Saharanpur : 30 रुपए कुंतल नाकाफी गन्ने का लाभकारी मूल्य रू.700 कुंतल चाहिए- भगत सिंह वर्मा

किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन वर्मा और पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला

By INA News Desk
Oct 29, 2025 - 22:09
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Saharanpur : 30 रुपए कुंतल नाकाफी गन्ने का लाभकारी मूल्य रू.700 कुंतल चाहिए- भगत सिंह वर्मा
Saharanpur : 30 रुपए कुंतल नाकाफी गन्ने का लाभकारी मूल्य रू.700 कुंतल चाहिए- भगत सिंह वर्मा

  • सभी समस्याओं के हल के लिए पश्चिम प्रदेश जरूरी- वर्मा

किसानों की समस्याओं पर ज्ञापन, गन्ना मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग

सहारनपुर। किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन वर्मा और पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन जिला प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए दोनों संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने गन्ने का मूल्य मात्र 30 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर किसानों के साथ बड़ा धोखा किया है। हरियाणा में पिछले तीन वर्षों से किसानों को 50 रुपये प्रति क्विंटल अधिक गन्ना मूल्य मिल रहा है।

इस बार वहां 415 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित किया गया है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से गन्ना उत्पादन की लागत 550 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। गन्ने की बढ़ती लागत और किसानों पर बढ़ते कर्ज को देखते हुए भाजपा सरकार को गन्ना का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल दिलाना चाहिए। गन्ना प्रदेश और देश की आर्थिक रीढ़ है। गन्ने से चीनी मिलों में चीनी के साथ शीरा भी बनता है। शीरा से अल्कोहल बनता है। एक क्विंटल गन्ने से 6-50 किलोग्राम शीरा निकलता है। इस शीरा से डेढ़ लीटर अल्कोहल बनता है। डेढ़ लीटर अल्कोहल से देसी शराब बनने पर प्रदेश सरकार को एक क्विंटल गन्ने से ही 800 रुपये एक्साइज ड्यूटी के रूप में मिलते हैं। इसके अलावा हजारों उत्पाद बनते हैं, जिनसे प्रदेश और केंद्र सरकार को जीएसटी और अन्य टैक्स के रूप में हजारों करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं।इसके बावजूद प्रदेश और केंद्र सरकार गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य तो दूर लागत मूल्य भी नहीं दिला पा रही, जो किसानों के साथ सरासर अन्याय है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के 26 जिलों को मिलाकर पृथक पश्चिम प्रदेश बनने पर बढ़ती समस्याएं हल होंगी।

ज्ञापन के माध्यम से प्रधानमंत्री से उत्तर प्रदेश को चार भागों में बांटकर पृथक पश्चिम प्रदेश का निर्माण कराने, राज्य पुनर्गठन आयोग गठित करने, सहारनपुर में एम्स की स्थापना करने, मेरठ में आईआईटी की स्थापना करने, मनरेगा योजना को सीधा खेती से जोड़कर किसानों को मजदूर उपलब्ध कराने, बुजुर्ग किसानों को 10000 रुपये प्रतिमाह वृद्धावस्था पेंशन दिलाने, किसानों के सभी कर्ज समाप्त करने, किसानों को उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य दिलाने, गन्ने का लाभकारी मूल्य 700 रुपये प्रति क्विंटल करने, पिछले वर्षों में देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर ब्याज किसानों को दिलाने जैसी मांगें की गईं।बैठक की अध्यक्षता पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के संरक्षक चौधरी रामचंद्र गुर्जर ने की। संचालन भारतीय किसान यूनियन वर्मा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अशोक मलिक ने किया। संचालन करते हुए डॉ. अशोक ने कहा कि पृथक पश्चिम प्रदेश बनने पर ही किसानों और गरीबों की सभी समस्याएं हल होंगी। पृथक राज्य समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

बैठक और प्रदर्शन में भारतीय किसान यूनियन वर्मा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित नीरज कपिल, प्रदेश मीडिया प्रभारी दुष्यंत सिंह, राष्ट्रीय सलाहकार हाफिज मुर्तजा त्यागी, प्रदेश सचिव मास्टर रईस अहमद, प्रदेश महामंत्री संदीप एडवोकेट, प्रदेश संगठन मंत्री धर्मवीर चौधरी, प्रदेश सचिव डॉ. परविंदर मलिक, जिला संगठन मंत्री सुरेंद्र सिंह एडवोकेट, जिला मंत्री मुकर्रम, प्रधान ईश्वर चंद्र फौजी, जिला महामंत्री दीपक चौधरी गुर्जर, रविंद्र कुमार शारद, विश्वनाथ तिवारी, अमरदीप सिंह मान, मोहम्मद अनस, हाजी सुलेमान, हाजी साजिद, महबूब हसन, वसीम जहीरपुर आदि ने भाग लिया।

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