'पिता फौजी, बेटा भी फौजी, फिर भी गोली मार दी', लद्दाख हिंसा में रिटायर्ड जवान की मौत पर न्यायिक जांच की मांग के साथ राहुल गांधी का बीजेपी पर तीखा हमला

राहुल गांधी ने 28 सितंबर को पहली बार लद्दाख हिंसा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि लद्दाख के अद्भुत लोग, संस्कृति और परंपराएं बीजेपी और आरएसएस के हमले के शिकार हैं। लद्दाखियों

Oct 1, 2025 - 13:21
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'पिता फौजी, बेटा भी फौजी, फिर भी गोली मार दी', लद्दाख हिंसा में रिटायर्ड जवान की मौत पर न्यायिक जांच की मांग के साथ राहुल गांधी का बीजेपी पर तीखा हमला
'पिता फौजी, बेटा भी फौजी, फिर भी गोली मार दी', लद्दाख हिंसा में रिटायर्ड जवान की मौत पर न्यायिक जांच की मांग के साथ राहुल गांधी का बीजेपी पर तीखा हमला

लद्दाख में हाल की हिंसा ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। 24 सितंबर 2025 को शुरू हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। इनमें से एक थे रिटायर्ड आर्मी जवान त्सेवांग थारचिन, जो कारगिल युद्ध के वीर सिपाही थे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर बीजेपी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि थारचिन के पिता भी फौज में थे, बेटा भी फौज में था, देशभक्ति उनकी रगों में दौड़ती थी, फिर भी बीजेपी सरकार ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। यह सिर्फ इसलिए क्योंकि वे लद्दाख के अधिकारों के लिए खड़े हुए। गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विश्वासघात का आरोप लगाया और चारों मौतों की न्यायिक जांच की मांग की। यह बयान 30 सितंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कांग्रेस ने इसे केंद्र की दमनकारी नीतियों का प्रतीक बताया, जबकि बीजेपी ने हिंसा को विपक्ष की साजिश करार दिया। लद्दाख में छठी अनुसूची और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर यह विवाद तेज हो गया है।

घटना की शुरुआत 24 सितंबर को हुई जब लेह एपेक्स बॉडी ने राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर हड़ताल बुलाई। प्रदर्शनकारी लेह के मुख्य बाजार में इकट्ठा हुए। लेकिन बातचीत आगे न बढ़ने पर स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय बीजेपी कार्यालय में आग लगा दी और कुछ वाहनों पर हमला किया। सुरक्षाबलों ने जवाब में लाठीचार्ज और गोलीबारी की। नतीजा? चार मौतें और नब्बे से ज्यादा घायल। मृतकों में त्सेवांग थारचिन शामिल थे, जो 1999 के कारगिल युद्ध में लड़े थे। वे रिटायरमेंट के बाद भी लद्दाख के मुद्दों पर सक्रिय थे। थारचिन का परिवार कहता है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल हुए थे। लेकिन पुलिस का दावा है कि भीड़ उग्र हो गई थी और पत्थरबाजी हो रही थी। लेह के डीजीपी एसडी सिंह जमवाल ने कहा कि गोलीबारी आत्मरक्षा में की गई ताकि बड़ा हादसा न हो। लेकिन गांधी ने इसे सरकारी दमन बताया।

राहुल गांधी ने 28 सितंबर को पहली बार लद्दाख हिंसा पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि लद्दाख के अद्भुत लोग, संस्कृति और परंपराएं बीजेपी और आरएसएस के हमले के शिकार हैं। लद्दाखियों ने आवाज मांगी, बीजेपी ने चार युवाओं की हत्या कर दी और सोनम वांगचुक को जेल में डाल दिया। वे बोले, हत्या बंद करो, हिंसा बंद करो, धमकी बंद करो। लद्दाख को आवाज दो, छठी अनुसूची दो। 30 सितंबर को उन्होंने थारचिन के पिता का वीडियो शेयर किया। वीडियो में बुजुर्ग कहते हैं कि बेटा फौज का जवान था, पिता भी था, फिर भी सरकार ने मार दिया। गांधी ने लिखा, पिता फौज में, बेटा फौज में, देशभक्ति उनकी रगों में बहती थी। फिर भी बीजेपी सरकार ने देश के वीर बेटे को गोली मारकर हत्या कर दी, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो लद्दाख और अपने अधिकारों के लिए खड़ा था। उन्होंने पीएम मोदी से कहा, आपने लद्दाख के लोगों को धोखा दिया। वे अपने अधिकार मांग रहे हैं, उनसे बात करो, हिंसा और डर की राजनीति बंद करो।

