टोडरपुर पंचायत में लाखों की धनराशि गबन का खेल, बीडीओ की रिपोर्ट पर FIR, CE पर कार्रवाई नहीं। 

Hardoi: जनपद की टोडरपुर ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत में अंत्येष्टि स्थल, RRC सेंटर और पंचायत लर्निंग सेंटर के निर्माण के लिए लाखों रुपये जारी

Aug 26, 2025 - 13:59
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टोडरपुर पंचायत में लाखों की धनराशि गबन का खेल, बीडीओ की रिपोर्ट पर FIR, CE पर कार्रवाई नहीं। 
टोडरपुर पंचायत में लाखों की धनराशि गबन का खेल, बीडीओ की रिपोर्ट पर FIR, CE पर कार्रवाई नहीं। 

Hardoi: जनपद की टोडरपुर ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत में अंत्येष्टि स्थल, RRC सेंटर और पंचायत लर्निंग सेंटर के निर्माण के लिए लाखों रुपये जारी हुए, लेकिन मौके पर काम अधूरा मिला। खंड विकास अधिकारी के औचक निरीक्षण के बाद ग्राम प्रधान श्याम बाबू त्रिवेदी और ग्राम विकास अधिकारी कौशलेन्द्र राजपूत के खिलाफ बेहटा गोकुल थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, अंत्येष्टि स्थल के लिए 24 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, मगर छह माह बाद भी कार्य शुरू नहीं हुआ। RRC निर्माण में भी केवल नींव का काम ही किया गया। पंचायत लर्निंग सेंटर के लिए स्वीकृत 7 लाख रुपये में से 90 प्रतिशत खर्च दिखाया गया, जबकि भवन अधूरा और बंद मिला। न बिजली, न फर्नीचर, न स्मार्ट टीवी खरीदा गया। पंचायत भवन की हालत बेहद खराब पाई गई—दीवारें टूटी, शौचालय जर्जर और परिसर में जलभराव। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान और सचिव ने मिलीभगत कर योजनाओं की रकम हड़प ली।

खास बात यह है कि आरोपी प्रधान ब्लॉक प्रमुख का देवर और प्रतिनिधि है तथा प्रदेश सरकार की एक मंत्री का बेहद करीबी बताया जा रहा है। यही कारण है कि मामले में राजनीतिक दबाव भी देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अब रसूखदार लोग मामले को सुलटाने और अधूरे कार्य पूरे कराकर “एफआर” लगवाने की कोशिश कर रहे हैं।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ी चूक यह रही कि कंसलटेंट इंजीनियर, जिसने बिना काम देखे एमबी पास कर भुगतान रिलीज किया, उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। जबकि नियम के अनुसार C E की माप पुस्तिका (एमबी) के बाद ही भुगतान निकलता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि C E भी इस घोटाले में बराबर का दोषी है, लेकिन उसे एफआईआर से बाहर रखा गया। डीपीआरओ विनय कुमार सिंह से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने साफ कुछ कहने से मना कर दिया

अब सवाल यह है कि प्रशासन इस घोटाले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा या फिर मामला राजनीतिक दबाव में दबा दिया जाएगा।

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