Hardoi: तालाब में मौत का भंवर: सिंघाड़े निकालने गईं तीन मासूम, तालाब ने छीन लीं सांसें।

नियति कब, किस रूप में वार कर दे, कोई नहीं जानता। शुक्रवार की वह दोपहर रामपुर दहेलिया गांव के परिवारों के लिए काल बनकर

Feb 20, 2026 - 15:58
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Hardoi: तालाब में मौत का भंवर: सिंघाड़े निकालने गईं तीन मासूम, तालाब ने छीन लीं सांसें।
तालाब में मौत का भंवर: सिंघाड़े निकालने गईं तीन मासूम, तालाब ने छीन लीं सांसें।

पिहानी/ हरदोई: नियति कब, किस रूप में वार कर दे, कोई नहीं जानता। शुक्रवार की वह दोपहर रामपुर दहेलिया गांव के परिवारों के लिए काल बनकर आई। जो किशोरियां चहकते हुए तालाब की ओर बढ़ी थीं, उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि पानी की लहरों के नीचे मौत का जाल बिछा है। आज उस तालाब के किनारे सिर्फ चीखें हैं, सिसकियां हैं और पथराई हुई आंखें हैं, जो पानी की सतह को इस उम्मीद में ताक रही हैं कि शायद उनकी बेटियां सकुशल वापस आ जाएं।

  • मासूम की चीख से दहल गया गांव

दोपहर का वक्त था, सूरज सिर पर था। गांव के पास के तालाब में सिंघाड़े निकालने की जिद लेकर तीन सहेलियां—जानवी, प्रियंका और आरुषि—पानी में उतरी थीं। खेलते-कूदते कब उनके कदम गहरे भंवर की ओर बढ़ गए, उन्हें पता ही नहीं चला। जब पानी गले तक आया, तो हंसी की जगह डरावनी चीखों ने ले ली। पास ही बकरियां चरा रहे एक मासूम बच्चे ने जब अपनी आंखों के सामने इन किशोरियों को डूबते देखा, तो उसके हलक से ऐसी चीख निकली जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया।

  • एक को मिली 'जिंदगी', दो अब भी लहरों के कब्जे में

शोर सुनकर ग्रामीण अपनी जान की परवाह किए बिना तालाब में कूद पड़े। कड़ी मशक्कत के बाद 14 वर्षीय जानवी को तो मौत के मुंह से खींच निकाला गया, लेकिन 12 वर्षीय प्रियंका और 13 वर्षीय आरुषि का हाथ लहरों से छूट गया।

"पानी गहरा था, हाथ-पांव मारे पर वो दिखाई नहीं दीं..." — एक प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण की आंखों से आंसू छलक पड़े।
परिजन बेहाल, थमी हैं सबकी सांसें

हादसे के बाद से गांव में चूल्हे नहीं जले हैं। लापता बच्चियों के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। आरुषि के पिता कमलेश और प्रियंका के परिजन बार-बार तालाब की ओर भागते हैं, जिन्हें संभालना मुश्किल हो रहा है।

रेस्क्यू ऑपरेशन: पुलिस प्रशासन और स्थानीय गोताखोर लगातार पानी खंगाल रहे हैं।
मातम का साया: जैसे-जैसे सूरज ढल रहा है, परिजनों की उम्मीदें भी धुंधली पड़ती जा रही हैं।

प्रशासनिक मुस्तैदी: मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सर्च ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा जब तक बच्चियों का सुराग नहीं मिल जाता। लेकिन फिलहाल, रामपुर दहेलिया गांव की फिजाओं में सिर्फ सिसकियां और एक अनजाना डर व्याप्त है।

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