Sawan 2025: आगरा के मुस्लिम भाइयों की शिव भक्ति- साजिद और सनी 151 किलो कांवड़ लेकर बटेश्वर में करेंगे जलाभिषेक, बोले- 'हम पहले सनातनी, बाद में मुस्लिम।
Kanwar Yatra 2025: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर में शिव भक्ति की लहर छा गई है। इस बीच, आगरा जिले के थाना बाह क्षेत्र के गांव कृषा के दो मुस्लिम भाई...
Kanwar Yatra 2025: सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर में शिव भक्ति की लहर छा गई है। इस बीच, आगरा जिले के थाना बाह क्षेत्र के गांव कृषा के दो मुस्लिम भाई, साजिद खान (25) और सनी खान (22), अपनी अनूठी आस्था के साथ चर्चा में हैं। ये दोनों भाई 151 किलो की भारी-भरकम कांवड़ लेकर हरिद्वार से गंगा जल भरकर बटेश्वर के प्राचीन शिव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उनकी यह पहली कांवड़ यात्रा है, जिसे वे अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए कर रहे हैं। साजिद और सनी का कहना है, “हम पहले सनातनी हैं, मुस्लिम बाद में। भगवान शिव की भक्ति में कोई धर्म आड़े नहीं आता।”
साजिद और सनी खान 10 जुलाई 2025 को अपने गांव कृषा से हरिद्वार के लिए रवाना हुए। उन्होंने हरिद्वार के हर की पौड़ी से 151 किलो वजनी कांवड़ में गंगा जल भरा और पैदल यात्रा शुरू की। उनकी मंजिल आगरा जिले के बटेश्वर में स्थित प्राचीन शिव मंदिर है, जहां वे 14 जुलाई 2025 को भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक, बटेश्वरनाथ, के लिए प्रसिद्ध है और सावन में हजारों श्रद्धालु यहां जल चढ़ाने आते हैं।
साजिद और सनी की कांवड़ यात्रा लगभग 200 किलोमीटर की है, जिसे वे अपने चार अन्य साथियों के साथ मिलकर पूरा कर रहे हैं। उनकी कांवड़ को विशेष रूप से सजाया गया है, जिसमें भगवान शिव के चित्र, रुद्राक्ष, और रंग-बिरंगे फूल शामिल हैं। दोनों भाई भगवा वस्त्र पहनकर और कंधे पर कांवड़ रखकर “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारे लगाते हुए चल रहे हैं। उनकी यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का भी संदेश दे रही है।
साजिद और सनी ने बताया कि उनकी यह कांवड़ यात्रा उनके माता-पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए है। साजिद ने कहा, “हमारे माता-पिता ने हमेशा भगवान शिव की भक्ति की बात की। उन्होंने हमें बताया कि शिव बहुत दयालु हैं और सभी की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। उनकी इच्छा थी कि हम कांवड़ लेकर बटेश्वर में जलाभिषेक करें।” सनी ने कहा, “हमारे गांव में कई सालों से लोग कांवड़ यात्रा करते हैं। हमने बचपन से यह देखा और सुना है कि शिव की भक्ति में कोई भेदभाव नहीं है। हम पहले सनातनी हैं, मुस्लिम बाद में। आस्था सबसे ऊपर है।”
दोनों भाइयों ने यह भी बताया कि वे अपने गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देना चाहते हैं। साजिद ने कहा, “लोग हमारे बारे में क्या कहते हैं, हमें इसकी परवाह नहीं। हमारी आस्था भगवान शिव में है, और हम उनकी भक्ति में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते।” उनकी इस भावना ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर खूब तारीफ बटोरी है।
साजिद और सनी की कांवड़ यात्रा हिंदू-मुस्लिम एकता का एक शानदार उदाहरण है। आगरा जिले के बाह क्षेत्र में पहले भी कई बार दोनों समुदायों के बीच सौहार्द की मिसालें देखी गई हैं, लेकिन यह पहली बार है जब मुस्लिम भाई इतनी भारी कांवड़ लेकर यात्रा पर निकले हैं। स्थानीय शिव मंदिर के पुजारी पंडित रमेश चंद्र शर्मा ने कहा, “साजिद और सनी की भक्ति देखकर मन प्रसन्न हो गया। भगवान शिव सबके हैं। उनकी यह यात्रा समाज को एकता का संदेश दे रही है।”
