आगरा में आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन: योगी सरकार किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध: दिनेश प्रताप सिंह
प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह की
- आगरा में आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन, किसानों और निर्यातकों से संवाद
- सींगना में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र से आगरा को मिलेगी वैश्विक पहचान
- आलू की खपत बढ़ाने के लिए अन्य राज्यों में विशेष प्रयास, 15 लाख मीट्रिक टन खपत की तैयारी
- आलू मूल्य स्थिरीकरण के लिए 100 करोड़ रुपये के फंड का प्रयास
लखनऊ/आगरा: प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आगरा मंडलायुक्त सभागार में आलू क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में आगरा, हाथरस, मथुरा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, कासगंज, एटा, अलीगढ़, फर्रुखाबाद और कन्नौज सहित विभिन्न जनपदों के आलू उत्पादक किसानों, निर्यातकों, शीतगृह स्वामियों, मंडी परिषद तथा उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष आलू की बेहतर उपज को देखते हुए सरकार किसानों को घाटा न उठाना पड़े इसके लिए विपणन और निर्यात की व्यवस्था को मजबूत कर रही है।
उद्यान मंत्री ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र लीमा (पेरू) की साउथ एशिया शाखा आगरा के सींगना में स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा कि चीन के बाद एशिया में इस केंद्र की स्थापना आगरा को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाएगी और आलू बीज अनुसंधान के क्षेत्र में क्रांति लाएगी। इससे प्रदेश के किसानों को उत्पादन, भंडारण, विपणन और निर्यात के क्षेत्र में नई संभावनाएं मिलेंगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश देश में आलू उत्पादन में पहले स्थान पर है और देश के कुल आलू उत्पादन में प्रदेश की लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। आगरा मंडल भी आलू उत्पादन और भंडारण का प्रमुख केंद्र है, जहां लगभग 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 67 लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू का उत्पादन होता है तथा लगभग 604 शीतगृह संचालित हैं।
मंत्री सिंह ने कहा कि इस वर्ष बेहतर उत्पादन को देखते हुए सरकार आलू के विपणन और खपत बढ़ाने के लिए विभिन्न राज्यों में विशेष प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि उड़ीसा सरकार के माध्यम से लगभग 15 लाख मीट्रिक टन आलू की खपत सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही आलू मूल्य स्थिरीकरण के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के अंतर्गत भारत सरकार से 100 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आलू खरीद और मूल्य स्थिरीकरण में मदद मिलेगी।
दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि योगी सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हाल ही में किसानों द्वारा भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर ले जाए जा रहे आलू के वाहनों के चालान की समस्या पर तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि भंडारण के लिए ले जाए जा रहे किसानों के वाहनों का चालान न किया जाए। उन्होंने शीतगृह संचालकों, किसानों और उद्यमियों से आगरा क्षेत्र में आलू आधारित प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना पर 35 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है तथा किसानों को बेहतर तकनीक और उन्नत किस्मों के विकास के लिए प्रदेश में 125 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।
सम्मेलन के दौरान किसानों, शीतगृह संचालकों और व्यापारियों से सुझाव भी आमंत्रित किए गए, जिनमें आलू भंडारण के आंकड़ों को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने, किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने तथा आलू के प्रसंस्करण और विपणन को बढ़ावा देने जैसे सुझाव शामिल रहे। उद्यान मंत्री ने अधिकारियों को इन सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। सम्मेलन के उपरांत मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने सींगना में स्थापित किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की साइट का निरीक्षण भी किया और अधिकारियों को निर्माण कार्य को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए।
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