रेंजर दुर्गेश मालवीय का नया कारनामा: बांस प्लांटेशन में आग, पीओआर लंबित, फायर फंड और चौकीदार के नाम पर रिश्तेदारों के खातों में डाले गए पैसे।

MP News: मध्यप्रदेश के बैतूल में वन विभाग का कोई माई बाप ही नही बचा है यही कारण है जिन्हें जंगलो की सुरक्षा की कमान सौपी गई है वही जंगलों के विनाश...

By INA News Desk
Jul 16, 2025 - 16:37
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रेंजर दुर्गेश मालवीय का नया कारनामा: बांस प्लांटेशन में आग, पीओआर लंबित, फायर फंड और चौकीदार के नाम पर रिश्तेदारों के खातों में डाले गए पैसे।
रेंजर दुर्गेश मालवीय का नया कारनामा: बांस प्लांटेशन में आग, पीओआर लंबित, फायर फंड और चौकीदार के नाम पर रिश्तेदारों के खातों में डाले गए पैसे।
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रिपोर्ट- शशांक सोनकपुरिया, बैतूल मध्यप्रदेश

MP News: मध्यप्रदेश के बैतूल में वन विभाग का कोई माई बाप ही नही बचा है यही कारण है जिन्हें जंगलो की सुरक्षा की कमान सौपी गई है वही जंगलों के विनाश में सबसे महती भूमिका निभा रहे है जी हां हम बात कर रहे है मध्यप्रदेश वन राज्य निगम की परियोजना  रामपुर भतोड़ी परियोजना मण्डल बैतूल की जहाँ जिम्मदार ही जंगलों के तेजी से सफाया करवाने में अतिक्रमण कारियों के संरक्षक बन रहे है जिसका खामियाजा शासन को भुगतना होगा राजस्व बात तो बहुत दूर की हो गई यहाँ तो सरकार के द्वारा जो बजट दिया जाता है।

जिससे प्लान्टेशन करके शासन को एक अच्छा राजस्व मिल सके पर यहाँ तो एक डिप्टी  रेंजर के भृष्टाचार के रोज नए मामले सामने आ रहे है ताजा मामला रामपुर रेंज की भतोड़ी बीट से सामने आया है जहाँ पर गर्मियों के मौसम में लाइन जलाई का कार्य करवाया जाना था पर यहाँ लाइन जलाई का काम तो हुआ नही ऊपर से पैसे भी निकाल लिए गए डिप्टी रेंजर दुर्गेश मालवीय द्वारा वहीं सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आई है कि यहाँ बांस प्लान्टेशन में गर्मियों में आग लगी थी जिससे बड़ी मात्रा में बांस का सफाया हो गया सारे बांस जल गए इस घटना में कोई भी पीओआर न किया जाना निगम के जिम्मदारों की कार्यशैली पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा रहा है बैतूल में बैठे जिम्मदारों को ये जानकारी भी है या नही ये भी नही कहा जा सकता पर दमकल के नाम पर पैसा भी इसी डिप्टी द्वारा निकाला गया और चौकीदार को देने के नाम पर पैसा निकाला गया था।

जो कि अपने किसी रिश्तेदार के खाते में डालकर वह राशि भी डिप्टी रेंजर दुर्गेश मालवीय द्वारा हजम कर ली गई और सवाल यहाँ यह भी उठ रहा है कि कैसे एक भृष्टाचार में अव्वल डिप्टी को 3 रेंज के प्रभारी बना दिया गया जबकि इसके भृष्टाचार के मामले में निष्पक्ष जांच हो जाए तो लाखों के भृष्टाचार उजागर होने से इंकार नही किया जा सकता  जब इस मामले को लेकर संभागीय प्रबन्धक से उनका पक्ष जानने के लिए कॉल किया गया तो उनके द्वारा मीडिया के सवालों से बचने के लिए कॉल ही नही उठाया  खैर अब देखने वाली बात यह होगी कि इन मामलों में आरजीएम और एमडी द्वारा कब जांच करवाई जाती है और आरजीएम बैतूल भौरा नीलामी में आएंगे तो क्या स्वयं मौके पर जाकर देखेंगे या डिप्टी को इसी तरह संरक्षण देकर भृष्टाचार करने की खुल छूट दी जाएगी।

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