हरदोई मेडिकल कॉलेज में चमत्कार- डॉक्टरों ने मुफ्त सर्जरी से गले से निकाला 800 ग्राम का विशाल थायरॉइड ट्यूमर, मिली नई जिंदगी
डॉ. विवेक सिंह ने मनीषा की जांच की और तुरंत सर्जरी का फैसला लिया। परिजनों को पूरी प्रक्रिया समझाई गई। सर्जरी शनिवार को सुबह 10 बजे शुरू हुई और दोपहर 1:30
हरदोई। उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में स्वशासी राज्य मेडिकल कॉलेज ने एक बार फिर अपनी चिकित्सा क्षमता का लोहा मनवा लिया है। विकासखंड हरियावां के वेला कपूरपुर गांव की 35 वर्षीय महिला मनीषा मानसिंह को पिछले एक साल से थायरॉइड ग्रंथि में विकसित हो रहे ट्यूमर ने परेशान कर रखा था। शुरुआत में छोटी लगने वाली यह गांठ धीरे-धीरे इतनी बड़ी हो गई कि महिला को सांस लेने और भोजन निगलने में भारी कठिनाई होने लगी।
परिवार ने लखनऊ के कई सरकारी और निजी अस्पतालों का चक्कर लगाया, लेकिन हर जगह 2 से 2.5 लाख रुपये तक का खर्च बताकर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। आर्थिक तंगी के कारण परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया था।
लेकिन हरदोई मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर ईएनटी सर्जन डॉ. विवेक सिंह और उनकी टीम ने न केवल महिला की जान बचाई, बल्कि पूरा उपचार मुफ्त में पूरा कर परिवार को नया जीवन प्रदान किया। करीब तीन घंटे चली इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने गले से 16 सेंटीमीटर लंबा, 16 सेंटीमीटर चौड़ा और लगभग 800 ग्राम वजनी विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया।
मनीषा को समस्या की शुरुआत पिछले साल हुई थी। गांव में रहने वाली मनीषा एक गृहिणी हैं और उनके पति मान सिंह मजदूरी करते हैं। परिवार की मासिक आय मात्र 8 से 10 हजार रुपये है, जिससे दो बच्चों का पालन-पोषण और गुजारा चलाना भी मुश्किल होता है। थायरॉइड ट्यूमर की वजह से मनीषा का गला सूजने लगा। पहले तो उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से दवा ली, लेकिन गांठ का आकार बढ़ता ही गया। पिछले एक महीने में हालात इतने बिगड़ गए कि सांस लेना दर्दनाक हो गया। रातों को नींद नहीं आती, भोजन गले में अटक जाता।
परिवार ने पहले लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) का रुख किया, लेकिन वहां सर्जरी का खर्च 2.5 लाख बताया गया। फिर निजी अस्पतालों में भी यही हाल। निराश होकर वे हरदोई लौट रहे थे, तभी एक रिश्तेदार ने मेडिकल कॉलेज का सुझाव दिया। 10 नवंबर को मनीषा को कॉलेज में भर्ती किया गया।
मनीषा की बीमारी का सफर
मनीषा का इलाज एक साल से चल रहा था। थायरॉइड ट्यूमर, जिसे मेडिकल भाषा में थायरॉइड ग्रंथि का सिस्ट या नोड्यूल कहा जाता है, अक्सर आयोडीन की कमी या हार्मोनल असंतुलन से होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या आम है। मनीषा के मामले में ट्यूमर इतना फैल गया था कि यह श्वास नली को दबा रहा था। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से पता चला कि ट्यूमर गले से नीचे छाती तक पहुंच चुका था। डॉक्टरों ने कहा कि देरी से जान का खतरा था।
