Lucknow News: भातखंडे विश्वविद्यालय में कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन। 

संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित उ० प्र० राज्य ललित कला अकादमी तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित....

Jun 25, 2025 - 20:13
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Lucknow News: भातखंडे विश्वविद्यालय में कार्यशाला एवं प्रदर्शनी का आयोजन। 

लखनऊ: संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित उ० प्र० राज्य ललित कला अकादमी तथा दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष 20 दिवसीय स्ववित्तपोषित ग्रीष्मकालीन चित्रकला कार्यशाला का शुभारंभ आज विश्वविद्यालय के कन्वेंशन हॉल में हुआ। इस अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी ‘कलायात्रा’ ने कार्यक्रम में एक रचनात्मक और सांस्कृतिक रंग भर दिया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन रहीं। उन्होंने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कला न केवल आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम है, बल्कि समाज और संस्कृक्ति को जोड़ने वाली एक सशक्त कड़ी भी है। उन्होंने इस कार्यशाला को विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया और कहा कि इससे न केवल तकनीकी कौशल विकसित होगा, बल्कि सौंदर्यबोध भी निखरेगा। विशिष्ट अतिथि के रुप में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. रंजनत राव ने भी कार्यशाला के महत्व को रेखांकित करते हुए रचनात्मकता और अनुसंधान में संतुलन पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. उमा सिंह, विभागाध्यक्ष, ललित कला एवं संगीत विभाग, ने की। उन्होंने कार्यशाला की रुपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इसमें पारंपरिक एवं समकालीन चित्रकला की विधाओं को सिखाया जाएगा।

इस अवसर पर प्रदर्शनी ‘कलायात्रा’ का उद्घाटन भी हुआ, जिसमें प्रतिभागी विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई आकर्षक कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गई। प्रदर्शनी में पारंपरिक भारतीय चित्रकला जैसे मधुबनी, वारली, पटचित्र के साथ आधुनिक प्रयोगधर्मी शैली की झलक देखने को मिली, जिसने सभी आगंतुकों को अत्यंत प्रभावित किया।

कार्यशाला का संयोजन डॉ. गौरीशंकर चौहान, सह आचार्य, ललित कला एवं संगीत विभाग, ने किया है। कार्यक्रम की निदेशक मंडली में डॉ. श्रद्धा बृजनन्दिनी एवं डॉ. सुनील कुमार विशेषार्ची, राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश से जुड़ी वरिष्ठ कलाविद् सम्मिलित हैं। इसके अतिरिक्त डॉ. प्रद्युम्न वासिष्ट एवं डॉ. प्रद्युम्न राजनायक सह-संयोजक एवं प्रशिक्षण सहयोगी के रूप में कार्यशाला को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

इस कार्यशाला में आने वाले 20 दिनों तक चित्रकला से जुड़ी विभित्र तकनीकों, रचनात्मक विषयों, व्याख्यानों तथा अतिथि कलाकारों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विश्वविद्यालय के विद्यार्थी, शोधार्थी तथा कला-प्रेमी सक्रिय रूप से भाग लेंगे। यह आयोजन न केवल एक अकादमिक गतिविधि है, बल्कि एक सांस्कृतिक उत्सव भी है जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए नवाचार की ओर प्रेरित करता है।

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