Viral: बलोच नेता का PM Modi को खुला पत्र, 'ऑपरेशन सिंदूर' सात दिन और चलता तो बलूचिस्तान आजाद होता

‘ऑपरेशन सिंदूर’ 7 मई 2025 को शुरू हुआ था, जब भारतीय सशस्त्र बलों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत क...

May 28, 2025 - 22:41
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Viral: बलोच नेता का PM Modi को खुला पत्र, 'ऑपरेशन सिंदूर' सात दिन और चलता तो बलूचिस्तान आजाद होता
Photo: Social Media

नई दिल्ली : बलूचिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार मीर यार बलोच ने भारत के PM नरेंद्र मोदी (Modi) को एक खुला पत्र लिखकर ‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ की सराहना की और दावा किया कि यदि यह सैन्य अभियान सात दिन और चलता, तो बलूचिस्तान आज पाकिस्तान से स्वतंत्र हो चुका होता। इस पत्र में बलोच ने पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई को आतंकवाद का जन्मदाता करार देते हुए भारत से बलूचिस्तान की आजादी के संघर्ष में खुलकर समर्थन देने की अपील की है। यह पत्र भारत-पाकिस्तान संबंधों, बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग, और क्षेत्रीय भू-राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है।

पत्र और ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)

‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ 7 मई 2025 को शुरू हुआ था, जब भारतीय सशस्त्र बलों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इस हमले में 26 लोग, मुख्य रूप से हिंदू पर्यटक, मारे गए थे, और आतंकियों ने हिंदू महिलाओं के सिंदूर को अपमानित करने की कोशिश की थी। PM मोदी (Modi) ने इस ऑपरेशन को ‘न्याय की अखंड प्रतिज्ञा’ करार दिया, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को नष्ट किया गया। ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, और पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में लिखा कि इस ऑपरेशन के दौरान बलूच जनता ने भारत का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने दावा किया, “अगर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) एक हफ्ते और चलता, तो आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत और दुनिया से बात कर रहे होते।” उन्होंने भारत से बलूचिस्तान की आजादी के लिए आधिकारिक समर्थन और दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास खोलने की मांग की।

पत्र में मुख्य बिंदु

मीर यार बलोच ने अपने पत्र में पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई हर महीने नए आतंकी संगठन बनाती हैं, जिन्हें भारत, अफगानिस्तान, बलूचिस्तान, और यहां तक कि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने 28 मई 1998 को बलूचिस्तान के चगाई में किए गए पाकिस्तानी परमाणु परीक्षणों को “नरसंहार की शुरुआत” बताया, जिसके कारण खेत नष्ट हो गए, मवेशी मरे, और बच्चे विकलांग पैदा हो रहे हैं।

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बलोच ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों—सोना, तांबा, गैस, तेल, और यूरेनियम—का दोहन करके अपनी कमजोर अर्थव्यवस्था को चला रहा है और इन संसाधनों से आतंकी संगठनों को फंडिंग करता है। उन्होंने चीन पर भी निशाना साधा, जिसने बलूचिस्तान में समुद्री अड्डे और एशिया का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बनाया है, और पाकिस्तानी सेना को समर्थन दे रहा है।

बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग

पत्र में बलोच ने बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जल्द ही कई टुकड़ों में बिखर सकता है, क्योंकि PoK, सिंध, और बलूचिस्तान में आजादी की मांग तेज हो रही है। बलूचिस्तान ने पहले ही खुद को एक अलग राष्ट्र घोषित कर लिया है और भारत, संयुक्त राष्ट्र, और अन्य देशों से मान्यता की मांग कर रहा है।

मीर यार ने भारत से बलूचिस्तान की आजादी के संघर्ष में खुलकर साथ देने की अपील की। उन्होंने लिखा, “भारत को बलूचिस्तान के साथ आधिकारिक संबंध स्थापित करने चाहिए।” यह अपील भारत की क्षेत्रीय रणनीति और पाकिस्तान के खिलाफ उसकी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ ने न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाया, बल्कि क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डाला। PM मोदी (Modi) ने 12 मई 2025 को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि भारत ने आतंकियों के ठिकानों को नष्ट कर “पाकिस्तान के सीने पर वार” किया। उन्होंने तीन सूत्र दिए: पहला, आतंकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा; दूसरा, परमाणु हथियारों की धमकी से भारत नहीं डरेगा; और तीसरा, आतंकियों और उनके सरपरस्तों को एक ही माना जाएगा।

ऑपरेशन के बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम हुआ, जिसे कुछ विपक्षी नेताओं ने अमेरिकी दबाव का परिणाम बताया। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब भारतीय सेना PoK पर कब्जा कर सकती थी और बलूचिस्तान को आजाद कर सकती थी, तो सीजफायर क्यों किया गया?

मीर यार बलोच के पत्र ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। @ZeeNews ने X पर पोस्ट किया, “7 दिन और चल जाता ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor), तो आज हम आजाद होते, बलोच नेता ने लिखा PM Modi को खुला पत्र, पाकिस्तान की खोली पूरी कुंडली।” @Kashi_nandan ने लिखा, “जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के तहत आतंक के आका पाकिस्तान को करारा जवाब दिया, तब बलूचिस्तान भारत के हर कदम पर नजर गढ़ाए बैठा था।”

हालांकि, कुछ आलोचकों ने ऑपरेशन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। @bhadas4media ने लिखा, “ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) आतंकवाद खत्म करने के लिए नहीं, चुनावी लाभ के लिए था।”

भारत ने हमेशा बलूचिस्तान मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाया है। 2016 में, PM मोदी (Modi) ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र किया था, जिसे भारत के समर्थन के रूप में देखा गया। मीर यार बलोच के पत्र ने भारत के सामने एक नई चुनौती पेश की है। यदि भारत बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करता है, तो यह पाकिस्तान के साथ संबंधों को और तनावपूर्ण कर सकता है। मीर यार बलोच का पत्र ‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ की वैश्विक और क्षेत्रीय प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। यह न केवल भारत की आतंकवाद के खिलाफ नीति को मजबूत करता है, बल्कि बलूचिस्तान की स्वतंत्रता की मांग को भी वैश्विक मंच पर लाता है।

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