'मैं अपनी प्रजा के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दूंगा' कहते ही मंच पर हो गयी मौत, वीडियो वायरल।

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित प्रसिद्ध रामलीला का मंचन एक दर्दनाक हादसे का साक्षी बन गया। चंबा के ऐतिहासिक चौगान मैदान में चल रही

Sep 24, 2025 - 17:41
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'मैं अपनी प्रजा के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दूंगा' कहते ही मंच पर हो गयी मौत, वीडियो वायरल।
'मैं अपनी प्रजा के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दूंगा' कहते ही मंच पर हो गयी मौत, वीडियो वायरल।

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित प्रसिद्ध रामलीला का मंचन एक दर्दनाक हादसे का साक्षी बन गया। चंबा के ऐतिहासिक चौगान मैदान में चल रही रामलीला के दूसरे दिन राजा दशरथ का किरदार निभा रहे 73 वर्षीय वरिष्ठ कलाकार अमरेश महाजन अचानक मंच पर गिर पड़े। वे अपना संवाद बोल ही रहे थे कि हार्ट अटैक के कारण उनकी सांसें थम गईं। यह दृश्य कैमरे में कैद हो गया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दर्शक शुरू में इसे नाटक का हिस्सा समझते रहे, लेकिन कुछ ही पलों में सच्चाई सामने आ गई। अमरेश महाजन, जिन्हें स्थानीय रूप से शिबू के नाम से जाना जाता था, पिछले 40 वर्षों से चंबा रामलीला में प्रमुख भूमिकाएं निभाते आ रहे थे। इस घटना ने पूरे इलाके को शोक की लहर में डुबो दिया है। रामलीला क्लब के सदस्यों ने इसे अपूरणीय क्षति बताया है।

घटना सोमवार रात करीब आठ बजकर तीस मिनट पर हुई। चंबा रामलीला की परंपरा सदियों पुरानी है, जो हर साल नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। इस बार भी चौगान मैदान पर हजारों लोग जुटे थे। रामलीला का दूसरा दिन सीता स्वयंवर का दृश्य था। मंच पर राजा दशरथ का दरबार सजा हुआ था। अमरेश महाजन सिंहासन पर विराजमान थे। वे जोरदार आवाज में संवाद बोल रहे थे, मैं अपनी प्रजा के लिए प्राण तक न्योछावर कर दूंगा। तभी अचानक उनका शरीर झुक गया। वे साथ खड़े सिपाही के कंधे पर टिक गए और धीरे से मंच पर लेट गए। दर्शकों को लगा कि यह अभिनय का हिस्सा है। लेकिन मंच पर मौजूद अन्य कलाकारों को शक हुआ। ऋषि का किरदार निभाने वाले कलाकार ने चुपके से मदद मांगी। बैकस्टेज टीम दौड़ी और पर्दा गिर गया। अमरेश को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हृदय गति रुकना कारण बताया गया।

अमरेश महाजन चंबा के ही निवासी थे। वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे। पेशे से वे छोटे व्यापारी थे, लेकिन रामलीला के प्रति उनका जुनून गजब का था। पिछले 40 वर्षों से वे चंबा रामलीला में सक्रिय थे। कभी राजा दशरथ की भूमिका में, तो कभी रावण के रूप में। उनकी अभिनय कला इतनी जीवंत होती थी कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते। हर साल वे रिहर्सल में घंटों लगाते। इस बार भी उन्होंने आयोजकों से कहा था कि यह उनकी आखिरी रामलीला होगी। उम्र के कारण अब पीछे हट जाएंगे। लेकिन किसे पता था कि यह बात सच्ची साबित हो जाएगी। रामलीला क्लब के अध्यक्ष स्वापन महाजन ने बताया कि अमरेश भाई हमारे क्लब के स्तंभ थे। उनकी मौत से पूरा चंबा शोकाकुल है। वे हमेशा युवा कलाकारों को प्रेरित करते। इस घटना के बाद रामलीला का मंचन कुछ देर रुका, लेकिन श्रद्धांजलि के रूप में जारी रहा।

वीडियो में पूरा दृश्य साफ दिख रहा है। अमरेश संवाद बोलते हुए मुस्कुरा रहे हैं। फिर अचानक झुक जाते हैं। मंच पर सन्नाटा छा जाता है। दर्शकों की तालियां धीरे-धीरे रुक जाती हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा जा चुका है। लोग इसे देखकर भावुक हो रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि जीवन की नश्वरता का जीता-जागता उदाहरण। राम का पिता बनकर प्रजा के लिए प्राण न्योछावर करने का संवाद बोलते ही प्रभु ने उन्हें बुला लिया। दूसरे ने कहा कि अमरेश जी का अभिनय अमर रहेगा। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि अमरेश महाजन की मौत सांस्कृतिक जगत की क्षति है। परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। स्थानीय विधायक ने भी श्रद्धांजलि दी।

