Sambhal : एशिया कप इंडिया-पाकिस्तान मैच को लेकर सभी धर्मों के लोगों ने रखी राय, खेल के साथ बढ़ेगा भाईचारा

सुधीर कुमार ने थोड़ा अलग नजरिया पेश करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने कई बार आतंकवाद को बढ़ावा दिया है जिससे भारत की बहनों के सिंदूर उजड़े। उन्होंने कहा, "इस

By INA News Desk
Sep 14, 2025 - 14:02
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Sambhal : एशिया कप इंडिया-पाकिस्तान मैच को लेकर सभी धर्मों के लोगों ने रखी राय, खेल के साथ बढ़ेगा भाईचारा
फोटो परिचय बाएं से- सुधीर कुमार, जावेद कमाल, शोभना सैमुअल, हरदीप सिंह

Report : उवैस दानिश, सम्भल

एशिया कप 2025 का बहुप्रतीक्षित मैच 14 सितंबर को भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। इस हाई-वोल्टेज मुकाबले को लेकर लोगों में उत्साह के साथ-साथ अलग-अलग विचार भी सामने आए हैं। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोगों ने इस मैच को लेकर अपने-अपने विचार खुलकर रखे।

मुस्लिम समुदाय से जावेद कमाल ने कहा कि यह मैच दोनों देशों के लिए भाईचारे का संदेश लेकर आया है। उन्होंने कहा कि "हम चाहते हैं कि इंडिया और पाकिस्तान के बीच संबंध अच्छे हों। इस मैच से आपसी रिश्तों में मिठास बढ़ेगी। मुझे भरोसा है कि मैच इंडिया ही जीतेगा, लेकिन इससे भी ज्यादा जरूरी है कि दोनों देशों के बीच एकता बनी रहे।"

वहीं सुधीर कुमार ने थोड़ा अलग नजरिया पेश करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने कई बार आतंकवाद को बढ़ावा दिया है जिससे भारत की बहनों के सिंदूर उजड़े। उन्होंने कहा, "इस हिसाब से देखा जाए तो इंडिया-पाकिस्तान का मैच नहीं होना चाहिए। मगर खेल का अपना महत्व है। खेल से आपसी एकता बढ़ानी चाहिए। दोनों देशों में प्यार और मोहब्बत रहनी चाहिए। आतंकवाद की घटनाओं को देखते हुए खेल में भाग लेना बुरी बात नहीं है, लेकिन पाकिस्तान को अपनी हरकतें सुधारनी होंगी।"

सिख समुदाय के हरदीप सिंह ने कहा कि इस मैच को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "खेल को खेल की नजर से देखना चाहिए। यह आईसीसी का टूर्नामेंट है और सरकार को भी खेल का समर्थन करना चाहिए। खेल भाईचारे को बढ़ावा देता है। पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए तभी दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ेगा।"

ईसाई समुदाय की शोभना सैमुअल ने खेल को रिश्तों को मजबूत करने का जरिया बताया। उन्होंने कहा, "पड़ोसी देश कभी दुश्मन नहीं होते। अगर मोहब्बत होती तो आतंकवाद और हमले नहीं होते। देश में शिक्षा और सोच की कमी के कारण लोग जाति-धर्म पर बहस करते हैं। खेल लोगों को मोहब्बत और ताजगी देता है। यह विदेशों में भी एक अच्छा संदेश भेजता है और युवाओं को आगे बढ़ने का मौका देता है। पड़ोसी देशों के बीच अच्छे संबंध से ही यह सब संभव है।"

14 सितंबर को होने वाले इस मैच पर सबकी नजरें टिकी हैं। लोगों को उम्मीद है कि यह मुकाबला सिर्फ एक खेल नहीं होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच भाईचारे और शांति का संदेश भी देगा।

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