Sambhal: 2010 में पास हुआ प्रस्ताव, श्रेय की राजनीति में अटका रहा काम, रेल लाइन विस्तारीकरण की मांग।
सम्भल में रेल लाइन के इतिहास और उसके विस्तारीकरण की मांग को लेकर एक बार फिर आवाज़ बुलंद हुई है। समाजसेवी डॉ. नाजिम ने पत्रकारों
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में रेल लाइन के इतिहास और उसके विस्तारीकरण की मांग को लेकर एक बार फिर आवाज़ बुलंद हुई है। समाजसेवी डॉ. नाजिम ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि सम्भल में रेल लाइन की शुरुआत आज़ादी से पहले की मानी जाती है। उस दौर में जनरल शाहनवाज़ के प्रयासों से इस क्षेत्र को रेल सुविधा मिली थी और स्थानीय लोगों को मजदूरी भी उपलब्ध कराई गई थी।
डॉ. नाजिम ने कहा कि आज़ादी के बाद अंग्रेज तो चले गए, लेकिन “काले अंग्रेज” रह गए, जिनकी जनविरोधी नीतियों के चलते अब तक सम्भल को रेल विस्तार से वंचित रखा गया। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि रेल लाइन का विस्तारीकरण पूरी तरह जनहित में है, लेकिन वर्षों से इसका विरोध किया जाता रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार की नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि आज देश में वे काम हो रहे हैं जो पहले संभव नहीं थे। वंदे भारत ट्रेन के माध्यम से देश के कोने-कोने को जोड़ा जा रहा है और उन्हें उम्मीद है कि सम्भल से गजरौला तक रेल लाइन का विस्तारीकरण भी जल्द जमीन पर दिखाई देगा। डॉ. नाजिम ने बताया कि आज़ादी के बाद सम्भल से नजीबाबाद तक रेल चलती थी, लेकिन समय के साथ उसके फेरे कम होते चले गए। वर्ष 2010 में ई. अहमद ने रेल लाइन के विस्तारीकरण का प्रस्ताव पास कराया था, लेकिन स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच श्रेय लेने की होड़ के कारण यह योजना खटाई में पड़ गई। उन्होंने कहा कि आज सम्भल का दुर्भाग्य यह है कि यहां के लोग दिल्ली जाने के लिए 300 से 400 रुपये खर्च करने को मजबूर हैं, जबकि रेल लाइन के विस्तार से यही सफर 50 से 60 रुपये में संभव हो सकता था। रेल लाइन के विस्तारीकरण से शिक्षा, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलता और आम जनता, खासकर गरीब वर्ग को सीधा लाभ मिलता। डॉ. नाजिम ने कहा कि वह स्वयं 2007 से इस मांग को उठा रहे हैं, जबकि उनसे पहले भी उनके बुजुर्ग लगातार यह मांग करते आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव सम्भल आए थे, तब उन्होंने भी रेल विस्तारीकरण का वादा किया था, जो किसी कारणवश पूरा नहीं हो सका। अंत में डॉ. नाजिम ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ऐतिहासिक मांग को जरूर पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक सम्भल से गजरौला तक रेल लाइन का विस्तारीकरण नहीं होता, तब तक यह आवाज़ उठती रहेगी—आज भी और आने वाली पीढ़ियों द्वारा भी। सम्भल की हर वर्ग की जनता इस मांग के साथ खड़ी है।
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