डॉ. विवेक सिंह ने मनीषा की जांच की और तुरंत सर्जरी का फैसला लिया। परिजनों को पूरी प्रक्रिया समझाई गई। सर्जरी शनिवार को सुबह 10 बजे शुरू हुई और दोपहर 1:30 बजे समाप्त हुई। टीम में डॉ. विवेक सिंह के अलावा एनेस्थेटिस्ट डॉ. अजय कुमार और नर्सिंग स्टाफ शामिल थे। सर्जरी के दौरान ट्यूमर को बिना किसी जटिलता के निकाला गया। यह थायरॉइड इंक्वायरी सर्जरी थी, जिसमें ग्रंथि का प्रभावित हिस्सा हटाया जाता है। ऑपरेशन थिएटर में सभी सावधानियां बरती गईं। सर्जरी के बाद मनीषा को आईसीयू में रखा गया, जहां उनकी हालत स्थिर रही। अब वे सामान्य वार्ड में हैं और कुछ दिनों में घर लौटेंगी। डॉ. सिंह ने बताया कि ट्यूमर बेनाइन था, लेकिन इसका आकार जानलेवा साबित हो सकता था।
सबसे बड़ी बात यह रही कि पूरा इलाज मुफ्त हुआ। मेडिकल कॉलेज की नीति के तहत गरीब मरीजों को निःशुल्क सुविधाएं दी जाती हैं। जांच, दवाएं, भोजन और सर्जरी सब कुछ सरकारी खर्च पर। परिवार ने कहा कि यह चमत्कार जैसा है। मान सिंह ने भावुक होकर कहा, "हमारे पास पैसे नहीं थे, लेकिन डॉक्टर साहब ने भगवान का काम किया।" इस सफलता की खबर फैलते ही पूरे जिले में सराहना हो रही है। स्थानीय लोग मेडिकल कॉलेज को अब विश्वास का केंद्र मान रहे हैं।
डॉ. विवेक सिंह का ये है कहना
"यह सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि ट्यूमर बहुत बड़ा था। लेकिन हमारी टीम ने मिलकर इसे सफल बनाया। सरकारी अस्पतालों का मकसद ही गरीबों की सेवा है। ऐसे केसों में देरी घातक साबित होती है। हम सभी मरीजों को सलाह देते हैं कि थायरॉइड की जांच समय पर कराएं।" - डॉ. विवेक सिंह, ईएनटी सर्जन, हरदोई मेडिकल कॉलेज।
हरदोई मेडिकल कॉलेज की स्थापना 2019 में हुई थी। यह उत्तर प्रदेश सरकार के तहत स्वशासी संस्थान है, जो 500 बेड का अस्पताल चलाता है। यहां ईएनटी, जनरल सर्जरी, मेडिसिन समेत कई विभाग हैं। डॉ. विवेक सिंह प्रोफेसर हैं और कई जटिल सर्जरी कर चुके हैं। मार्च 2025 में उन्होंने विश्व श्रवण दिवस पर शिविर आयोजित किया था, जहां कान-नाक-गले की समस्याओं पर जागरूकता फैलाई। कॉलेज में सालाना हजारों मरीज इलाज कराते हैं। इस घटना ने कॉलेज की प्रतिष्ठा और बढ़ा दी है। जिला मजिस्ट्रेट अनुनय झा ने भी निरीक्षण के दौरान कॉलेज की सुविधाओं की तारीफ की है।
इस सर्जरी से मनीषा को नई जिंदगी मिली। पहले वे चलने-फिरने में असमर्थ थीं, अब वे खुद खाना खा रही हैं। परिवार ने डॉक्टरों को फूलमाला पहनाकर धन्यवाद दिया। गांव में भी लोगों ने उत्सव सा मना लिया। यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती का उदाहरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि थायरॉइड ट्यूमर के शुरुआती लक्षण जैसे गले में सूजन, थकान और वजन बढ़ना नजरअंदाज न करें। हरदोई जैसे जिलों में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन जागरूकता अभी भी जरूरी है।
थायरॉइड ट्यूमर के बारे में
थायरॉइड ग्रंथि गर्दन में स्थित होती है, जो हार्मोन बनाती है। ट्यूमर इसके बढ़ने से होता है। ज्यादातर बेनाइन होते हैं, लेकिन बड़े होने पर सर्जरी जरूरी। भारत में 42 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। रोकथाम के लिए आयोडीन वाली चीजें लें और नियमित जांच कराएं। महिलाओं में यह ज्यादा आम है।
यह सफलता अन्य मरीजों के लिए प्रेरणा है। कई लोग अब निजी अस्पतालों के बजाय सरकारी केंद्रों पर भरोसा कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज ने कहा कि वे ऐसे और केसों के लिए तैयार हैं। परिवार की खुशी देखकर डॉक्टर भी गदगद हैं। यह कहानी दर्शाती है कि सही समय पर सही जगह पहुंचना जीवन बदल सकता है। हरदोई का यह चमत्कार पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
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