पप्पू यादव का रामभद्राचार्य पर विवादित बयान: 'अंधा, काना, बहरा, गूंगा... इलाज अंबेडकरवादी विचारों से होगा', सोनिया को 'देश की मां' बताया। 

बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने चित्रकूट के जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हालिया

Nov 26, 2025 - 14:10
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पप्पू यादव का रामभद्राचार्य पर विवादित बयान: 'अंधा, काना, बहरा, गूंगा... इलाज अंबेडकरवादी विचारों से होगा', सोनिया को 'देश की मां' बताया। 
पप्पू यादव का रामभद्राचार्य पर विवादित बयान: 'अंधा, काना, बहरा, गूंगा... इलाज अंबेडकरवादी विचारों से होगा', सोनिया को 'देश की मां' बताया। 

नई दिल्ली। बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने चित्रकूट के जगद्गुरु रामभद्राचार्य के हालिया बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें 'अंधा, काना, बहरा, गूंगा' जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित कर दिया। 25 नवंबर 2025 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पप्पू ने कहा, 'रामभद्राचार्य कौन हैं, हमें नहीं पता। ये अंधा, काना, बहरा, गूंगा हैं। इनका इलाज केवल अंबेडकरवादी विचारों से होगा।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे लोगों को यमुना के गंदे पानी में डुबो देना चाहिए। इस बयान ने न केवल सनातन धर्म के अनुयायियों को नाराज कर दिया, बल्कि राजनीतिक दलों के बीच बहस छेड़ दी। पप्पू ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को 'देश की असली मां' बताते हुए रामभद्राचार्य के बयान को महिलाओं का अपमान करार दिया। यह विवाद रामभद्राचार्य के एससी-एसटी एक्ट को समाप्त करने की मांग और सोनिया पर टिप्पणी से उपजा है। भाजपा और आरएसएस से जुड़े संगठनों ने पप्पू के बयान की निंदा की, जबकि आरजेडी ने इसे सामाजिक न्याय का पक्ष बताया।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य, जिनका असली नाम गिरिधर रमण दास हैं, संत समाज के प्रमुख चेहरे हैं। वे राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख समर्थक रहे और अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी शामिल हुए। 1950 में जन्मे रामभद्राचार्य बचपन से ही दृष्टिबाधित हैं, लेकिन उन्होंने संस्कृत, वेद, पुराण और दर्शनशास्त्र में महारथ हासिल की। वे चित्रकूट के तुलसी पीठ के प्रमुख हैं और रामभद्राचार्य आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में पूजे जाते हैं। हाल ही में 24 नवंबर को उन्होंने एक धार्मिक सभा में कहा कि एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है और इसे समाप्त कर देना चाहिए। उन्होंने सोनिया गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि वे विदेशी मूल की हैं और भारत की राजनीति में हस्तक्षेप करती हैं। रामभद्राचार्य ने कहा, 'ये आर्य हैं, जो विदेश से आकर भारत में बस गए। एससी-एसटी एक्ट से अपराधी तत्व मजबूत हो गए हैं।' उनका यह बयान विपक्षी दलों के लिए असहज साबित हुआ। आरजेडी और कांग्रेस ने इसे दलित-वंचित विरोधी बताया।

पप्पू यादव का बयान इसी सभा के बाद आया। पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने रामभद्राचार्य को निशाना बनाया। पप्पू ने कहा, 'रामभद्राचार्य जैसे लोग सनातन धर्म का अपमान कर रहे हैं। वे खुद को संत कहते हैं, लेकिन दलितों और पिछड़ों पर अत्याचार की वकालत करते हैं।' उन्होंने अंबेडकर के विचारों को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि यही असली इलाज है। पप्पू का यह बयान वीडियो के रूप में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #PappuYadavInsult और #Rambhadracharya ट्रेंड करने लगे। एक यूजर ने लिखा, 'पप्पू यादव ने विकलांग संत का अपमान किया है। यह असंवेदनशीलता की हद है।' पप्पू ने सोनिया गांधी का बचाव करते हुए कहा, 'सोनिया देश की मां हैं। महिलाओं का अपमान इनकी संस्कृति का हिस्सा है। ऐसे लोगों को यमुना में डुबो देना चाहिए।' यह बयान भाजपा के लिए राजनीतिक हथियार बन गया।

