सरदार पटेल की 150वीं जयंती: राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर श्रद्धांजलि अर्पित की, देशभर में एकता की शपथ।
आज 31 अक्टूबर 2025 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है। यह विशेष अवसर राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में जाना
आज 31 अक्टूबर 2025 को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है। यह विशेष अवसर राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में जाना जाता है, जो देश की अखंडता और विविधता में एकता के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। गुजरात के केवड़िया स्थित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने देशवासियों को एकता की शपथ दिलाई और एक भव्य परेड का उद्घाटन किया। यह परेड गणतंत्र दिवस की तर्ज पर तैयार की गई थी, जिसमें केंद्रीय सशस्त्र बलों, राज्य पुलिसों और विभिन्न राज्यों की झांकियां शामिल हुईं। कार्यक्रम में नारी शक्ति को विशेष सम्मान दिया गया, जहां महिलाओं के दलों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सरदार पटेल का जन्म 1875 में गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे भारत के पहले गृह मंत्री और उपप्रधानमंत्री थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद 562 रियासतों को एकजुट कर आधुनिक भारत की नींव रखी। इस जयंती पर देशभर में रन फॉर यूनिटी, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शैक्षिक आयोजन हो रहे हैं, जो युवाओं को एकता का संदेश दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी सुबह करीब आठ बजे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचे। उन्होंने प्रतिमा के चरणों में अभिषेक किया, पुष्प अर्पित किए और हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इसके बाद वे एकत्रित लोगों को एकता की शपथ दिलाने पहुंचे। शपथ में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा की रक्षा करेंगे तथा इस संदेश को अन्य लोगों तक पहुंचाएंगे। मोदी ने कहा कि आज करोड़ों लोग एकता की शपथ ले रहे हैं। हमने संकल्प लिया है कि राष्ट्र की एकता मजबूत करने वाले कार्य करेंगे। जो विचार या कार्य एकता को कमजोर करें, उन्हें त्यागेंगे। उन्होंने सरदार पटेल को राष्ट्र निर्माण का आधार बताया। कहा कि पटेल ने भारत को एक सूत्र में बांधा, जो आज भी प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में 900 कलाकारों ने विभिन्न राज्यों के पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति दी, जो विविधता में एकता का प्रतीक था।
इस वर्ष की परेड विशेष थी। गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की कि अब हर 31 अक्टूबर को यह भव्य परेड आयोजित होगी। इसमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, एनएसजी, एनडीआरएफ जैसे केंद्रीय बलों के दलों ने भाग लिया। गुजरात, जम्मू-कश्मीर, अंडमान-निकोबार, मणिपुर, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पुदुच्चेरी जैसे राज्यों की झांकियां रहीं। स्वदेशी कुत्तों की नस्लों का प्रदर्शन भी हुआ। पहली बार महिलाओं के दलों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। शाह ने कहा कि यह परेड अब स्थायी होगी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद उन्होंने पटेल को उचित सम्मान नहीं दिया। पटेल की मृत्यु के 41 वर्ष बाद 1991 में उन्हें भारत रत्न मिला। शाह ने पटेल की चीन को चेतावनी का जिक्र किया। 1950 में पटेल ने नेहरू को पत्र लिखा था कि तिब्बत के कब्जे से चीन भारत के द्वार पर आ जाएगा।
केवड़िया का एकता नगर इस अवसर पर सज-धज गया। नर्मदा नदी के किनारे बसे इस स्थान पर सांस्कृतिक उत्सव, प्रदर्शनियां और युवा कार्यक्रम हुए। कलाकारों ने पटेल के जीवन और दृष्टिकोण को उजागर किया। पर्यटन मंत्रालय और गुजरात सरकार के सहयोग से यह आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री ने कलकत्ता के परिवार से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पटेल का सपना विकसित भारत है। हम आर्टिकल 370 हटाकर उनके एकीकरण के सपने को पूरा कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली के सरदार पटेल चौक पर पुष्प अर्पित किए। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि पटेल आधुनिक भारत के शिल्पकार हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि पटेल को श्रद्धांजलि। वे राष्ट्र के लौह पुरुष थे।
देशभर में उत्साह है। दिल्ली के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में रन फॉर यूनिटी चला। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता जैसे शहरों में लाखों लोगों ने भाग लिया। स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों ने एकता पर निबंध और चित्रकला प्रतियोगिताएं कीं। त्रिपुरा के अगरतला में अस्थाबल ग्राउंड पर रैली हुई, जिसमें छात्र और युवा शामिल हुए। मुरादाबाद में स्कूली बच्चों ने पटेल का विशाल चित्र बनाया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि पटेल स्वतंत्रता संग्राम के रीढ़ थे। बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्थानीय कार्यक्रम हुए। थीम एक भारत, आत्मनिर्भर भारत है। यह एकता को आत्मनिर्भरता से जोड़ता है। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य पटेल के विजन से जुड़ा है।
सरदार पटेल का जीवन प्रेरणादायक है। गुजरात के एक किसान परिवार में जन्मे पटेल ने वकील बनकर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। वे गांधीजी के प्रमुख सहयोगी थे। बारडोली सत्याग्रह जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया। 1947 में आजादी के बाद ब्रिटिशों ने देश को बंटा छोड़ा। 562 रियासतें स्वतंत्र होना चाहती थीं। पटेल ने कूटनीति और दृढ़ता से उन्हें भारतीय संघ में मिलाया। हैदराबाद, जूनागढ़, कश्मीर जैसे जटिल मामलों को सुलझाया। उनकी मृत्यु 15 दिसंबर 1950 को हुई। तब तक उन्होंने नौकरशाही को मजबूत किया। पटेल की अनुपस्थिति में भारत कई टुकड़ों में बंट जाता। इतिहासकार रामचंद्र गुहा कहते हैं कि पटेल व्यावहारिक नेता थे। उनकी दृष्टि ने विविधता को ताकत बनाया।
मोदी सरकार ने 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस घोषित किया। 2018 में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का उद्घाटन किया, जो 182 मीटर ऊंची है। यह पर्यटन केंद्र बन चुका है। आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देता है। इस वर्ष 1 से 15 नवंबर तक भारत पर्व चलेगा। इसमें सांस्कृतिक प्रदर्शन, खान-पान उत्सव और स्वदेशी प्रदर्शनियां होंगी। सार्वजनिक प्रतिनिधि, कलाकार और विशेष अतिथि शामिल होंगे। कलकत्ता के पैसे और डाक टिकट जारी हुए। 150 रुपये का स्मारक सिक्का भी। ये पटेल की स्मृति को अमर करेंगे।
यह जयंती राजनीतिक बहस भी लाई। भाजपा इसे एकता का प्रतीक बताती है। विपक्ष पर पटेल को भुलाने का आरोप लगाया। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने पटेल की विरासत मिटाने की कोशिश की। लेकिन पटेल का योगदान निर्विवाद है। वे गांधी-नेहरू के साथ स्वतंत्रता के नायक थे। उनकी चेतावनी आज सीमा मुद्दों में प्रासंगिक है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ी। केवड़िया में हजारों पहुंचे। यह स्मारक रोजगार पैदा कर रहा है। मोदी ने कहा कि पटेल का संदेश आज की पीढ़ी को मार्गदर्शन दे। एकता से ही भारत मजबूत होगा।
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