Lucknow: सरकार ने कृषि विश्वविद्यालयों एवं विभिन्न शोध परियोजनाओं हेतु 23.36 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृतियां कीं जारी।
प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास, उच्च शिक्षा और शोध कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कुल 23.36 करोड़ रुप
- प्रदेश की कृषि शिक्षा और तकनीकी शोध को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार पूरी तरह संकल्पबद्ध: सूर्य प्रताप शाही
- कृषि शोध और ढांचागत सुधारों से किसानों को मिलेगा उन्नत तकनीक का लाभ
लखनऊ: प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास, उच्च शिक्षा और शोध कार्यों को गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत कुल 23.36 करोड़ रुपये (2336.88 लाख रुपये) की महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। यह धनराशि राज्य के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों में चल रहे शोध कार्यों और ढांचागत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु आवंटित की गई है, जिससे प्रदेश की कृषि व्यवस्था को आधुनिक वैज्ञानिक आधार प्राप्त होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित विभिन्न शोध परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु सर्वाधिक 10.26 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। इसी क्रम में, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर में शिक्षण एवं शोध कार्यों के सुदृढ़ीकरण हेतु 7.00 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, अयोध्या के तहत एग्रो क्लाइमेटिक जोन में कृषि शोध एवं शिक्षण के विस्तार हेतु 5.00 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वित्तीय आवंटन के अगले चरण में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से संचालित विभिन्न परियोजनाओं हेतु 1.08 करोड़ रुपये तथा ई-ऑफिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु 0.025 करोड़ रुपये (2.50 लाख रुपये) की धनराशि जारी की गई है।
प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार कृषि विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय शोध और शैक्षणिक वातावरण तैयार करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन तकनीकी शोधों और नवाचारों का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और खेती अधिक वैज्ञानिक व लाभकारी बनेगी। कृषि मंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का लक्ष्य है कि हमारे कृषि विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय शोध का केंद्र बनें, ताकि प्रदेश का अन्नदाता तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त होकर राष्ट्र के विकास में योगदान दे सके।
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