मुजफ्फरनगर में नॉइज पॉल्यूशन के खिलाफ सख्ती: धार्मिक स्थलों से 15 लाउडस्पीकर हटाए, डीजीपी निर्देश पर राज्यव्यापी अभियान। 

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने धार्मिक स्थलों पर लगे अत्यधिक शोर करने वाले लाउडस्पीकरों को हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। डीजीपी डॉ. राजीव कृष्ण

Nov 10, 2025 - 17:38
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मुजफ्फरनगर में नॉइज पॉल्यूशन के खिलाफ सख्ती: धार्मिक स्थलों से 15 लाउडस्पीकर हटाए, डीजीपी निर्देश पर राज्यव्यापी अभियान। 
मुजफ्फरनगर में नॉइज पॉल्यूशन के खिलाफ सख्ती: धार्मिक स्थलों से 15 लाउडस्पीकर हटाए, डीजीपी निर्देश पर राज्यव्यापी अभियान। 

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पुलिस ने धार्मिक स्थलों पर लगे अत्यधिक शोर करने वाले लाउडस्पीकरों को हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। डीजीपी डॉ. राजीव कृष्ण के निर्देश पर चल रहे इस अभियान के तहत सिविल लाइन और नगर कोतवाली थाना क्षेत्र में करीब 15 लाउडस्पीकर उतरवाए गए हैं। यह कार्रवाई किसी विशेष धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित शोर मानकों को लागू करने के उद्देश्य से की जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लाउडस्पीकरों का उपयोग केवल अनुमति प्राप्त समय और डेसिबल सीमा के अंदर ही किया जा सकता है। यह अभियान न केवल मुजफ्फरनगर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में चल रहा है, जहां अब तक हजारों लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। स्थानीय लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर विरोध भी देखने को मिला है।

मुजफ्फरनगर जिले के पुलिस अधीक्षक अभय सिंह ने बताया कि अभियान 8 नवंबर को शुरू हुआ, जब सिविल लाइन क्षेत्र के एक मस्जिद और दो मंदिरों से लाउडस्पीकर हटाए गए। इसके बाद नगर कोतवाली क्षेत्र में आठ और स्थलों से कार्रवाई की गई। कुल 15 लाउडस्पीकरों को हटाया गया, जिनकी आवाज 55 डेसिबल से अधिक थी। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, दिन में शोर की सीमा 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए। एसपी ने कहा कि यह कार्रवाई नॉइज पॉल्यूशन कंट्रोल एक्ट 2000 के तहत हो रही है। हमने धार्मिक स्थलों के प्रबंधकों को चेतावनी दी है कि बिना अनुमति के लाउडस्पीकर लगाना प्रतिबंधित है। अगर कोई उल्लंघन करता है तो जुर्माना या कानूनी कार्रवाई हो सकती है। मुजफ्फरनगर जैसे संवेदनशील जिले में यह कदम शांति बनाए रखने के लिए जरूरी है।

यह अभियान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर आधारित है। योगी सरकार ने कई बार कहा है कि शोर प्रदूषण से आम जनता का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, खासकर बच्चे, बुजुर्ग और मरीजों को। पिछले महीनों में लखनऊ, आगरा और कानपुर जैसे शहरों में भी इसी तरह की कार्रवाई हुई। दिसंबर 2024 में लखनऊ पुलिस ने 10 लाउडस्पीकर हटाए थे। नवंबर 2023 में राज्यव्यापी अभियान में 3,238 लाउडस्पीकर उतारे गए थे। डीजीपी ने सभी जिलों के एसपी को निर्देश दिए हैं कि धार्मिक स्थलों, चाहे मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च हों, सभी जगह जांच हो। मुजफ्फरनगर में अब तक कोई बड़ा विरोध नहीं हुआ, लेकिन स्थानीय प्रशासन सतर्क है। एसएसपी ने कहा कि हम धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन कानून सबके लिए बराबर है।

मुजफ्फरनगर जिला उत्तर प्रदेश का एक ऐसा क्षेत्र है जहां धार्मिक विविधता अधिक है। यहां हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदाय शांतिपूर्ण ढंग से रहते हैं। 2013 के दंगों के बाद से प्रशासन यहां अतिरिक्त सतर्क रहता है। लाउडस्पीकरों का अत्यधिक उपयोग अक्सर विवाद का कारण बनता है। स्थानीय निवासी मोहम्मद अशरफ ने कहा कि हम समझते हैं कि शोर से परेशानी होती है। पुलिस ने सही किया। एक अन्य निवासी रमेश कुमार ने बताया कि रात में अजान या भजन की आवाज से नींद टूट जाती थी। अब सुकून मिलेगा। लेकिन कुछ लोगों ने चिंता जताई कि क्या यह कार्रवाई निष्पक्ष है। एक मस्जिद कमेटी के सदस्य ने कहा कि हमारे लाउडस्पीकर कम आवाज के थे, फिर भी हटा दिए। हम अपील करेंगे। पुलिस ने जवाब दिया कि जांच के बाद ही कार्रवाई की जाती है।

राज्य स्तर पर यह अभियान 2022 से चल रहा है। अप्रैल 2022 में 6,031 लाउडस्पीकर हटाए गए थे। मार्च 2025 में मुख्यमंत्री ने स्थायी समाधान की मांग की थी। डेप्युटी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी महाराष्ट्र में इसी तरह के निर्देश दिए। उत्तर प्रदेश में अब तक 17,000 से अधिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों की आवाज कम की गई है। डीजीपी ने दैनिक रिपोर्ट मांगी है। मुजफ्फरनगर में अगले कुछ दिनों में अन्य थाना क्षेत्रों में भी जांच होगी। एसपी ने कहा कि हम प्रबंधकों को प्रशिक्षण देंगे कि कैसे डेसिबल मापा जाता है। अनुमति के लिए स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें। यह कदम पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। शोर प्रदूषण से तनाव, उच्च रक्तचाप और सुनने की क्षमता प्रभावित होती है।

सोशल मीडिया पर यह खबर वायरल हो रही है। ट्विटर पर #MuzaffarnagarLoudspeakers जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। कई यूजर्स ने पुलिस की तारीफ की, कहा कि यह समानता का संदेश है। एक पोस्ट में लिखा गया कि सभी धर्मों के स्थलों से हटाए गए, कोई भेदभाव नहीं। लेकिन कुछ ने सवाल उठाए कि क्या ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही होगा। न्यूज चैनलों ने कवरेज किया। एनडीटीवी और हिंदुस्तान टाइम्स ने रिपोर्ट प्रकाशित की। स्थानीय अखबारों में भी सुर्खियां बनीं। मुजफ्फरनगर के डीएम ने कहा कि हम शांति बनाए रखेंगे। कोई उकसावे वाली कार्रवाई नहीं।

यह अभियान उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूत करता है। योगी सरकार ने शोर प्रदूषण पर सख्ती बढ़ाई है। जनवरी 2025 में आगरा में अनधिकृत लाउडस्पीकर हटाने का अभियान चला। पुलिस ने कहा कि भविष्य में उपयोग के लिए प्रशासनिक अनुमति जरूरी होगी। 40 डेसिबल से अधिक नहीं। मुजफ्फरनगर में स्थानीय संगठनों ने समर्थन किया। हिंदू संगठनों ने कहा कि मंदिरों से भी हटाना सही है। मुस्लिम समुदाय ने अपील की कि संवाद से समाधान हो। यह घटना सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देगी।

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