उत्तराखंड के मदरसों में शामिल होगी ‘ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor)’ और कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी की शौर्यगाथा, देशभक्ति को बढ़ावा देने की अनूठी पहल।

उत्तराखंड के मदरसों में अब भारतीय सेना के शौर्य और साहस की कहानियां पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगी। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड ने एक ऐतिहासिक...

May 25, 2025 - 19:17
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उत्तराखंड के मदरसों में शामिल होगी ‘ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor)’ और कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी की शौर्यगाथा, देशभक्ति को बढ़ावा देने की अनूठी पहल।

देहरादून: उत्तराखंड के मदरसों में अब भारतीय सेना के शौर्य और साहस की कहानियां पाठ्यक्रम का हिस्सा बनेंगी। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड ने एक ऐतिहासिक फैसले में ‘ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor)’ और इस ऑपरेशन की ब्रीफिंग देने वाली भारतीय सेना की कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी के योगदान को मदरसों के सिलेबस में शामिल करने का निर्णय लिया है। यह पहल 20 मई 2025 को घोषित की गई, जिसका उद्देश्य बच्चों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करना और भारतीय सेना के पराक्रम से उन्हें प्रेरित करना है। उत्तराखंड इस तरह का कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है, और इस निर्णय की देशभर में सराहना हो रही है।

  • ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor): पहलगाम का बदला

‘ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor)’ भारतीय सेना द्वारा 6-7 मई 2025 को अंजाम दिया गया एक सटीक और साहसिक सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेना था। इस हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की जान गई थी। भारतीय वायुसेना ने रात 1:05 बजे शुरू हुए इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दिया। राफेल फाइटर जेट्स द्वारा स्कैप मिसाइल और हैमर बम का उपयोग कर 25 मिनट में यह अभियान पूरा किया गया, जिसमें 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबर है। इस ऑपरेशन की जानकारी कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी, जिसने न केवल भारत, बल्कि वैश्विक मंच पर भी सुर्खियां बटोरीं।

ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) ने भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति को फिर से रेखांकित किया। कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी ने बताया कि इस अभियान में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें 2008 के मुंबई हमलों से जुड़ा मुरीदके का शिविर भी शामिल था। यह ऑपरेशन भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता और नारी शक्ति का प्रतीक बन गया।

  • मदरसों में पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय

उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी और वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस पहल की अगुवाई की। कासमी ने कहा, “हमारे सैन्य बलों के शौर्य की कहानी बच्चों को पढ़ाने से उनमें देशभक्ति का जज्बा बढ़ेगा। ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) एक ऐसी गाथा है, जो बच्चों को यह सिखाएगी कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कितना सख्त है।” शम्स ने जोड़ा, “कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी जैसी बेटियां मुस्लिम समुदाय, खासकर लड़कियों के लिए प्रेरणा हैं। हम चाहते हैं कि मदरसा से भी ऐसी बेटियां निकलें, जो देश का नाम रोशन करें।”

उत्तराखंड में 451 पंजीकृत मदरसा हैं, जहां करीब 50,000 बच्चे पढ़ते हैं। नए पाठ्यक्रम में ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) का एक अध्याय शामिल होगा, जिसमें इसके उद्देश्य, कार्यान्वयन, और परिणामों का वर्णन होगा। इसके लिए पाठ्यक्रम समिति की बैठक जल्द बुलाई जाएगी। साथ ही, कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी की उपलब्धियों को भी हाइलाइट किया जाएगा, ताकि बच्चे, खासकर लड़कियां, सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित हों।

  • कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी: नारी शक्ति का प्रतीक

कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी भारतीय सेना की सिग्नल कोर में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्होंने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। गुजरात के वडोदरा की रहने वाली सोफिया (Sofia) ने 1999 में चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त किया और लेफ्टिनेंट के रूप में सेना में शामिल हुईं। 2016 में वे पहली भारतीय महिला बनीं, जिन्होंने थाइलैंड में ‘Force 18’ अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास में भारत का नेतृत्व किया। उसी वर्ष, उन्होंने यूनाइटेड नेशंस पीस मिशन में पुरुष-प्रधान टुकड़ी की कमान संभाली।

सोफिया (Sofia) का परिवार भी सैन्य पृष्ठभूमि से है। उनके पिता और दादा सेना में सेवारत रहे, और उनकी दादी उन्हें 1857 के विद्रोह में झांसी की रानी की कहानियां सुनाया करती थीं। उनकी जुड़वां बहन शाइना ने कहा, “सोफिया (Sofia) को ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) की ब्रीफिंग देते देख लगा जैसे झांसी की रानी फिर जीवित हो गईं।” सोफिया (Sofia) की प्रेरणादायक कहानी मदरसा के बच्चों, खासकर लड़कियों, को यह विश्वास दिलाएगी कि वे भी देश सेवा में बड़ा योगदान दे सकती हैं।

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इस निर्णय का स्वागत कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने किया है, हालांकि कुछ ने सवाल भी उठाए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करण माहरा ने कहा, “सेना के शौर्य का वर्णन प्रेरणादायक है, लेकिन सरकार को यह भी बताना चाहिए कि ऑपरेशन के बाद किन कारणों से सीजफायर हुआ।” दूसरी ओर, मदरसा बोर्ड का कहना है कि यह कदम बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और आधुनिक शिक्षा प्रदान करने का हिस्सा है। पहले से ही मदरसा में NCERT पाठ्यक्रम लागू किया जा चुका है। यह पहल मदरसा छात्रों में देशभक्ति के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देगी। उत्तराखंड के बाद राजस्थान मदरसा बोर्ड ने भी ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला लिया है। बिहार में भी इसे लागू करने की मांग उठ रही है। यह कदम न केवल मदरसा शिक्षा को आधुनिक बनाएगा, बल्कि बच्चों को सेना की वीरता और देश सेवा की भावना से जोड़ेगा। शादाब शम्स ने कहा, “उत्तराखंड सैनिकों की भूमि है। अगर यहां के बच्चे ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) नहीं पढ़ेंगे, तो कहां पढ़ेंगे?”

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का ऑपरेशन सिन्दूर (Operaton Sindoor) और कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी को पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला एक दूरदर्शी कदम है। यह न केवल बच्चों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें भारतीय सेना की शौर्यगाथा और नारी शक्ति के योगदान से प्रेरित करेगा। कर्नल सोफिया (Sofia) कुरैशी की कहानी मदरसा की बेटियों को यह विश्वास दिलाएगी कि वे भी देश के लिए इतिहास रच सकती हैं। यह पहल मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने और सामाजिक एकता को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी।

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