दुमका में बसंत सोरेन ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलने पर केंद्र सरकार का जताया आभार, भारत रत्न की मांग भी की

कार्यक्रम में चौकीदार नियुक्ति पत्र वितरण के अलावा अन्य स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई लेकिन मुख्य फोकस शिबू सोरेन को मिले सम्मान पर रहा। बसंत सोरेन ने कहा कि य

Jan 26, 2026 - 23:47
 0  56
दुमका में बसंत सोरेन ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलने पर केंद्र सरकार का जताया आभार, भारत रत्न की मांग भी की
दुमका में बसंत सोरेन ने शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण मिलने पर केंद्र सरकार का जताया आभार, भारत रत्न की मांग भी की
  • शिबू सोरेन को पद्म भूषण: दुमका विधायक बसंत सोरेन ने चौकीदार नियुक्ति समारोह में कही बड़ी बात, पहले मिलना चाहिए था सम्मान
  • झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान: बसंत सोरेन ने केंद्र से की भारत रत्न देने की मांग, आदिवासी योगदान पर जोर

दुमका जिले के समाहरणालय में आयोजित एक कार्यक्रम में दुमका विधायक बसंत सोरेन ने अपने पिता तथा झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की केंद्र सरकार की घोषणा पर आभार व्यक्त किया। यह कार्यक्रम चौकीदारों के नियुक्ति पत्र वितरण के लिए आयोजित किया गया था जिसमें बसंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन को यह सम्मान बहुत पहले मिल जाना चाहिए था। बसंत सोरेन ने इस अवसर पर शिबू सोरेन के लंबे संघर्ष और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए किए गए योगदान का जिक्र किया तथा केंद्र सरकार से मांग की कि उनके पिता के योगदान को देखते हुए अब उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित करने पर विचार किया जाना चाहिए। यह घोषणा पद्म पुरस्कारों की सूची में शामिल होने के संदर्भ में की गई है जिसमें शिबू सोरेन को सार्वजनिक कार्यों के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म भूषण प्रदान करने का ऐलान किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान बसंत सोरेन ने समाहरणालय परिसर में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए शिबू सोरेन के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शिबू सोरेन ने आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया और झारखंड राज्य के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बसंत सोरेन ने कहा कि उनके पिता को दिशोम गुरु की उपाधि आदिवासी समाज द्वारा दी गई है जिसका अर्थ देश का नेता होता है। उन्होंने केंद्र सरकार के इस फैसले को सराहा और कहा कि यह निर्णय आदिवासी समुदाय के लिए गर्व की बात है। साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि शिबू सोरेन के योगदान को देखते हुए पद्म भूषण के बाद अब भारत रत्न जैसे उच्चतम सम्मान पर भी विचार होना चाहिए ताकि उनके संघर्ष को पूरा सम्मान मिल सके।

यह पद्म भूषण सम्मान पद्म पुरस्कारों की 2026 की सूची का हिस्सा है जिसमें कुल कई पुरस्कार विभिन्न क्षेत्रों में योगदान के लिए घोषित किए गए हैं। शिबू सोरेन को यह सम्मान सार्वजनिक कार्यों में उनके योगदान के लिए प्रदान किया जा रहा है। बसंत सोरेन ने कार्यक्रम में मौजूद नवनियुक्त चौकीदारों को नियुक्ति पत्र वितरित किए और इस मौके पर स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की भी उपस्थिति रही। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के लिए महत्वपूर्ण है। बसंत सोरेन ने केंद्र सरकार का धन्यवाद देते हुए कहा कि इस निर्णय से शिबू सोरेन के कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है।

बसंत सोरेन ने अपने संबोधन में शिबू सोरेन के जीवन के विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया जिसमें आदिवासी अधिकारों की लड़ाई और झारखंड आंदोलन शामिल हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा आदिवासी समाज के हितों को प्राथमिकता दी और इसके लिए कई चुनौतियों का सामना किया। बसंत सोरेन ने इस बात पर जोर दिया कि पद्म भूषण सम्मान बहुत पहले मिलना चाहिए था क्योंकि शिबू सोरेन के योगदान को देखते हुए यह उचित है। उन्होंने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार उनके पिता के कार्यों को भारत रत्न से सम्मानित करे ताकि आदिवासी समाज के संघर्ष को और अधिक मान्यता मिल सके। कार्यक्रम में चौकीदार नियुक्ति पत्र वितरण के अलावा अन्य स्थानीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई लेकिन मुख्य फोकस शिबू सोरेन को मिले सम्मान पर रहा। बसंत सोरेन ने कहा कि यह सम्मान आदिवासी उत्थान और उनके लंबे संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि शिबू सोरेन के योगदान को देखते हुए भारत रत्न पर विचार किया जाए। बसंत सोरेन ने कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में भी यही बात दोहराई कि पद्म भूषण से खुशी है लेकिन भारत रत्न उनके पिता के लिए उपयुक्त होगा।

शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक थे और उन्होंने राज्य के गठन में अहम भूमिका निभाई थी। बसंत सोरेन ने कहा कि उनके पिता को दिशोम गुरु कहा जाता है और यह उपाधि उनके नेतृत्व का प्रमाण है। उन्होंने केंद्र सरकार के फैसले पर आभार जताते हुए कहा कि यह आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा है। बसंत सोरेन ने मांग की कि अब भारत रत्न जैसे सम्मान पर विचार हो ताकि शिबू सोरेन के पूरे योगदान को सम्मान मिले। इस पूरे घटनाक्रम में बसंत सोरेन ने चौकीदार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए स्थानीय प्रशासन का भी सहयोग सराहा। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन का सम्मान पूरे झारखंड के लिए गौरव की बात है और यह आदिवासी समाज के संघर्ष को राष्ट्रीय मंच पर लाता है। बसंत सोरेन ने अंत में फिर से केंद्र सरकार से भारत रत्न पर विचार करने की अपील की।

Also Click : Mussoori: मसूरी में धूमधाम से मना 77वां गणतंत्र दिवस, पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने फहराया तिरंगा

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow