Lucknow : ग्रामीण भारत को वाद-मुक्त बनाने की पहल, सामुदायिक मध्यस्थता पायलट परियोजना का शुभारंभ
अपने उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि पारिवारिक, पड़ोसी तथा भूमि से जुड़े स्थानीय विवादों का समाधान न्यायालयी प्रक्रिया के बजाय सामुदायिक संवाद के माध्यम से अधिक
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने किया सामुदायिक मध्यस्थता परियोजना का उद्घाटन
बागपत/लखनऊ : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बागपत के सहयोग से “सामुदायिक मध्यस्थता: वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर” शीर्षक पायलट परियोजना का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया। इस अवसर पर विभिन्न न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी, अधिवक्ता, मध्यस्थ, परा विधिक स्वयंसेवक तथा स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे दीवानी एवं पारिवारिक विवादों को न्यायालयों तक पहुँचने से पूर्व ही संवाद और आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाना है। परियोजना का केन्द्रीय विचार "वाद-मुक्त गाँव की अवधारणा को साकार करना है, जिसके अंतर्गत सामुदायिक स्तर पर प्रशिक्षित मध्यस्थों द्वारा विवादों का स्वैच्छिक एवं गोपनीय समाधान, मुकदमेबाजी में होने वाले आर्थिक, सामाजिक एवं समयगत नुकसान को कम करना, ग्राम स्तर पर सौहार्द, भाईचारा और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करना, न्याय तक समान एवं सुलभ पहुँच सुनिश्चित करना है।
अपने उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि पारिवारिक, पड़ोसी तथा भूमि से जुड़े स्थानीय विवादों का समाधान न्यायालयी प्रक्रिया के बजाय सामुदायिक संवाद के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के अंतर्गत मध्यस्थता को वैधानिक मान्यता प्राप्त है, जो गोपनीयता, निष्पक्षता और तटस्थता सुनिश्चित करते हुए भारत की पारंपरिक विवाद समाधान प्रणाली को आधुनिक स्वरूप प्रदान करती है।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत जनपद बागपत के छह गांवों को पायलट क्रियान्वयन हेतु चयनित किया गया है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण स्थानीय समुदाय के सम्मानित व्यक्तियों जैसे सेवानिवृत्त शिक्षक, बुजुर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं अन्य जनहितैषी नागरिकों की पहचान कर उन्हें मध्यस्थता का प्रशिक्षण देंगे। प्रशिक्षित मध्यस्थ औपचारिक न्याय प्रणाली और समाज के बीच सेतु का कार्य करते हुए संवाद आधारित समाधान को बढ़ावा देंगे।
कार्यक्रम में बताया गया कि इस पहल का दीर्घकालिक उद्देश्य सामाजिक रूप से सुदृढ़ ग्रामीण समुदायों का निर्माण करना है, जो प्रारंभिक स्तर पर ही विवादों का समाधान कर सकें। बागपत में प्रारंभ की गई यह पायलट परियोजना भविष्य में ग्रामीण भारत में व्यापक स्तर पर लागू किए जाने हेतु एक मॉडल के रूप में विकसित की जाएगी।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव डॉ. मनु कलिया ने जनसामान्य से अपील करते हुए कहा कि ग्रामीण नागरिक इस अभियान से सक्रिय रूप से जुड़ें और छोटे-छोटे विवादों को न्यायालय तक ले जाने के बजाय सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से आपसी सहमति से सुलझाएं।
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