गुरुग्राम का 'गैस एटीएम': अब 24 घंटे उपलब्ध होगा सिलेंडर, सोहना की फ्लावर वैली में देश की पहली हाई-टेक सुविधा शुरू
इस एटीएम के माध्यम से मिलने वाले सिलेंडर पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों से काफी अलग और आधुनिक हैं। मशीन से 'कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर' वितरित किए जाते हैं, जो फाइबर ग्लास तकनीक से बने होते हैं। जहां एक सामान्य लोहे का सिलेंडर गैस भरने के
- सिलेंडर के लिए अब नहीं करना होगा डिलीवरी बॉय का इंतजार: भारत गैस ने सोहना में स्थापित किया आधुनिक 'इंस्टा एलपीजी' वेंडिंग मशीन
- मिनटों में मिलेगा भरा हुआ सिलेंडर: गुरुग्राम के निवासियों के लिए राहत की खबर, जानिए कैसे काम करता है देश का पहला एलपीजी एटीएम
देश की साइबर सिटी गुरुग्राम ने एक बार फिर तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में बाजी मार ली है। गुरुग्राम के सोहना स्थित सेक्टर-33 की 'सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली' सोसाइटी में उत्तर भारत का पहला और देश का अत्याधुनिक 'एलपीजी एटीएम' स्थापित किया गया है। भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की इस अनूठी पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं को पारंपरिक गैस डिलीवरी प्रणाली की झंझटों से मुक्ति दिलाना है। अब निवासियों को अपने सिलेंडर के खत्म होने पर गैस एजेंसी के खुलने या डिलीवरी बॉय के आने का घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह 'गैस एटीएम' एक ऐसी स्मार्ट वेंडिंग मशीन है जो 24 घंटे सक्रिय रहती है, जिससे कामकाजी परिवारों और आपातकालीन स्थिति में गैस की जरूरत पड़ने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है।
इस 'भारतगैस इंस्टा एलपीजी' मशीन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूरी तरह से स्वचालित (ऑटोमेटेड) और संपर्क रहित (कॉन्टैक्टलेस) होना है। सोहना के धूनेला स्थित इस सोसाइटी में रहने वाले लोग अब महज 2 से 3 मिनट के भीतर अपना खाली सिलेंडर जमा कर भरा हुआ नया सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है जो सुबह जल्दी ऑफिस निकल जाते हैं या देर रात घर लौटते हैं, क्योंकि अब वे अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी समय सिलेंडर ले सकते हैं। इस मशीन को लगाने के बाद अब उपभोक्ताओं को बुकिंग के बाद होने वाली देरी और सप्लाई चेन की बाधाओं से भी सुरक्षा मिल गई है।
इस एटीएम के माध्यम से मिलने वाले सिलेंडर पारंपरिक लोहे के सिलेंडरों से काफी अलग और आधुनिक हैं। मशीन से 'कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर' वितरित किए जाते हैं, जो फाइबर ग्लास तकनीक से बने होते हैं। जहां एक सामान्य लोहे का सिलेंडर गैस भरने के बाद लगभग 31 किलोग्राम का होता है, वहीं यह कंपोजिट सिलेंडर महज 15 से 16 किलोग्राम का होता है। हल्का होने के कारण इसे उठाना और ले जाना काफी आसान है। इसके अलावा, इन सिलेंडरों की बॉडी पारदर्शी (ट्रांसपेरेंट) होती है, जिससे उपभोक्ता बाहर से ही देख सकते हैं कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है। यह पारदर्शिता गैस चोरी या कम गैस मिलने की शिकायतों को पूरी तरह खत्म कर देती है। एलपीजी एटीएम का उपयोग करना बेहद आसान है। सबसे पहले मशीन पर अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर दर्ज करें और प्राप्त ओटीपी से उसे सत्यापित करें। इसके बाद अपने पास मौजूद खाली कंपोजिट सिलेंडर के क्यूआर कोड या बारकोड को मशीन के पास स्कैन करें। भुगतान की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है, जिसे यूपीआई या डेबिट कार्ड के जरिए पूरा किया जा सकता है। प्रक्रिया पूरी होते ही मशीन भरा हुआ सिलेंडर बाहर निकाल देती है और खाली सिलेंडर को सुरक्षित अंदर रख लेती है।
यह पायलट प्रोजेक्ट वर्तमान में भोंडसी स्थित भारत गैस एजेंसी के साथ मिलकर चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस एटीएम मशीन में एक समय में 10 सिलेंडरों को स्टोर करने की क्षमता है। मशीन के भीतर एक स्मार्ट सेंसर सिस्टम लगा हुआ है, जो स्टॉक पर नजर रखता है। जैसे ही मशीन में भरे हुए सिलेंडरों की संख्या दो तक पहुंचती है, यह सिस्टम स्वचालित रूप से नजदीकी गैस एजेंसी को अलर्ट भेज देता है। इसके बाद एजेंसी के कर्मचारी तुरंत आकर मशीन को फिर से रिफिल कर देते हैं। इस सुचारू प्रणाली के कारण मशीन में सिलेंडरों की कमी होने की संभावना न के बराबर रहती है, जिससे उपभोक्ताओं को निरंतर सेवा मिलती रहती है।
सुरक्षा के लिहाज से भी यह तकनीक काफी उन्नत मानी जा रही है। कंपोजिट सिलेंडर जंग प्रतिरोधी होते हैं और लोहे के सिलेंडरों की तुलना में अधिक सुरक्षित माने जाते हैं क्योंकि इनमें ब्लास्ट होने का खतरा न्यूनतम होता है। गुरुग्राम के इस सफल प्रयोग के बाद अब बीपीसीएल अन्य बड़े शहरों और घनी आबादी वाली रेजिडेंशियल सोसाइटीज में भी ऐसे 'गैस एटीएम' लगाने की योजना बना रहा है। यह पहल न केवल डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करती है, बल्कि रसोई गैस वितरण के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की ओर भी संकेत करती है। हालांकि, शुरुआत में इसके बारे में लोगों में जागरूकता कम थी, लेकिन धीरे-धीरे इसके फायदों को देखते हुए उपयोगकर्ताओं की संख्या में इजाफा हो रहा है।
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