कुशीनगर से संदिग्ध आईएसआईएस आतंकी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किया बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़
कुशीनगर जैसे शांत इलाके में इस तरह की गतिविधि का मिलना स्थानीय पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला विषय है। गिरफ्तारी के बाद, संदिग्ध को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया गया है, जहां स्पेशल सेल के अधिकारी उससे गहन पूछताछ क
- कुशीनगर में आतंकी साजिश का अंत: दिल्ली पुलिस और यूपी एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में दबोचा गया खतरनाक संदिग्ध
- राजधानी दिल्ली में बड़ी तबाही की तैयारी? आईएसआईएस मॉड्यूल से जुड़े संदिग्ध के पास से मिला आपत्तिजनक सामान
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से हाल ही में एक बड़ी सुरक्षा कार्रवाई की खबर सामने आई है, जहां दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उत्तर प्रदेश एटीएस (एंटी-टेररिज्म स्क्वाड) के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन के दौरान प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया है। पकड़े गए संदिग्ध की पहचान रिजवान अहमद के रूप में हुई है, जिसकी उम्र लगभग 30 वर्ष बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को काफी समय से इस संदिग्ध की गतिविधियों पर संदेह था, जिसके बाद उसकी सघन निगरानी की जा रही थी। यह गिरफ्तारी न केवल एक व्यक्ति की धरपकड़ है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है क्योंकि इससे संभावित आतंकी साजिशों को समय रहते नाकाम कर दिया गया है।
पकड़े गए संदिग्ध के पास से भारी मात्रा में देशविरोधी और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद सामान में जिहादी साहित्य, डिजिटल उपकरण और कुछ ऐसी विस्फोटक सामग्री शामिल है जिसका उपयोग बम बनाने में किया जा सकता है। बरामद किए गए मोबाइल फोन और लैपटॉप की प्राथमिक जांच में कुछ ऐसी कूटबद्ध (encrypted) चैट मिली हैं, जो सीधे तौर पर विदेशी आकाओं से संपर्क की ओर इशारा करती हैं। जांच अधिकारी वर्तमान में इन उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि संदिग्ध व्यक्ति किन लोगों के संपर्क में था और उसके भविष्य के लक्ष्य क्या थे। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी संकेत मिले हैं कि वह स्थानीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने की कोशिशों में भी जुटा हुआ था।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, रिजवान अहमद का इतिहास काफी पुराना और विवादास्पद रहा है। वह पहले भी आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप में जेल जा चुका है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2015-16 के दौरान उसे मुंबई पुलिस ने एक आतंकी मामले में गिरफ्तार किया था, जिसके बाद वह साल 2023 तक मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद रहा था। जेल से छूटने के बाद वह अपने पैतृक स्थान कुशीनगर वापस आ गया था और वहां पडरौना क्षेत्र में एक खाने का स्टाल (food kiosk) चलाकर सामान्य जीवन जीने का ढोंग कर रहा था। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता की वजह से उसका यह मुखौटा ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका और यह पाया गया कि वह फिर से ऑनलाइन माध्यमों से आतंकी संगठनों के संपर्क में आ गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और यूपी एटीएस पिछले कई हफ्तों से कुशीनगर के इस संदिग्ध पर नजर रख रही थी। यह ऑपरेशन पूरी तरह से खुफिया जानकारी पर आधारित था, जिसमें संदिग्ध के हर कदम की डिजिटल निगरानी की गई। एजेंसियों को इस बात की आशंका थी कि वह दिल्ली या उत्तर प्रदेश के किसी बड़े शहर में विस्फोटक हमला करने की योजना बना रहा था।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संदिग्ध न केवल खुद आतंकी विचारधारा से प्रेरित था, बल्कि वह भर्ती करने वाले (recruiter) की भूमिका भी निभा रहा था। उसने मुंबई प्रवास के दौरान भी कुछ युवाओं को गुमराह कर विदेशी आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रेरित किया था। कुशीनगर में अपनी वापसी के बाद, उसने फिर से उन संपर्कों को सक्रिय करना शुरू कर दिया था। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि उसके साथ इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। संदेह जताया जा रहा है कि यह संदिग्ध एक 'स्लीपर सेल' के तौर पर काम कर रहा था, जिसे उचित समय पर सक्रिय होकर बड़ी घटना को अंजाम देने का निर्देश दिया गया था।
कुशीनगर जैसे शांत इलाके में इस तरह की गतिविधि का मिलना स्थानीय पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला विषय है। गिरफ्तारी के बाद, संदिग्ध को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाया गया है, जहां स्पेशल सेल के अधिकारी उससे गहन पूछताछ कर रहे हैं। इस गिरफ्तारी के बाद पूरे उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। सार्वजनिक स्थलों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से आईएसआईएस के उस नेटवर्क को तोड़ने में मदद मिलेगी जो भारत के विभिन्न हिस्सों में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है।
पकड़े गए संदिग्ध के पास से मिले दस्तावेजों में कुछ नक्शे और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सूची भी मिली है, जिससे यह अंदेशा और गहरा गया है कि वह किसी बड़े हमले की फिराक में था। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसे हथियारों या विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति कहां से होने वाली थी। इस मामले में पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसियां इस समय उन सभी बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही हैं, जिनसे इस संदिग्ध को धन प्राप्त हो रहा था। यह माना जा रहा है कि सीमा पार से मिलने वाली फंडिंग ही इन गतिविधियों का मुख्य आधार है।
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