Sultanpur : कवयित्री निरुपमा श्रीवास्तव को अवधी साहित्य में योगदान के लिए सम्मानित किया गया

कार्यक्रम में निरुपमा श्रीवास्तव ने काव्य पाठ किया और अवधी की मिठास से सबको प्रभावित किया। उन्होंने अपनी रचना सुनाई - दुख जौ न होये जीवन मा सुख कै परिभाषा का होए, सरबस जौ पूरी

Mar 12, 2026 - 23:28
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Sultanpur : कवयित्री निरुपमा श्रीवास्तव को अवधी साहित्य में योगदान के लिए सम्मानित किया गया
Sultanpur : कवयित्री निरुपमा श्रीवास्तव को अवधी साहित्य में योगदान के लिए सम्मानित किया गया

सुलतानपुर की कवयित्री डॉ. निरुपमा श्रीवास्तव को अवधी भाषा और साहित्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए शब्दम् संस्था ने सम्मानित किया। शिकोहाबाद के संस्कृति भवन सभागार में महिला सम्मान समारोह और काव्य पाठ का आयोजन हुआ।

कार्यक्रम में निरुपमा श्रीवास्तव ने काव्य पाठ किया और अवधी की मिठास से सबको प्रभावित किया। उन्होंने अपनी रचना सुनाई - दुख जौ न होये जीवन मा सुख कै परिभाषा का होए, सरबस जौ पूरी रहा बोला कौनो अभिलाषा का होए। मावस बिन पूरनमासी के अस्तित्व रहे का यहि जग मा, जौ रात न होने अधियारी तौ चमके चांद कहा नभ मा। इस रचना से श्रोता भावुक हो गए और अवधी भाषा से जुड़ने का संदेश मिला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन डॉ. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ने किया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को बहुत सम्मान मिलता है। शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा - यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः, यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रिया। भारतीय परंपरा में नवरात्र में दो बार बेटियों का पूजन होता है। राम से पहले सीता, कृष्ण से पहले राधा और शंकर से पहले गौरी का नाम लिया जाता है। मातृत्व और नारी शक्ति को सर्वोच्च स्थान मिलता है। गार्गी, अपाला, घोषा और अरुंधति जैसी विदुषी महिलाएं वेदों में पूजनीय हैं। कार्यक्रम में साहित्य प्रेमी, कवि और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए, जिससे आयोजन सफल रहा।

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