Hardoi : शहरी क्षेत्र सहित 15 ब्लाक में 10-28 अगस्त तक चलेगा आईडीए अभियान, घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को खिलाई जाएगी फ़ाइलेरिया रोधी दवा
बैठक में नोडल अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र ने अवगत कराया कि अभियान के तहत एक साल से कम आयु के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी से पीड़ित को छोड़कर सभी
Hardoi : राष्ट्रीय फ़ाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शहरी क्षेत्र सहित कुल 15 ब्लॉक अहिरौरी, बावन, भरखनी, भरावन, बिलग्राम, हरियावां, हरपालपुर, कोथावां, माधोगंज, शहरी क्षेत्र, मल्लावां,पिहानी सांडी, संडीला, टोडरपुर और टड़ियावां में 10 से 28 अगस्त तक सर्वजन सेवन(आईडीए) अभियान चलेगा जिसके तहत आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर योग्य लाभार्थियों को फाइलेरियारोधी दवा आईवरमेक्टिन, डाईइथाईलकार्बामजीन और एल्बेंडाजोल खिलाएँगी। इसी क्रम में जिला समन्वय समिति की पहली बैठक बुधवार को जिलाधिकारी अनुनय झा की अध्यक्षता में विवेकानंद सभागार, कलेक्ट्रेट में आहूत हुयी।
जिला अधिकारी ने सभी को अभियान को सफल बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि अभियान के तहत शत प्रतिशत जनसंख्या को फ़ाइलेरियारोधी दवा खिलाना सुनिश्चित करें। अभियान का माइक्रोप्लान समय से तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान को लेकर व्यापक प्रचार प्रसार करें, स्कूलों में पोस्टर बनाने, स्लोगन प्रतियोगिता और प्रार्थना सभा में इस अभियान के बारे में बताया जाये।
बैठक में नोडल अधिकारी डॉ. सुरेन्द्र ने अवगत कराया कि अभियान के तहत एक साल से कम आयु के बच्चों, गर्भवती और गंभीर बीमारी से पीड़ित को छोड़कर सभी को दवा का सेवन करना है। एक से दो साल के कम आयु के बच्चों को एल्बेंडाजोल की आधी गोली पीसकर खिलाई जाएगी जबकि एक साल से उपर के बच्चों और वयस्कों को भी पीसकर या चबाकर ही खानी है। आईवरमेक्टिन लम्बाई के अनुसार खिलाई जाएगी। दवा खाली पेट नहीं खिलाई जाएगी।नोडल अधिकारी ने कह कि लोगों को बताएं कि मच्छर के काटने से यह बीमारी होती है जो कि लाइलाज है। इस बीमारी से बचने का उपाय फ़ाइलेरियारोधी दवा का सेवन करना है और मच्छरों के काटने से बचना है।
आईडीए अभियान के तहत लगातार तीन साल तक दवा का सेवन कर बीमारी से बचा जा सकता है। कुछ लोगों को दवा सेवन के बाद चक्कर आना, जी मितलाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके बारे में पहले से ही समुदाय को अवगत कराएँ कि यह समस्या नहीं है बल्कि यह शुभ संकेत हैं क्योंकि यह उन्हीं व्यक्तियों में दिखाई देते हैं जिनके शरीर में माइक्रोफ़ाइलेरिया या कृमि होते हैं। फ़ाइलेरियारोधी दवा खाने से इन माइक्रोफ़ाइलेरिया के मरने से यह लक्षण सामने आते हैं। इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी , जिला मलेरिया अधिकारी , सहयोगी विभाग पंचायती राज, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, कृषि इत्यादि विभागों के प्रतिनिधि, सम्बन्धित सीएचसी के अधीक्षक व सहयोगी संस्थाओ विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च(सीफॉर), पाथ और प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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