X पर इस खबर को लेकर कई पोस्ट्स वायरल हुईं। एक यूजर ने लिखा, “साजिद और सनी की शिव भक्ति हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो धर्म के नाम पर बंटवारा करता है।” एक अन्य ने कहा, “यह सनातन धर्म की सच्ची ताकत है, जो हर दिल को जोड़ता है।” हालांकि, ये पोस्ट्स लोगों की भावनाओं को दर्शाती हैं, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के लिए विश्वसनीय नहीं हैं।
कांवड़ यात्रा सावन महीने में होने वाली एक प्रमुख हिंदू तीर्थयात्रा है, जिसमें शिव भक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गौमुख, और अन्य पवित्र स्थानों से गंगा जल लेकर पैदल अपने गंतव्य के शिव मंदिरों में जल चढ़ाते हैं। सावन 2025 में यह यात्रा 11 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई तक चलेगी। मान्यता है कि गंगा जल से शिवलिंग का अभिषेक करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
कांवड़ यात्रा की शुरुआत को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। कुछ के अनुसार, भगवान परशुराम ने गढ़मुक्तेश्वर से गंगा जल लाकर शिव का जलाभिषेक किया था, जिसे पहली कांवड़ यात्रा माना जाता है। अन्य मान्यताओं में भगवान राम और रावण को भी कांवड़ यात्रा से जोड़ा जाता है। इस यात्रा में गंगा के अलावा यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, और कावेरी जैसी नदियों का जल भी शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है।
कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने यात्रा मार्गों पर साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की है। आगरा में बटेश्वर मार्ग पर पुलिस और एटीएस की तैनाती की गई है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। डीएम आगरा, अनिल कुमार, ने बताया, “कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए 20 शिविर लगाए गए हैं, जहां मुफ्त भोजन, पानी, और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं।”
हालांकि, कुछ कांवड़ियों ने मेडिकल शिविरों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी की शिकायत की है। साजिद ने बताया, “हरिद्वार से आगरा तक कुछ जगहों पर मेडिकल कैंप नहीं दिखे। प्रशासन को और ध्यान देना चाहिए।” फिर भी, दोनों भाई अपनी यात्रा को लेकर उत्साहित हैं और समय से बटेश्वर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
साजिद और सनी की कांवड़ यात्रा ने धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा दिया है। बटेश्वर के स्थानीय निवासी मोहम्मद अली ने कहा, “यह देखकर गर्व होता है कि हमारे मुस्लिम भाई भी शिव भक्ति में डूबे हैं। यह एकता का संदेश है।” हालांकि, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे “दिखावा” करार दिया, लेकिन साजिद और सनी ने कहा कि उनकी भक्ति में कोई दिखावा नहीं है। “हम अपने दिल से यह कर रहे हैं। लोगों की बातें हमें नहीं रोक सकतीं।”
यह घटना उत्तर प्रदेश में पहले भी देखे गए सौहार्द के उदाहरणों को मजबूत करती है। 2024 में मेरठ में एक मुस्लिम परिवार ने कांवड़ियों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था की थी, और हरिद्वार में कई मुस्लिम दुकानदार कांवड़ियों की मदद करते हैं। साजिद और सनी की यात्रा इस परंपरा को और आगे बढ़ा रही है।
साजिद और सनी खान की 151 किलो की कांवड़ यात्रा न केवल उनकी शिव भक्ति को दर्शाती है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता का भी प्रतीक है। अपनी पहली कांवड़ यात्रा में ये भाई अपने माता-पिता की इच्छा पूरी करने और भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए 200 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा समाज को यह संदेश देती है कि आस्था और भक्ति किसी धर्म की सीमाओं में नहीं बंधी होती। साजिद और सनी की कहानी सनातन धर्म की समावेशी प्रकृति को उजागर करती है, जो हर दिल को जोड़ने की ताकत रखती है।
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