Sitapur : सीतापुर की राजनीति में बड़ा उलटफेर- सपा की शानदार जीत, महमूदाबाद नगर पालिका पर फिर कब्जा जमाया

महमूदाबाद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद का यह उपचुनाव कई मायनों में अहम था। यह सीट मोहम्मद अहमद के निधन के बाद खाली हुई थी, जो चार बार इस पद

Aug 13, 2025 - 23:26
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Sitapur : सीतापुर की राजनीति में बड़ा उलटफेर- सपा की शानदार जीत, महमूदाबाद नगर पालिका पर फिर कब्जा जमाया
सीतापुर की राजनीति में बड़ा उलटफेर- सपा की शानदार जीत, महमूदाबाद नगर पालिका पर फिर कब्जा जमाया

सीतापुर की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। महमूदाबाद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद के उपचुनाव में सपा प्रत्याशी आमिर अरफात ने शानदार जीत हासिल की। इस जीत ने न केवल सपा की स्थानीय स्तर पर पकड़ को मजबूत किया, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को करारा झटका भी दिया। भाजपा प्रत्याशी इस चुनाव में पांचवें स्थान पर रहे, जो उनके लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। यह जीत सपा के लिए इसलिए भी खास है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही उनके प्रभाव वाला रहा है, और इस बार भी उन्होंने अपनी साख को बरकरार रखा।

महमूदाबाद नगर पालिका परिषद के चेयरमैन पद का यह उपचुनाव कई मायनों में अहम था। यह सीट मोहम्मद अहमद के निधन के बाद खाली हुई थी, जो चार बार इस पद पर जीत हासिल कर चुके थे। उनके बेटे आमिर अरफात ने इस बार सपा की ओर से चुनाव लड़ा और मतदाताओं का भरोसा जीतने में कामयाब रहे। आमिर ने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने का वादा किया था, और उनकी जीत से यह साफ हो गया कि मतदाताओं ने उनके इस वादे पर भरोसा जताया। उन्होंने अपने प्रचार में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि वे अपने पिता के अधूरे विकास कार्यों को पूरा करेंगे और नगर पालिका क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।इस उपचुनाव में कुल दस प्रत्याशी मैदान में थे, जिसके कारण मुकाबला काफी रोचक रहा। सपा के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र उनकी परंपरागत मजबूत सीटों में से एक है। लहरपुर विधानसभा सीट, जो इस क्षेत्र का हिस्सा है, पहले से ही सपा के पास है, जबकि सीतापुर की अन्य चार विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इस जीत ने सपा को न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका दिया है।

चुनाव के दौरान सपा प्रत्याशी आमिर अरफात ने कुछ मुद्दे भी उठाए थे। उन्होंने प्रशासन को एक पत्र सौंपकर बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि उनके और एक निर्दलीय प्रत्याशी के चुनाव चिह्नों में समानता के कारण मतदाता भ्रमित हो सकते हैं। इस मांग को लेकर कुछ विवाद भी हुआ, लेकिन अंततः मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई। आमिर की इस रणनीति को उनकी जीत का एक कारण माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्होंने मतदाताओं के बीच अपनी सक्रियता और सजगता का संदेश दिया।

दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह चुनाव निराशाजनक रहा। उनका प्रत्याशी न केवल जीत से दूर रहा, बल्कि पांचवें स्थान पर खिसक गया। यह परिणाम भाजपा के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि सीतापुर जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर उनकी मजबूत पकड़ है। भाजपा ने इस उपचुनाव को उतनी गंभीरता से नहीं लिया, जितना सपा ने लिया। सपा ने अपने पूरे संगठन को इस चुनाव में झोंक दिया था, और उनके कार्यकर्ताओं की मेहनत रंग लाई।

महमूदाबाद नगर पालिका की इस जीत ने सपा को यह साबित करने का मौका दिया कि वे अब भी समाज के विभिन्न वर्गों, खासकर अल्पसंख्यकों और पिछड़े समुदायों के बीच अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। सपा का चुनाव चिह्न साइकिल इस क्षेत्र में एक बार फिर उम्मीद और प्रगति का प्रतीक बनकर उभरा है। आमिर अरफात ने अपनी जीत के बाद कहा कि वे क्षेत्र के विकास के लिए दिन-रात काम करेंगे और सभी वर्गों के लोगों को साथ लेकर चलेंगे।

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