगी में घटी एक दर्दनाक भयावह घटना की झकझोर

Feb 17, 2026 - 10:48
Feb 17, 2026 - 10:50
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Hardoi: हरदोई में 65 साल बाद लौटी बेटी, 80 वर्ष की उम्र में चौखट देखते ही छलके आंसू।
  • हरदोई में 65 साल बाद लौटी बेटी, 80 वर्ष की उम्र में चौखट देखते ही छलके आंसू
  • लगभग सन 1965 में गांव में डकैतों ने डकैती डाल कर अगवा कर ले गए थे 15 वर्ष की बेटी।
  • पूरे गांव में फैली थी ये सच्ची कहानी बाबा अपने पोतों व बेटी बहु सबको सुनाते थे दुखद कहानी।
  • 15 वर्ष की उम्र में अगवा बेटी की सूचना न मिलने के बाद घर वाले सदैव के लिए खोया मां चुके थे।
  • समय ने एक बार फिर ली करवट और 1965 में अगवा बेटी अपनी बेटी के साथ पहुंची मायके की चौखट।
  • 80 वर्षीय मिठनी को देखते ही उस समय की उम्र के लोगों ने की पहंचान गांव खुशी का माहौल।

उत्तर प्रदेश के हरदोई से सामने आई ए कहानी कोई फिल्मी दुनिया की कहानी नही ये असल जिंदगी में घटी एक दर्दनाक भयावह घटना की झकझोर कर देने वाली एक सच्ची घ्यन है। ये एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो दिल को झकझोर देती है। 15 साल की मासूम बेटी को डकैत अगवा कर ले गए। परिवार ने उसे हमेशा के लिए खोया  मान लिया।  लेकिन 65 साल बाद वही बेटी 80 साल की उम्र में अपने मायके की चौखट पर लौट आई। और जैसे ही उसने अपने घर को देखा। उसके आंसू रुक नहीं पाए।

यह कहानी है जिले के आट गांव की है जहां रहने वाली मिठनी की। साल 1964-65 की एक खौफनाक रात… जब करीब कई दर्जन डकैतों ने गांव में धावा बोल दिया। घर में लूटपाट की, पिता और भाई पर जानलेवा हमला किया… और 15 साल की मिठनी को जबरन अपने साथ उठा ले गए। उस रात के बाद मिठनी अपने परिवार से हमेशा के लिए बिछड़ गई।

डकैत मिठनी को जंगलों में भटकाते रहे, मारपीट भी की। बाद में उसे अलीगढ़ क्षेत्र में छोड़ दिया गया, जहां एक व्यक्ति ने उसे डकैतों से छुड़ाया। सदमे में डूबी मिठनी अपने घर का रास्ता नहीं खोज सकी और वक्त के साथ उन्होंने नई जिंदगी शुरू कर ली। शादी हुई, 5 बच्चे हुए। लेकिन दिल में मायके की याद कभी नहीं मिटी।

मिठनी अक्सर अपने बच्चों से कहती थीं — “मैं हरदोई की हूं… वहां मेरा घर है… मेरा परिवार है…”
80 साल की उम्र में उनकी सबसे छोटी बेटी सीमा ने ठान लिया कि मां को उनके घर जरूर पहुंचाएंगी।
और वख्त ने एक बार फिर करवट ली। अब मिठनी की उम्र करीब 80 वर्ष है। जब मिठनी 65 साल बाद अपने गांव पहुंचीं। तो मंदिर, रास्ते और घर की चौखट को देखते ही उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। जैसे ही वह अपने भाई के घर पहुंची। भाई तो नही लेकिन भाई का हंसेगा खेलता परिवार जरूर मिला। परिजनों देखते ही उन्हें गले लगा लिया। पूरे परिवार में खुशी और भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। जिस बेटी को सभी ने खो दिया था। वह 65 साल बाद जिंदा लौट आई।

यह कहानी सिर्फ एक बेटी की वापसी नहीं… बल्कि उस उम्मीद की जीत है, जो कभी खत्म नहीं होती।
यह कहानी बताती है… कि वक्त चाहे कितना भी बीत जाए। उम्र चाहें कितनी ही हो जाए । लेकिन मायके का प्यार माता पिता भाई बहन  का प्यार और रिश्ता कभी नहीं टूटता।

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