Sambhal : AMU का नाम बदलने की मांग पर सियासी बवाल, रशीक अनवर बोले- भाजपा का एजेंडा मुसलमानों की पहचान मिटाना तो अक्षित बोले- एएमयू में गूंजे वेद मंत्र और संस्कृत
रशीक अनवर ने कहा कि भाजपा के कुछ नेताओं को जब भी नफरत फैलाने और समाज में जहर घोलने की जरूरत पड़ती है तो उन्हें इस तरह के बयान देने के लिए आगे कर
Report : उवैस दानिश, सम्भल
उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) का नाम बदलने को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री ठाकुर रघुराज सिंह ने हाल ही में एएमयू का नाम बदलकर हरिगढ़ यूनिवर्सिटी करने की मांग उठाई थी। उनके इस बयान पर सियासी तूफान खड़ा हो गया है। समाजसेवी रशीक अनवर ने मंत्री के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया है।
रशीक अनवर ने कहा कि भाजपा के कुछ नेताओं को जब भी नफरत फैलाने और समाज में जहर घोलने की जरूरत पड़ती है तो उन्हें इस तरह के बयान देने के लिए आगे कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की स्थापना 1920 में हुई थी, उस समय इन नेताओं का जन्म भी नहीं हुआ था। यह यूनिवर्सिटी न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी शिक्षा व्यवस्था के लिए मशहूर है।
उन्होंने कहा, “अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर ये क्या कर लेंगे? क्या ये मुसलमानों की पहचान मिटाना चाहते हैं? एक तरफ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि इस्लाम और मुसलमान इस देश में रहेंगे, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के नेता भड़काऊ बयान देते हैं। बाबरी मस्जिद के शहीद होने के बाद भी एएमयू में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा कायम रहा था। यहां आज भी लोग एक-दूसरे से सलाम-दुआ करते हैं। यह यूनिवर्सिटी तहजीब और गंगा-जमुनी संस्कृति का प्रतीक है, लेकिन कुछ लोग इसे नफरत की राजनीति से खत्म करना चाहते हैं।”
वहीं, राज्य मंत्री रघुराज सिंह के बयान का समर्थन करते हुए अक्षित अग्रवाल ने कहा कि एएमयू का नाम बदलकर हरिगढ़ यूनिवर्सिटी करना समय की मांग है। उन्होंने आरोप लगाया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हिंदुओं पर अत्याचार हुए हैं और वहां से राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों की खबरें आती रहती हैं।
अक्षित अग्रवाल ने कहा, “हिंदुस्तान की असली तहजीब और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यह जरूरी है कि एएमयू का नाम हरिगढ़ यूनिवर्सिटी रखा जाए। यहां संस्कृत की पढ़ाई हो, वेद मंत्रों का जाप कराया जाए और प्रातःकाल गायत्री मंत्र गूंजे। शिक्षा गुरुकुल पद्धति के अनुसार दी जानी चाहिए ताकि छात्रों में राष्ट्रभक्ति और संस्कार विकसित हो।”
इस बयानबाजी के बाद अलीगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में गरमाहट बढ़ गई है। नाम बदलने के मुद्दे पर दोनों पक्ष आमने-सामने हैं। एक ओर जहां इसे गंगा-जमुनी तहजीब पर हमला बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण की पहल करार दिया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
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