Sambhal: हिजाब खींचने की घटना पर धर्मगुरुओं की कड़ी निंदा, महिला आयोग से कार्रवाई की मांग के साथ इस्तीफे की मांग। 

बिहार में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला का हिजाब खींचे जाने को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी

By INA News Desk
Dec 18, 2025 - 16:34
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Sambhal: हिजाब खींचने की घटना पर धर्मगुरुओं की कड़ी निंदा, महिला आयोग से कार्रवाई की मांग के साथ इस्तीफे की मांग। 
मुफ्ती आलम रज़ा नूरी, धर्मगुरु , मौलाना वसी अशरफ,  धर्मगुरु 

उवैस दानिश, सम्भल 

सम्भल: बिहार में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला का हिजाब खींचे जाने को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस मामले में मुस्लिम धर्मगुरुओं ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे महिला सम्मान और संविधान के खिलाफ बताया है।

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को इस तरह का आचरण बिल्कुल भी शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि यह बेहद गिरी हुई और निंदनीय हरकत है, जिसे हिंदुस्तानी समाज कभी बर्दाश्त नहीं कर सकता। मौलाना वसी अशरफ ने दावा किया कि इस घटना से आहत होकर संबंधित महिला डॉक्टर बिहार छोड़कर चली गई थीं, हालांकि बाद में वह वापस लौट आई हैं। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री के लिए आत्ममंथन का विषय है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री की उम्र हो चुकी है और उन्हें यह तक समझ नहीं रह गया कि वे क्या कर रहे हैं, इसलिए उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और किसी दूसरे व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में किसी महिला का हिजाब खींचा गया है तो यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय कृत्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना को हिंदू मुस्लिम के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे नारी के अपमान के रूप में देखा जाना चाहिए। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने कहा कि भारत की संस्कृति में हिंदू समाज की महिलाएं घूंघट करती हैं और मुस्लिम समाज की महिलाएं हिजाब पहनती हैं, दोनों का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह घटना महिला की इज्जत से खिलवाड़ है और हमारे संविधान व सामाजिक मूल्यों के भी खिलाफ है। मुफ्ती आलम रज़ा नूरी ने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की और कहा कि महिला आयोग को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक व्यक्ति इस तरह की हरकत करने का साहस न कर सके। इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर सत्ता में बैठे लोगों के आचरण, महिला सम्मान और संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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