Sambhal : रिक्शा वाले वाले बयान पर सियासत गरमाई, सम्भल सांसद के पिता ममलुकुर्रहमान ने असम सीएम पर साधा निशाना
ममलुकुर्रहमान ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान इस ओर इशारा करता है कि मुसलमानों को परेशान किया जाए और उन्हें इस बात पर मजबूर किया जाए कि वे देश छोड़कर चले जाएं। उन्हों
Report : उवैस दानिश, सम्भल
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित बयान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सम्भल सांसद के पिता ममलुकुर्रहमान ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से मुख्यमंत्री की ज़हनियत साफ झलकती है और यह मुसलमानों के प्रति नफ़रत को दर्शाता है।
ममलुकुर्रहमान ने कहा कि मुख्यमंत्री का बयान इस ओर इशारा करता है कि मुसलमानों को परेशान किया जाए और उन्हें इस बात पर मजबूर किया जाए कि वे देश छोड़कर चले जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि असम में लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। कांग्रेस ने असम के मुख्यमंत्री पर हमला बोलते हुए उन्हें “हिंदू जिन्ना” तक कह दिया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ममलुकुर्रहमान ने कहा कि यह बयान देश को बांटने वाली सोच को दर्शाता है। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान हिंदुस्तानी हैं और वे यहीं वोट डालेंगे, कहीं जाने वाले नहीं हैं। हिंदुस्तान किसी एक का नहीं, बल्कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी का है और आज़ादी में सभी ने कुर्बानियाँ दी हैं।
वहीं AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के बयान पर भी ममलुकुर्रहमान ने अपनी राय रखी। शौकत अली ने कहा था कि अगर कोई रिक्शा वाला 10 रुपये मांगे तो उसे 11 रुपये देने चाहिए। इस पर ममलुकुर्रहमान ने कहा कि यह एक अच्छी सोच है, क्योंकि एक रुपये ज्यादा देने से किसी गरीब मजदूर का भला ही होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक रिक्शा चालक की आमदनी आखिर होती ही कितनी है। ध्रुवीकरण की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए ममलुकुर्रहमान ने कहा कि इस तरह के बयान सिर्फ सत्ता में बने रहने और हिंदू-मुस्लिम के नाम पर वोट बैंक मजबूत करने की राजनीति का हिस्सा हैं।
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