MP News: मध्यप्रदेश वन विकास निगम बैतूल डिवीजन का कारनामा- गबन मामले में आरोपी फरार, फिर भी ड्यूटी पर, तनख्वाह भी ले रहा। 

बैतूल जिले में वन विभाग के नए नए मामले सामने आ रहे है जहां एक ओर तो रेगुलर वाले ताबड़तोड़ कार्यवाही को अंजाम दे...

Jun 20, 2025 - 17:13
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MP News: मध्यप्रदेश वन विकास निगम बैतूल डिवीजन का कारनामा- गबन मामले में आरोपी फरार, फिर भी ड्यूटी पर, तनख्वाह भी ले रहा। 
रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में वन विभाग के नए नए मामले सामने आ रहे है जहां एक ओर तो रेगुलर वाले ताबड़तोड़ कार्यवाही को अंजाम दे रहे है वही निगम के जंगलों के तो भगवान ही मालिक है ताजा मामला मध्यप्रदेश वन राज्य निगम की परियोजना रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल से सामने आया जहाँ  वन सुरक्षा समिति में लाखों रुपयों का गबन का मामला सामने आने के बाद विभागीय जांच के बाद दो लोगों पर एफआईआर करवाई गई।

बता दें कि वर्ष 2022-23 में आवरिया और काजली समितियों में विकास और बोनस राशि के 72 लाख रुपये रेंजर और नाकेदार ने मिलकर बंदरबांट करके हजम कर ली गई जिसमें शिकायत होने के बाद लंबे समय तक जांच के नाम पर मामले को खींच तान करके आरजीएम के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार रेंजर और नाकेदार पर एफआईआर बिजादेही थाने में करवाई गई थी  लगभग 6 माह बीतने के बाद रेंजर की गिरफ्तारी तो हो गई पर पुलिस रिकॉर्ड में नाकेदार अब तक फरार बताया जा रहा है जबकि वह अपने काम पर वापस आ गया बहाली के बाद ड्यूटी कर रहा है और विभाग से उसकी तनख्वाह भी निकल रही है इस पूरे मामले से एक बात तो स्पष्ट है कि पूरे भृष्टाचार में निगम के बैतूल डिवीज़न के अधिकारी ही संरक्षण देने में लगे हुए सवाल यह है कि विभाग के जिम्मदारों द्वारा ही एफआईआर करवाई गई तो फिर बहाल होने आए नाकेदार की सूचना पुलिस को क्यों नही दी जा रही है और गबन के मामले के आरोपी को विभाग तनख्वाह भी दे रहा है ।इस मामले में बिजादेही टीआई से बात की गई।

तो उनका कहना है कि पुलिस रिकॉर्ड में आरोपी अभी फरार है और विभाग द्वारा उन्हें कोई सूचना डिवीज़न से नही दी गई है । यहाँ आपको यह भी बता दें कि हमारे द्वारा  भृष्टाचार के मामले लगातार उठाये जाने के बाद संभागीय प्रबंधक को भी हटा दिया गया और ट्रांसफर कर दिया गया पर अब  सवाल यह  उठ रहा है कि क्या जिम्मदारों को हटाने से मामले में कार्यवाही होना मान लिया जाए चूंकि निगम का इतिहास रहा है कि जब जब भृष्टाचार के मामले सामने आए जिम्मेदार को हटाकर क्लीन चिट दे दी जाती है और मामले में लीपापोती कर ख़त्म कर दिया जाता है क्या विभाग के जिम्मेदार एमडी और आरजीएम  खुद मौके पर जाकर जांच करेंगे या एसी चेम्बर में बैठकर ट्रांसफर ट्रांसफर खेलकर दोषियों को बचाते रहेंगे। अब  देखनी वाली बात  होगी कि इस  भृष्टाचार के मामले में मध्यप्रदेश सरकार संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करवाएगी  या कुम्भकर्णीय नींद में सोई रहेगी।

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