भाजपा ने पप्पू के बयान की कड़ी निंदा की। प्रदेश प्रवक्ता ने कहा, 'पप्पू यादव ने हिंदू संत का अपमान किया है। वे अंबेडकर का नाम लेकर सनातन को निशाना बना रहे हैं।' आरएसएस से जुड़े संगठनों ने पटना में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। जदयू नेता अरविंद निषाद ने रामभद्राचार्य के बयान से दूरी बनाई। उन्होंने कहा, 'कौन क्या कहता है, लेकिन दलित हितों का ध्यान रखना चाहिए।' आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने पप्पू का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'रामभद्राचार्य का बयान आरएसएस की सोच दिखाता है। एससी-एसटी एक्ट से दलितों पर अत्याचार कम हुए हैं। पप्पू ने सही कहा।' कांग्रेस ने भी रामभद्राचार्य की आलोचना की, लेकिन पप्पू के शब्दों को नरम बताया। सोनिया गांधी के कार्यालय से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।

पप्पू यादव बिहार की राजनीति के चर्चित चेहरे हैं। वे पूर्व में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े थे, लेकिन अब स्वतंत्र सांसद हैं। 1967 में जन्मे पप्पू ने 1990 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत की। वे मदhepura और पूर्णिया से सांसद रह चुके हैं। उनके विवादित बयान अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं। हाल ही में उन्होंने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री पर नटरवलाल कहा था। महाकुंभ भगदड़ पर उन्होंने बाबाओं के खिलाफ तीखे शब्द इस्तेमाल किए थे। पप्पू खुद को सामाजिक न्याय का योद्धा बताते हैं। वे अंबेडकर जयंती पर रैलियां आयोजित करते हैं। लेकिन उनके बयान से कई बार दलित संगठन भी नाराज हो जाते हैं। इस बार रामभद्राचार्य के अपमान ने सनातनी समाज को भड़का दिया। चित्रकूट में संतों ने पप्पू के खिलाफ बयान जारी किया। उन्होंने कहा, 'यह हिंदू एकता पर हमला है।'

यह विवाद बिहार चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान बढ़ा रहा है। 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए मजबूत स्थिति में है। आरजेडी और कांग्रेस गठबंधन कमजोर पड़ा है। पप्पू का बयान विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश लगता है, लेकिन यह उल्टा पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान ध्रुवीकरण बढ़ाते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने चुप्पी साधी, लेकिन तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर सामाजिक न्याय पर जोर दिया। भाजपा नेता सुशील मोदी ने कहा, 'पप्पू यादव कांग्रेस के पिट्ठू हैं। वे हिंदू संतों को निशाना बनाकर वोट बैंक तलाश रहे हैं।' सोशल मीडिया पर बहस तेज है। एक पोस्ट में लिखा गया, 'पप्पू ने विकलांगता का मजाक उड़ाया। यह अपराध है।' रामभद्राचार्य के समर्थकों ने पप्पू के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की बात कही।

रामभद्राचार्य का बयान एससी-एसटी एक्ट पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि एक्ट का दुरुपयोग राजनीतिक फायदे के लिए होता है। वे राम राज्य की अवधारणा पर जोर देते हैं, जहां जाति भेदभाव न हो। लेकिन विपक्ष ने इसे आरएसएस की साजिश बताया। पप्पू का जवाब अतिरंजित था, जो उनकी शैली का हिस्सा है। वे अक्सर ऐसे बयानों से चर्चा में रहते हैं। 2024 में उन्होंने नीतीश कुमार पर 'सुशासन बाबू' का तंज कसा था। इस विवाद से बिहार में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। दलित संगठनों ने रामभद्राचार्य की निंदा की, लेकिन पप्पू के शब्दों को अस्वीकार किया। बहुजन समाज पार्टी ने दोनों की आलोचना की।

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