चंबा रामलीला की परंपरा 18वीं शताब्दी से चली आ रही है। यह हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर है। हर साल नवरात्रि के नौ दिनों में विभिन्न दृश्य मंचित होते हैं। चौगान मैदान पर विशेष सजावट की जाती है। हजारों पर्यटक आते हैं। अमरेश जैसे कलाकारों ने इसकी लोकप्रियता बढ़ाई। वे रिहर्सल में युवाओं को सिखाते। एक युवा कलाकार ने बताया कि शिबू अंकल हमेशा कहते थे कि रामलीला सिर्फ नाटक नहीं, भक्ति का माध्यम है। उनकी मौत ने हमें झकझोर दिया। परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी हैं। बेटों ने कहा कि पिता रामलीला के लिए जीते थे। अब उनके बिना घर सूना लगता है। पड़ोसियों ने शोक सभा बुलाई। व्यापार मंडल के अध्यक्ष वीरेंद्र महाजन ने कहा कि अमरेश जी सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय थे। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल पंकज गुप्ता ने भी श्रद्धांजलि दी।

यह घटना हिमाचल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर सवाल उठा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग कलाकारों को स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। रामलीला जैसे लंबे आयोजनों में मेडिकल टीम तैनात हो। चंबा जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। एसडीएम ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के उपाय होंगे। हिमाचल में रामलीला की कई परंपराएं हैं। किन्नौर, मंडी में भी आयोजन होते हैं। लेकिन चंबा की रामलीला यूनेस्को की सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल है। अमरेश की मौत ने इसकी गरिमा को और मजबूत किया। सोशल मीडिया पर अभियान चल रहा है कि अमरेश महाजन के नाम पर एक पुरस्कार शुरू हो। युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए। रामलीला क्लब ने अगले वर्ष विशेष श्रद्धांजलि देने का फैसला लिया।

परिवार ने अंतिम संस्कार में कलाकारों को आमंत्रित किया। हजारों लोग पहुंचे। अमरेश का पार्थिव शरीर रामलीला मंच पर रखा गया। वहां संवाद दोहराए गए। भावुक दृश्य देखने लायक था। डॉक्टरों ने बताया कि हार्ट अटैक अचानक आया। पहले कोई लक्षण नहीं थे। अमरेश सुबह ही रिहर्सल में थे। दोपहर को आराम किया। शाम को मंच पर चले गए। उनकी फिटनेस अच्छी थी। लेकिन उम्र का असर। विशेषज्ञ कहते हैं कि तनाव और थकान से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। रामलीला जैसे आयोजनों में कलाकार घंटों खड़े रहते। जल्दबाजी में भोजन। इन पर ध्यान देना जरूरी। हिमाचल सरकार ने सांस्कृतिक कलाकारों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की है। लेकिन जागरूकता की कमी है।

चंबा शहर छोटा लेकिन समृद्ध है। यहां हिमाचली संस्कृति जीवंत है। रामलीला न केवल मनोरंजन, बल्कि नैतिक शिक्षा का साधन है। अमरेश जैसे कलाकारों ने इसे जीवित रखा। उनकी मौत ने युवाओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। जीवन छोटा है, लेकिन योगदान अमर। सोशल मीडिया पर वीडियो को करोड़ों व्यूज मिल चुके। लोग साझा कर रहे। एक वायरल पोस्ट में लिखा गया कि दशरथ बनकर प्रजा के लिए प्राण न्योछावर करने का संवाद पूरा होते ही ईश्वर ने उन्हें स्वीकार कर लिया। यह दैवीय लीला ही है। स्थानीय अखबारों ने प्रमुखता से छापा। टीवी चैनलों पर बहस हुई। सांस्कृतिक मंत्रालय ने भी नोटिस लिया।

परिवार को सरकारी सहायता मिलेगी। रामलीला क्लब ने आर्थिक मदद का ऐलान किया। अमरेश के बेटे ने कहा कि पिता की विरासत जारी रखेंगे। वे भी मंच पर उतरेंगे। यह घटना सकारात्मक संदेश दे रही। जीवन में भक्ति और सेवा महत्वपूर्ण। अमरेश महाजन का नाम चंबा के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। रामलीला जारी रही। लेकिन हर संवाद में अमरेश की याद। दर्शक आंसू पोछते। कलाकार भावुक। यह शोक ही नहीं, प्रेरणा का क्षण था। हिमाचल की रामलीला परंपरा अमरेश जैसे योद्धाओं पर टिकी है। उनकी आत्मा को शांति मिले।

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