गांधी ने चारों मौतों की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की। कहा कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि लद्दाख में हुई इन हत्याओं की निष्पक्ष न्यायिक जांच हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार ने 2019 में जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटकर लद्दाख के लोगों के अधिकार छीन लिए। छठी अनुसूची आदिवासी क्षेत्रों को विशेष सुरक्षा देती है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में लागू है। लद्दाख के लोग जमीन, नौकरी और पर्यावरण की रक्षा के लिए इसे चाहते हैं। गांधी ने कहा कि सरकार बातचीत से भाग रही है। उन्होंने सोनम वांगचुक का भी बचाव किया, जो जलवायु कार्यकर्ता हैं और 10 सितंबर से भूख हड़ताल पर थे। वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। गृह मंत्रालय ने कहा कि उनकी नेपाली आंदोलन और अरब स्प्रिंग का जिक्र भड़काऊ था। लेकिन गांधी ने इसे दमन बताया।

लद्दाख में हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू लगा दिया गया। 27 सितंबर को चार घंटे की ढील दी गई, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने सुरक्षा समीक्षा बैठकें कीं। 28 सितंबर को कर्फ्यू पांचवें दिन भी जारी रहा। केंद्र सरकार ने लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस से बातचीत का प्रस्ताव दिया, लेकिन बॉडी ने शांति बहाल होने तक इनकार कर दिया। डीजीपी जमवाल ने कहा कि पाकिस्तान के एक खुफिया अधिकारी का वांगचुक से संपर्क था, लेकिन कोई सबूत नहीं दिया। बीजेपी ने हिंसा को विपक्ष की साजिश बताया। बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कहा कि काउंसलर स्टैंजिन त्सेपांग, जो राहुल गांधी के साथ हैं, ने भीड़ को उकसाया। उन्होंने वीडियो जारी किया जिसमें त्सेपांग को बीजेपी कार्यालय की ओर जाते दिखाया। बीजेपी का कहना है कि यह जनरल जेड क्रांति नहीं, राजनीतिक साजिश है।

कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। पार्टी का कहना है कि लद्दाख के लोग सालों से मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अनसुना किया। राहुल गांधी दक्षिण अमेरिका के चार देशों के दौरे पर थे, फिर भी उन्होंने लगातार पोस्ट किए। उन्होंने कहा कि मोदी जी ने लद्दाख को धोखा दिया। वे अपने अधिकार चाहते हैं, उनसे संवाद करो। विपक्षी दलों ने समर्थन दिया। आरजेडी और अन्य ने कहा कि केंद्र की नीतियां जनविरोधी हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। समर्थक गांधी की तारीफ कर रहे, जबकि आलोचक कहते हैं कि वे राजनीति कर रहे। थारचिन के परिवार ने न्याय की मांग की। वे कहते हैं कि बेटा शांतिपूर्ण था, गोली क्यों चली। लेह में बीजेपी कार्यालय जलने से राजनीतिक तनाव बढ़ा।

लद्दाख 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बना। तब से स्थानीय मांगें बढ़ीं। आबादी तीन लाख है, ज्यादातर बौद्ध और मुस्लिम। चीन और पाकिस्तान से सीमा होने से सुरक्षा मुद्दे हैं। पर्यटन और सेना पर निर्भर अर्थव्यवस्था। युवा बेरोजगारी से नाराज। लेह बौद्ध एसोसिएशन के चेयरमैन छेरिंग दोर्जे ने कहा कि युवा हिंसा के खिलाफ हैं, शांति से समाधान चाहिए। केंद्र ने हाई पावर्ड कमिटी बनाई, लेकिन बातचीत रुकी। अगर शांति बनी, तो चर्चा आगे बढ़ सकती। सर्दी नजदीक है, सड़कें बंद हो सकतीं। जल्द सामान्यता जरूरी।

कुल मिलाकर, राहुल गांधी का यह बयान लद्दाख विवाद को राष्ट्रीय मुद्दा बना रहा। पिता-बेटे के फौजी होने का जिक्र भावुक कर गया। बीजेपी पर गोली चलाने का आरोप गंभीर है। न्यायिक जांच से सच्चाई सामने आएगी। सरकार को बातचीत करनी चाहिए। लद्दाख के लोग अधिकार चाहते हैं, हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा। उम्मीद है कि शांति बनेगी और मांगें सुनी जाएंगी।

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