Hardoi : धोबिया तपोवन आश्रम के प्राकृतिक जलस्रोत का संरक्षण शुरू, पांडवों ने अज्ञातवास के समय यहां कुछ दिन बिताये थे
सुशील सीतापुरी ने कहा कि धोबिया गांव के प्राकृतिक जलस्रोत गोमती नदी को साल भर पानी देते हैं इसलिए इनका संरक्षण बहुत जरूरी है। ये औषधीय गुणों से भरे दो जलस्रोत हैं और इनके संरक्षण का
हरदोई के धोबिया गांव में तपोवन सिद्ध आश्रम के क्षतिग्रस्त प्राकृतिक जलस्रोत के संरक्षण और सौंदर्यीकरण का काम शुरू हुआ। गोमती नदी की सांस्कृतिक विरासत इकट्ठा कर रहे सुशील सीतापुरी ने मां भगवती दश महाविद्या शक्ति पीठाधीश्वर स्वामी नारायणानन्द की मौजूदगी में पूजा-अर्चना कर निर्माण कार्य की शुरुआत की।
पिहानी इलाके के पंडरवा किला गांव में जन्मे सुशील सीतापुरी पिछले पांच साल से 'मैं तुम्हारी गोमती हूं' अभियान चला रहे हैं। लखीमपुर-खीरी के चपरतला गांव की सेवा सदन संस्था के तहत चल रहे इस अभियान में गोमती नदी के घाटों, मंदिरों, मेलों, परंपराओं और आसपास के गांवों के जीवन का सर्वेक्षण और संकलन किया जा रहा है।
सुशील सीतापुरी ने कहा कि धोबिया गांव के प्राकृतिक जलस्रोत गोमती नदी को साल भर पानी देते हैं इसलिए इनका संरक्षण बहुत जरूरी है। ये औषधीय गुणों से भरे दो जलस्रोत हैं और इनके संरक्षण का यह कार्य उनके मित्रों और शुभचिंतकों की मदद से हो रहा है।
पीलीभीत के माधोटांडा के पास गोमती उद्गम स्थल से दिसंबर 2020 में शुरू हुए इस अभियान में सुशील सीतापुरी अब तक लगभग तीन सौ किलोमीटर की गोमती यात्रा पूरी कर चुके हैं। फिलहाल उनका ठिकाना हरदोई की अतरौली तहसील में गोमती तट पर स्थित गोमती मठ है।
धोबिया को लेकर लोक मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के समय यहां कुछ दिन बिताये थे। प्यास लगने पर अर्जुन ने बाण चलाकर धरती से जलस्रोत निकाला था। इसी से इन जलस्रोतों का सिलसिला जुड़ा है। जनश्रुति के अनुसार महाभारत काल के संत और पांडवों के कुल पुरोहित धौम्य ऋषि की तपोभूमि रही यह जगह पहले धौम्या कहलाती थी जो बाद में धोबिया हो गई। आश्रम में लगे शिलापट्ट पर भी इसका जिक्र है।
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